Tuesday, September 18, 2018 11:11 PM

WHO के आंकड़े आए सामने, भारत के 42 करोड़ लोग आलसी 

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : पैसे कमाने की दौड़ में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि टेंशन से निजात पाने के लिए वे सिर्फ नेट सर्फिंग का सहारा ले रहे हैं। खासतौर पर भारत में जहां परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है यहां भी लोग परिवार में बैठकर बात करने की बजाय फोन पर नेट चलाने में ही बिजी रह रहे हैं। सारे सप्ताह के बिजी शेड्यूल के कारण लोग वीकैंड को तवज्जो तो देते हैं लेकिन घूमने फिरने की बजाय आराम करने लग पड़ते हैं और इसी कारण वे आलसी बनते जा रहरे हैं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आलस की वजह से लोगों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। 

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डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 35 फीसदी (42 करोड़) से ज्यादा लोग शारीरिक श्रम करने में आलस करते हैं  डब्ल्यूएचओ के एक सर्वेक्षण के अनुसार, शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं दिखाने के कारण इन लोगों को दिल की बीमारी के साथ-साथ कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों का खतरा बना रहता है। 2016 में भारत में शारीरिक श्रम कम करने वाली महिलाएं करीब 50 फीसदी थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 25 फीसदी था. दुनियाभर में तीन में से एक महिला पर्याप्त वर्कआउट नहीं करती है, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा चार में से एक है।

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