विश्व कप क्रिकेट फाइनल

गत रविवार इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया विश्व कप क्रिकेट फाइनल अपने रोमांच के साथ कुछ अटपटे नियमों के कारण भी हमेशा याद किया जाएगा। दोनों टीमों का 50 ओवर के बाद 241 दौड़ों पर बराबर रहना और सुपर ओवर में भी दोनों टीमों द्वारा 15-15 दौड़ें बनाये जाने से मैच टाई हो गया और आई.सी.सी. के नियम अनुसार वही टीम विजेता बनी जिसने निर्धारित 50 ओवरों में चौके अधिक लगाए। न्यूजीलैंड ने अपनी पारी में 16 चौके लगाए जबकि इंग्लैंड ने 24 चौके लगाए और इसी कारण वह विश्वकप का विजेता घोषित किया गया। अगर निर्णय का आधार विकेट गिरना होता तो न्यूजीलैंड की टीम विजेता होती क्योंकि उसके आठ खिलाड़ी आऊट हुए थे और इंग्लैंड की टीम के सारे खिलाड़ी आऊट हो चुके थे।

विश्वकप फाइनल में हारने के बाद न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन ने कहा कि खिताब के इतने करीब आकर हारना दु:खद है। केन की भावनाओं को सारा विश्व समझ रहा है और इसीलिए इंग्लैंड की जीत पर भी उंगली उठाई जा रही है। मैच के दौरान अंपायरों ने इंग्लैंड को 'ओवर थ्रो' के लिए 5 के बजाए 6 रन देने का जो फैसला किया उस पर पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर साइमन टफेल और के इरिहरन का कहना है कि यह फैसला गलत था। श्रीलंका के कुमार धर्मसेना और दक्षिण अफ्रीका के मारियास इरासमुस मैदानी अंपायर थे। आई.सी.सी. के 5 बार वर्ष के सर्वश्रेष्ठ अंपायर चुने गए टफेल ने कहा, यह साफ गलती थी। यह बहुत खराब फैसला था। उन्हें (इंग्लैंड) 5 रन दिए जाने चाहिए थे, 6 रन नहीं। पूर्व भारतीय अंपायर के. हरिहरन ने टफेल की हां में हां मिलाते हुए कहा, कुमार धर्मसेना ने न्यूजीलैंड के विश्व कप के सपने को तोड़ दिया। यह 6 नहीं 5 रन होने चाहिए थे। आई.सी.सी. ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। स्टाफ डॉट कॉम डॉट न्यूजीलैंड ने लिखा, क्रिकेट विश्व कप फाइनल चौकों-छक्कों की गिनती ने न्यूजीलैंड को जीत से महरूम किया। 'न्यूजीलैंड हेराल्ड' ने लिखा क्रिकेट विश्वकप फाइनल: 22 नायक और कोई विजेता नहीं। एक अन्य कालम में लिखा ओवरथ्रो के लिये इंग्लैंड को 6 नहीं, 5 रन मिलने चाहिये थे। न्यूजीलैंड के पूर्व कोच माइक हेसन ने कहा कि विश्व कप फाइनल का फैसला सुपर ओवर के आधार पर नहीं किया जाना चाहिये था। उन्होंने अपने कालम में लिखा केन विलियम्सन और इयोन मोर्गन दोनों को कप दिया जाना चाहिये था। इस तरह का फाइनल कोई भी टीम नहीं हारना चाहेगी। न्यूजीलैंड के कप्तान विलियम्सन के हाथ में भी कप होना चाहिये था। न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग ने इस पर मात्र एक शब्द में अपनी प्रतिक्रिया दी। 'क्रूर' भारतीय टैस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने भी कहा कि न्यूजीलैंड के लिए यह हार दुर्भाग्यपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इस मुकाबले में कोई भी टीम नहीं हारी। दोनों को विजेता ट्राफी दी जानी चाहिए थी। आई.सी.सी. को अपने इस नियम के बारे में फिर से सोचना चाहिए। ऐसा पहली बार हुआ, इसलिए कोई इस बारे में सोच नहीं पाया। फाइनल में मैन ऑफ द मैच बने बेन स्टोक्स के पिता गेरार्ड स्टोक्स का भी मानना है कि विजेता ट्राफी को दोनों टीमों में बांटा जाना चाहिए था। गेरार्ड न्यूजीलैंड के पूर्व रग्बी इंटरनैशनल खिलाड़ी हैं और उन्होंने फाइनल में अपने बेटे के प्रदर्शन पर खुशी जताई। पूर्व भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी इस नियम पर सवाल उठाते हुए कहा, मुझे समझ नहीं आता कि इतने बड़े टूर्नामैंट के फाइनल का फैसला इस आधार पर हो सकता है कि किसने अधिक बाऊंड्री मारीं। हास्यास्पद नियम.. इसे टाई मान दोनों को विजेता घोषित करना चाहिए था। मैं दोनों टीमों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इतना जबरदस्त फाइनल खेला। मेरे लिए दोनों विजेता हैं। क्रिकेट लीजैंड सचिन तेंदुलकर ने कहा, जबरदस्त मुकाबला। पहली से लेकर 612वीं गेंद तक। मुझे न्यूजीलैंड के लिए दुख हो रहा है जिसने जीतने के लिए इंग्लैंड की तरह सब कुछ किया लेकिन अंत में चूक गए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग ने कहा, न्यूजीलैंड ने जबरदस्त मुकाबला किया लेकिन ओवर थ्रो पर स्टोक्स के बल्ले का डिफ्लेक्शन और इंग्लैंड को बाऊंड्री मिलना मैच का टर्निंग प्वाइंट था। न्यूजीलैंड के लिए दुखद कि इतना नजदीक पहुंच कर भी वे खिताब से दूर रहे, लेकिन उन्हें खुद पर गर्व होना चाहिए। न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस ने इस नियम को एक मजाक बताया। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर माइकल वॉन ने फाइनल की सराहना करते हुए कहा कि कोई भी टीम हारना नहीं चाहती थी। विश्व कप 2011 के प्लेयर ऑफ द टूर्नामैंट रहे युवराज सिंह ने लिखा, मैं नियम से सहमत नहीं हूं लेकिन नियम तो नियम है।

