खेतों में काम कराने के लिए महिलाओं की बच्चेदानी निकाली, राज्यसभा में गूंजा मामला

01:52 PM Jul 19, 2019 |

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)-महाराष्ट्र के वीड जिले में गन्ना के खेतों में काम करने वाली महिला श्रमिकों की बच्चेदानी निकालने का मामला शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया और इसे गंभीरता से लेने की अपील की गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चौहान ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे उठाते हुये कहा कि महिलाओं और बच्चों के प्रति हिंसा में दिनोंदिन बढोतरी हो रही है और नये-नये तरीके की हिंसा सामने आ रही है। इसीक्रम में वीड में गन्ना के खेतों में काम करने वाली महिला श्रमिकों की बच्चेदानी निकालने का मामला भी प्रकाश में आया है जो बहुत ही गंभीर मसला है। 


उन्होंने कहा कि 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग की महिला श्रमिकों के साथ इस तरह की घटनाएं हुई हैं जिसे ठेकेदारों ने अंजाम दिया है। कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने उत्तर प्रदेश में एक विधायक की पुत्री के अंतरजातीय विवाह करने के मुद्दे को उठाते हुये कहा कि अंतरजातीय विवाह की वजह से पूरे देश में हिंसा होती रहती है। उन्होंने कहा कि गुजरात, पंजाब और हरियाणा में भी इसको लेकर हिंसा हो चुकी है। अंतरजातीय विवाह में यदि एक व्यक्ति दलित परिवार से है तो मामला और गंभीर हो जाता है। इस तरह की दंपति को संरक्षण देने की बात कही गयी है और संरक्षण गृह बनाने के लिए कहा गया था लेकिन अधिकांश राज्यों में ऐसी व्यवस्था नहीं है। 

समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने अल्पसंख्यकों के प्रधानमंत्री 15 सूत्रीय कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुये कहा कि इसमें छह सूत्र शिक्षा से संबंधित, चार सूत्र राेजगार से संबंधित, दो सूत्र जीवनयापन से संबंधित और तीन सूत्र सांप्रदायिकता की स्थिति में मदद से संबंधित है। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर, राज्य स्तर और केन्द्रीय स्तर पर समितियां बनी हुयी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उत्तर प्रदेश के सात जनपदों की समितियों में उनको सदस्य बनाया गया था लेकिन अब तक किसी भी समिति की एक भी बैठक के लिए उन्हें नहीं बुलाया गया है जबकि जिला स्तरीय समिति की तिमाही बैठक का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को इस 15 सूत्रीय कार्यक्रम को तत्काल बंद कर देना चाहिए या इसको सक्रियता से संचालित करना चाहिए।