उत्तराखंड : पहाड़ी यूजर्स ने किया 'ग्रीष्मकालीन राजधानी' के फैसले का स्वागत

नई दिल्ली/देहरादून (उत्तम हिन्दू न्यूज): उत्तराखंड के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बड़ी घोषणा करते हुए पहाड़ी राज्य में लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया पर खुद इस बात की जानकारी दी थी। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में अब दो राजधानियां हो जाएंगी, लेकिन स्थायी राजधानी को लेकर संशय जारी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर पहाड़ी राज्य के यूजर्स ने राज्य सरकार की इस पहल को स्वागत योग्य बताया है। एक ओर जहां सरकार के इस कदम की तारीफ हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर लोग कह रहे हैं कि 'स्थायी राजधानी' के बजाए 'ग्रीष्मकालीन राजधानी' बनाने का फैसला, बहलाकर 'लॉलीपॉप' देने जैसा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को ट्वीट कर कहा था, "उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, पहाड़ में राजधानी यहां के लोगों का सपना रहा है, इसके लिए हम सभी ने संघर्ष भी किया है। इन्हीं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है।"

मुख्यमंत्री ने अन्य ट्वीट में कहा था, "गैरसैंण के उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने की आज (बुधवार) घोषणा की। मैं प्रदेश की मातृशक्ति को नमन करता हूं, जिन्होंने युवाओं के साथ उत्तराखंड आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लिया। साथ ही मैं इस निर्णय को 'प्रदेश निर्माण आंदोलन' में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी शहीदों को समर्पित करता हूं।"

फैसले के समर्थन में उत्तराखंड के पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने ट्वीट कर कहा, "अभिनंदन और साधुवाद। वर्ष 2013 में हमने इस विषय में गैरसैंण से अभियान चलाया था । 11 मांगे रखी थीं। काफी मामला आगे बढ़ाने हैं। फैसला संतोषजनक है।" एक यूजर ने कहा, "बहुत-बहुत धन्यवाद सर (मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत), मुझे उम्मीद है भविष्य में गैरसैंण राज्य की स्थायी राजधानी होगी।" दूसरे ने कहा, "सराहनीय कदम। वर्षो से लंबित मामले को संज्ञान में लेकर आप ने लोगो के संघर्ष को सफल करने का प्रयास किया। आज 'ग्रीष्मकालीन' राजधानी बनी है, कल 'पूर्णकालिक' भी बन जाएगी।"

अन्य ने कहा, "पहाड़ में राजधानी की मांग की ओर ध्यान देने के लिए धन्यवाद। सभी को बधाई, गैरसैंण को राजधानी बना दिया, लेकिन अब उसे राजधानी जैसा भी बना दें। सरकार को चाहिए कि वह वहां, विश्वविद्यालय, अस्पताल, विद्यालय, और सरकारी कार्यालय भी खोले।" वहीं कुछ यूजर्स ने इस निर्णय पर प्रश्न चिह्न् लगाते हुए पूछा कि छोटे से राज्य में दो राजधानी की क्या जरूरत है, देहरादून के बजाए सिर्फ गैरसैंण को ही स्थायी राजधानी क्यों नहीं बनाया जा रहा है।

एक यूजर ने कहा, "मुख्यमंत्री जी, यह पहाड़ी लोगों का सपना रहा है और हम सिर्फ गैरसैंण को राजधानी के तौर पर देखना चाहते हैं। जब हजारों करोड़ो के कर्जो में हमारा प्रदेश डूबा है, तब क्या हम दो राजधानियों के खर्च का दंश झेल पाएंगे?" अन्य ने कहा, "जनता 'ग्रीष्मकालीन-शीतकालीन' के फेर में नहीं पड़ना चाहती। गैरसैंण ही एकमात्र राजधानी हो, जनता को इससे कोई दिक्कत नहीं है। जनभावनाओं के अनुरूप राजधानी हो। हमें गर्मियों में 'गैरसैंण' को नेताओं के लिए पिकनिक स्पॉट नहीं बनाना है!"