बर्बादी और पतन

10:43 AM Jun 27, 2020 |

जब देश व दुनिया नशीली दवाओं और अवैध तस्करी के विरोध में अंतरराष्ट्रीय दिवस यानि 26 जून को मना रही थी उसी दिन के समाचार पत्रों की सुर्खी यह थी कि पंजाब में पट्टी के गांव कैरों में नशा तस्करी करने वाले एक परिवार के चार सदस्यों और उनके नौकर की हत्या कर दी गई। पुलिस अनुसार मृृतक नशा तस्कर बृजलाल का परिवार नशा तस्करी के कारण बदनाम था। उसके व उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ अवैध शराब, अफीम, पोस्त और हेरोइन बेचने के 49 मामले दर्ज हैं। इससे पहले नशा तस्करी के आरोप में जेल काट रही बृजलाल की पत्नी की पिछले महीने जेल में मौत हो गई थी।
परिवार की हत्या को लेकर मौत के मुंह से बची बच्ची ने पुलिस को बताया कि ‘मुंह बन्न के आए बंदेआं ने पैहलां दादू नूं मारेआ ते फेर चाचू नूं वी वड्ड सुट्टेआ। नाल वाले कमरेआं विच्च मम्मी अते ताई नू वी मार दित्ता। जदों रौला पै रेहा सी तां चाचू जंटा ऐह आख रेहा सी कि ऐनां बच्चेयां नूं कुझ ना होवे, ऐनां दा कोई कसूर नहीं है।’ अपनी आंखों के सामने एक के बाद एक पांच लोगों की हत्याएं देखने वाली छह वर्षीय बच्ची की जुबान भले ही डरकर लडख़ड़ा रही थी और आंखों में पानी था, लेकिन वह बार-बार इस बात को दोहरा रही थी, ‘मैं चाचू जंटे नूं पछाण लेया सी।’

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि परिवार के लोगों की हत्या उनके नशेड़ी सदस्य ने ही की या करवाई। नशे के कारण एक नहीं अनेक परिवार उजड़ चुके हैं। पंजाब ही क्या दिल्ली, हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों में नशेड़ी और नशे के तस्कर बढ़ रहे हैं। कई स्थानों पर तो नशा तस्कर पुलिस पर हावी होने की कोशिश में है। पिछले दिनों लॉकडाउन के बाद जब पहले चरण में ढील दी गईं तो सबसे पहले शराब के ठेके ही सरकारों ने खोले थे। पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में तो ठेकों के खुलने के समय से घंटों पहले लोग कतारों में खड़े थे। सरकारों को राजस्व चाहिए और राजस्व प्राप्ति के लिए आसान रास्ता है शराब की बिक्री। पंजाब में तो नशे के कारण करीब-करीब एक पीढ़ी का भविष्य ही धूमिल हो गया है। पिछले दिनों अवैध शराब बनाने वाली डिस्टिलरी भी पकड़ी गई थी। देसी शराब अवैध ढंग से बनाने वाले तो कई हैं, दरअसल शराब के धंधे में अधिकतर वही लोग हैं जिनके सिर व पीठ पर सत्ता पक्ष का हाथ होता है। वैध या अवैध शराब के धंधों में राजनीतिज्ञ और उच्च अधिकारियों के समर्थन व संरक्षण प्राप्त लोगों का ही बोलबाला है। यही कारण है कि नशा तस्कर भी सरेआम घूमते-फिरते देखे जाते हैं।

सरकार की मिलीभगत और समाज की चुप्पी के कारण नशे का धंधा बढ़ता चला जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में अपराध भी बढ़ रहा है। इंसान मानसिक व शारीरिक रूप से कम•ाोर भी हो रहा है। इसी कारण घर भी टूट रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से इंसान दबाव में भी है। नैतिक पतन को दर्शाती एक नहीं अनेक घटनाएं आये दिन समाचार पत्रों में पढऩे को मिलती हैं। शराब, अफीम की तस्करी अपने आप में एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना पंजाब पिछले कई दशकों से कर रहा है। तस्करी को रोकने के लिए एक कदम सरकारी स्तर पर यह उठाया जाता है कि वैध शराब की दुकानों की संख्या बढ़ा दी गई और देसी शराब को सस्ता भी कर दिया ताकि बिक्री बढ़े। बिक्री बढ़ेगी तो सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। राजस्व बढ़ाने के चक्कर में शराब की बिक्री तो हर वर्ष बढ़ती चली जा रही है लेकिन जन साधारण के स्वास्थ्य पर इसका कितना बुरा प्रभाव पड़ता है, उस प्रति सरकारें आंखे बंद करके बैठी हैं।

नशा आज की जीवनशैली का एक हिस्सा ही बन गया है लेकिन कटु सत्य यही है कि नशा ही इंसान की बर्बादी और पतन का कारण है। राजस्व बढ़ाने के चक्कर में जहां सरकारें नशे के सेवन को बढ़ा रही है वहीं जल्दी धनवान बनने के चक्कर में नशा तस्कर अवैध शराब बेचते हैं। वैध और अवैध के चक्कर में जन साधारण बर्बाद हो रहा है और समाज पतन की ओर जा रहा है। पट्टी के गांव में नशा तस्कर के परिवार के लोगों का हुआ कत्ल इसी बात की तो पुष्टि करता है। सरकार व समाज दोनों को नशे विरुद्ध सख्त कदम उठाने का संकल्प लेने की आवश्यकता है। नशे का अवैध कारोबार करने वालों विरुद्ध तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। नशे के धंधे पर अगर नकेल न कसी गई तो आने वाले समय में परिवार, समाज, प्रदेश व देश की नींव तक हिलने का संकट सामने आ सकता है।

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।