गौरतलब है कि 2012 में तय हुई थीं ये तीन शर्तें टाई होने पर सुपर ओवर होता है। मैच में पहले बैटिंग करने वाली टीम सुपर ओवर में पहले फील्डिंग करती है। जैसे रविवार को इंग्लैंड को बैटिंग मिली। पुरानी गेंद से ही ओवर होता है। 2 विकेट गिरते ही पारी खत्म हो जाती है। हर टीम एक रिव्यू ले सकती है। ज्यादा रन बनाने वाली टीम जीत जाती है। अगर सुपर ओवर भी टाई हो जाए तो पूरी पारी में (सुपर ओवर भी शामिल) ज्यादा बाउंड्री लगाने वाली टीम जीतती है। जैसे इंग्लैंड को जीत मिली। अगर दोनों टीमों ने बराबर बाउंड्री लगाई है तो सुपर ओवर को छोड़कर बाकी की इनिंग में जिस टीम ने ज्यादा बाउंड्री लगाई है, वो विजेता बनती है। अब अगर इन बाउंड्री की संख्या भी बराबर हो तो फिर सुपर ओवर की पारी देखी जाती है। इसमें आखिरी बॉल से गणना शुरू होती है। अगर आखिरी गेंद पर पहली टीम ने चार और दूसरी ने छह रन बनाए तो दूसरी टीम विजेता। हालांकि एक जैसे स्कोर होने के बाद की स्थिति स्पष्ट नहीं है। क्रिकेट के नियम मेरिलबोन क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीसी) बनाती है। वर्षों तक नियम यह था कि अगर दो टीमें बराबरी पर फाइनल मैच खत्म करती हैं तो उस टीम को विजेता घोषित किया जाएगा, जिसकी कम विकटें गिरीं हों। पर 2012 में सुपर ओवर के साथ ही बाउंड्री काउंट नियम जोड़ा गया। 2015 और इस वल्र्ड कप में ये नियम सिर्फ फाइनल के लिए ही था लेकिन इसकी आलोचना हो रही है। इस नियम को लाने के पीछे आईसीसी की मंशा फुटबॉल में पैनल्टी शूटआउट जैसे रोमांच को लाने की थी।

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को लाड्र्स के मैदान में विश्व कप क्रिकेट फाइनल क्रिकेट के इतिहास में अपने रोमांच कारण अलग पहचान बनाने के कारण हमेशा याद रहेगा। वही आई.सी.सी. को अपने द्वारा बनाये नियमों को लेकर पुन: विचार करने के लिए भी मजबूर करेगा। खेल शुरू होने से लेकर अंतिम गेंद फैंकने तक रोमांच बना रहा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि 50 ओवर और सुपर ओवर में जब स्कोर बराबर रहे तो भविष्य में कम से कम दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किए जाने का नियम ही उचित रहेगा। रनों और विकटों के आधार पर किया जाने वाला फैसला किसी न किसी टीम की भावनाओं से खिलवाड़ जैसा ही होगा जैसा कि न्यूजीलैंड के साथ हुआ है। न्यूजीलैंड को अगर संयुक्त विजेता घोषित किया जाता तो शायद विश्व के सभी खेल विशेषतया क्रिकेट प्रेमियों को और अधिक खुशी होती लेकिन आज एक बड़ा वर्ग इंग्लैंड की जीत पर इतना खुश नहीं जितना न्यूजीलैंड की हार को लेकर दु:खी है। इंग्लैंड अगर अधिकृत रूप से विश्व विजेता है तो न्यूजीलैंड भी उससे कम नहीं। जब भी 2019 का जिक्र होगा हमेशा यह बात भी कही जाएगी।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।