भारत दौरे पर अमेरिकी विदेश मंत्री, खत्म हो सकता है एस-400 मिसाइल को लेकर विवाद

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): अमेरिका के विदेश मंत्री माइक आर पोम्पियो की भारत यात्रा के दौरान भारत को रूस के साथ एस-400 मिसाइल सहित सभी लंबित हथियार सौदों को लेकर रियायत मिलने की उम्मीद है। 

इस यात्रा से जुड़े राजनयिक सूत्रों ने कहा कि भारत एवं रूस के बीच लंबे अरसे से कायम रक्षा संंबंधों को खत्म नहीं किया जा सकता है। एक सूत्र ने कहा कि एस-400 एक मुद्दा है जिस पर चर्चा हुई है। हम जानते हैं कि इस मुद्दे को लेकर अमेरिका को चिंता है। अमेरिका के रुख के बारे में अधिक नहीं कहा जा सकता है लेकिन भारत के रूस के साथ लंबे अरसे से रक्षा संबंध रहे हैं और उसे हम खत्म नहीं कर सकते।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने गत सप्ताह कहा था कि अमेरिका भारत सहित अपने सभी सहयोगियों एवं साझेदारों से अपील करता है कि वे रूस के साथ सौदों को रद्द कर दें जो काट्सा प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। 

भारतीय सूत्र ने कहा कि अमेरिका का कानून बहुत स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा किन परिस्थितियों में छूट दी सकती है। ऐसे कई आयाम हैं जिन्हें हमारे विचार में भारत के पक्ष में है। यदि कानूनी दृष्टिकोण से देखा जाये तो हमारी समझ एवं आकलन से भारत उन आवश्यकताओं को पूरा करता है। अमेरिकी प्रशासन के पास भारत को छूट देने के लिए पर्याप्त आधार है।

सूत्र के अनुसार भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल के सौदे पर एक दशक पहले बातचीत शुरू की थी अौर गत वर्ष सौदे पर हस्ताक्षर किये थे और उसके लिए कीमत की राशि अलग रख दी थी। सूत्र के अनुसार अमेरिका उन परिस्थितियों से अवगत है कि जिनके कारण हमें छह एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने पर बाध्य होना पड़ा है। हमने यह औचित्य उन्हें अच्छे से समझाया है। अमेरिका भी भारत की जरूरत को समझता है। 

ईरान के साथ तेल खरीदी पर अमेरिकी रोक के बारे में एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत इस संबंध में अपनी ऊर्जा सुरक्षा तथा वाणिज्यिक हितों को ध्यान में रख कर निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका बड़ा निवेश करने को तैयार है। 

पोम्पियो की यात्रा के दौरान भारत एवं अमेरिका के बीच समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाने के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि भारत अमेरिका के रिश्ते समझौतों के दस्तावेजों से कहीं आगे हैं। दोनों के बीच रिश्ते बंद कमरे की बैठकों में बढ़ रहे हैं न कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से। इस यात्रा में पोम्पियो और विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर एक दूसरे को समझेंगे और तालमेल कायम करेंगे क्योंकि दोनों को भविष्य में और बड़े काम करने हैं। 

सूत्रों ने माना कि इस यात्रा में पोम्पियो और डॉ. जयशंकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जापान के ओसाका में होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात के एजेंडे को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।