Monday, September 24, 2018 05:33 PM

अटल की कविताओं का उर्दू अनुवाद सराहनीय: नाईक

लखनऊ (उत्तम हिन्दू न्यूज): उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का उर्दू अनुवाद कर प्रकाशित करना एक सराहनीय कदम है।

नाईक ने प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक उर्दू साहित्य पत्रिका ‘नया दौर’ के ‘अटल विशेषांक’ का रविवार को राजभवन में विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अटल जी की कविताओं का उर्दू अनुवाद एक अच्छी पहल है। विशेषांक में रत्न सिंह, गुलजार दहेलवी, खुशबीर सिंह ‘शाद’, नलिनी विभा, कृष्ण भावुक,  सिया सचदेवा व अन्य गैर मुस्लिम कवियों एवं लेखकों की कृतियों को शामिल करके यह बताने का अच्छा प्रयास किया गया है कि उर्दू केवल मुस्लिमों की भाषा नहीं है। हिन्दी के बाद देश भर में उर्दू दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। 
उन्होंने कहा कि वास्तव में उर्दू भाषा हिन्दी की छोटी बहन है। उर्दू में अनुवादित अटल जी की कविताओं को उर्दू भाषियों तक पहुंचाने का ‘नया दौर’ ने सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि समाज के सामने यह लाने की जरूरत है कि भाषायें एक-दूसरे को जोड़ने का माध्यम हैं।

नाईक ने अटल बिहारी वाजपेयी से अपने पांच दशकों के संबंध का उल्लेख करते हुये कहा कि उनकी सहजता उनकी विशेषता थी और उन्हें लोगों को अपना बनाने की कला आती थी। कविता पढ़ने का उनका विशेष अंदाज था। स्वर्गीय अटल जी की विशेषता है कि लखनऊ से सांसद रहते हुये वे तीन बार प्रधानमंत्री बने पर उन्होंने लखनऊ में अपना कोई निजी मकान नहीं बनाया। प्रधानमंत्री रहते हुये राजभवन को उनके आतिथ्य का अनेक बार अवसर मिला। राज्यपाल ने बताया कि 1994 में जब उन्हें कैंसर हुआ तब वे कई संसदीय समितियों के अध्यक्ष, सदस्य तथा चीफ व्हिप थे तथा अटल जी विपक्ष के नेता थे। अपनी बीमारी की जानकारी देते हुये अटल जी को अपना इस्तीफा सौपा की ‘पता नहीं कब आऊंगा या नहीं आऊंगा, इसलिये अपना इस्तीफा दे रहा हूँ।’ अटल जी ने जिम्मेदारी दूसरों को देते हुये प्रोत्साहित करने की दृष्टि से मुझसे पूरे विश्वास से कहा कि ‘आपको आना ही पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय पर प्रोत्साहित करना कोई अटल जी से सीखे। उन्होंने कहा कि अटल जी उन्हें देखने कई बार मुंबई भी आये।

सूचना निदेशक डाॅ0 उज्जवल कुमार ने राज्यपाल का स्वागत करते हुये कहा कि नया दौर पत्रिका काफी लोकप्रिय है। लगभग 3,500 प्रतियाँ प्रतिमाह प्रकाशित की जा रही हैं। स्वर्गीय अटल जी पर आधारित यह विशेषांक उर्दू साहित्य के शोधार्थियों के काम आयेगा। उन्होंने नया दौर की सम्पादकीय टीम की सराहना भी की। माह अगस्त 2018 के विशेषांक में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी पर एक विशेष परिशिष्ट प्रकाशित किया गया है जिसमें अटल जी की कवितायें तथा उनके लेखों को उर्दू में अनुवाद करके प्रकाशित किया गया है। इस विशेष परिशिष्ट में 34 गैर मुस्लिम समकालीन उर्दू कवि एवं लेखकों की उत्कृष्ट रचनाओं का भी समावेश किया गया है। 

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