अमेरिका में हिंसक प्रदर्शन

अफ्रीकी मूल के अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों की आंच व्हाइट हाउस तक जा पहुंची है। व्हाइट हाउस से कुछ मीटर की दूरी पर मौजूद 200 साल पुराने सेंट जॉन चर्च में आग लगा दी गई। सुरक्षा के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ समय के लिए एक भूमिगत बंकर में छिपाना पड़ा गया। हिंसा के चलते अमेरिका के वाशिंगटन डीसी समेत 40 शहरों में कफ्र्यू लगाना पड़ा है। अमेरिका में अश्वेत की हत्या के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। रविवार रात को प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर एकत्रित हो गए। उन्होंने पुलिस पर पथराव भी किया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ जब व्हाइट हाउस के बाहर आई तब इसे पीछे हटाने में सीक्रेट सर्विस और यूनाइटेड स्टेट्स पार्क पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ट्रंप की सुरक्षा में लगी टीम भी हैरान थी कि इतनी बड़ी तादाद में यहां प्रदर्शनकारी कैसे एकत्रित हो गए। जो चर्च दंगों की भेंट चढ़ी उसे चर्च ऑफ प्रेसिडेंट्स भी कहा जाता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका देशभर में हिंसा के लिए जिम्मेदार वामपंथी एंटीफा समूह को आतंकी संगठन घोषित करेगा।

दरअसल, अमेरिका में यह फासीवाद  विरोधी लोगों का समूह है। ये लोग रंगभेद के खिलाफ हैं। इस आंदोलन से जुड़े लोग आमतौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, लेकिन विरोध में एंटीफा के सदस्यों की पहचान करना मुश्किल है, क्योंकि इनमें से अधिकतर लोग पुलिस कार्रवाई के कारण अपनी पहचान का खुलासा नहीं करते। अमेरिका में प्रदर्शन कर रहे लोगों को विदेशों से भी समर्थन मिल रहा है। न्यूजीलैंड के शहर ऑकलैंड में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ‘द रियल वायरस इज रेसिज्म’ जैसे पोस्टर लिए हुए थे। सेंट्रल लंदन में लोगों ने प्रदर्शन किया। यह लोग ‘नो जस्टिस नो पीस’ और ‘हाऊ मैनी मोर’ जैसी तख्तियां लिए हुए थे। ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में लोगों ने प्रदर्शन किया। यहां पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। कनाडा के मांट्रियल में प्रदर्शनकारी और पुलिस आपस में भिड़ गए। उधर, चीन के सरकारी और सोशल मीडिया में अमेरिकी प्रदर्शन चर्चा कें केंद्र बिन्दू बने हैं। सरकार द्वारा संचालित टीवी जॉर्ज फ्लॉयर्ड के भाई द्वारा अमेरिकी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू का प्रसारण कर रहा है। वह कहता दिखाई दे रहा है कि ट्रंप ने फोन कॉल के दौरान उसे बोलने तक का अवसर नहीं दिया। ट्विटर जैसे चीन के सोशल मीडिया एप वीबों में अमेरिकी प्रदर्शन से जुड़े पांच न्यूज आइटम पहले 20 में ट्रैंड कर रहे हैं। प्रदर्शनों को लेकर ईरान और रूस ने भी निशाना साधा है। ईरान का सरकारी टीवी चैनल बार-बार अमेरिका में हो रहे प्रदर्शन को दिखा रहा है। वही रूस ने कहा है कि अमेरिका में नस्ली समस्या वास्तव में मानवाधिकारों से जुड़ी है। उत्तर कोरिया ने भी अश्वेत व्यक्ति की हत्या की निंदा की है।

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव निकट है, इसलिए जहां राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रवाद की भावना को हवा दे रहे हैं वहीं उनके विरोधी भावी चुनावों में श्वेत व अश्वेत के मुद्दे को उभार कर भावी राष्ट्रपति चुनाव की दिशा को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका में डैमोक्रेटिक पार्टी को अश्वेतों और रिपब्लिकन पार्टी को श्वेतों का समर्थक माना जाता है। डोनाल्ड ट्रंप पहले डैमोक्रेट थे अब रिपबिल्कन हैं, इसलिए समझा जा सकता है कि अमेरिका में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में वहां की राजनीति भी महत्वपूर्ण भूूमिका निभा रही है। लेकिन जिस तरह पुलिस कर्मचारी डैरेक शांविन ने जॉर्ज फ्लॉयर्ड को सडक़ पर उलटा लिटाकर उसकी गर्दन को अपने घुटने से दबाए रखा और जॉर्ज कहराता ही रहा कि मेरी सांस रुक रही है और घुटना हटाने के लिए गुहार करता रहा इस बात से अमेरिकी पुलिस का अमानवीय चेहरा भी सामने आ गया है। अमेरिका अपने आप को विश्व का सबसे मजबूत, विकसित व लोकतांत्रिक देश मानता है, लेकिन अश्वेतों के प्रति वहां की सरकारों की जो नीति अतीत में भी थी वह वर्तमान में भी है उससे स्पष्ट हो जाता है कि अमेरिका में अश्वेतों को आज भी दूसरे दर्जे का नागरिक ही समझा जाता है। अमेरिका के विकास में अश्वेतों का भी उतना ही योगदान है जितना श्वेतों का है। पंजाबी की कहावत है ‘चम्म नहीं कम्म प्यारा’ अर्थात रंग-रूप नहीं बल्कि गुण प्रधान होते हैं। अमेरिकी सरकार को भी उपरोक्त सिद्धांत को मानकर व्यक्ति की चमड़ी के रंग की बजाय उसके कर्म को प्राथमिकता देनी होगी तभी गोरे-काले की समस्या का स्थाई हल हो सकेगा।   

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।