नाकाम विपक्ष

नरेन्द्र मोदी सरकार के विरुद्ध तेलगु देशम पार्टी द्वारा लाया गया अविश्वास मत लोकसभा में 126 के मुकाबले 325 मतों से गिर गया। अविश्वास मत का गिरना तो लाये जाने से पहले ही निश्चित था क्योंकि गणित अनुसार विपक्ष के पास वो आंकड़़ा ही नहीं था। लेकिन राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए तथा विरोधी का विरोधी दोस्त की नीति को अपनाते हुए देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने को एक ऐसे गठबंधन के रूप में पेश किया जिसका टूटना व गिरना तय था और यह सब कुछ देश व दुनिया ने विपक्ष द्वारा लाये अविश्वास मत को ले लोकसभा में हुई बहस के दौरान देख लिया।

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को लिए पूर्ण बहुमत के कारण देश की राजनीति में आये सकारात्मक परिवर्तन को विपक्षी दल व नेता स्वीकार नहीं कर पाये। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को सम्मुख रखते हुए भाजपा व मोदी विरोधियों ने देश में भ्रम व भ्रांतियां फैलाने का जो सिलसिला शुरू किया और उनको लगने लगा कि अब हवा उनके हक में है और भावी लोकसभा चुनाव भी सिर पर है तो स्थिति का लाभ लेने के लिए सरकार विरोधियों ने अविश्वास मत लाने की मांग की जिसको मोदी सरकार ने स्वीकार कर लिया। अविश्वास मत की मांग को जब सत्ता पक्ष ने स्वीकार कर लिया था उसी समय से विपक्षी दलों के कदमों से जमीन खिसकनी शुरू हो गई थी। मोदी सरकार ने अविश्वास मत को लेकर जो रणनीति बनाई उसी से विपक्षी दलों के पसीने छूटने लगे थे। उनको अपनी गलती का एहसास हो गया था। मोदी सरकार का दबाव न झेलते हुए अविश्वास मत के समय विपक्ष बिखर गया और उसे मात्र 126 मत ही प्राप्त हुए जबकि सरकार को 325 मत।

अविश्वास मत को लेकर देश व दुनिया में चर्चा चल रही थी लेकिन लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए भाषण और उसके बाद प्रधानमंत्री से गले मिलना और आंख मारने की घटना ही अब देश व दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को आशा थी कि वह संसद में अपनी बात को इस ढंग से रखेंगे कि मतदाता को दूध और पानी के अंतर का पता चल जाएगा। हुआ तो यही पर अविश्वास मत में हुई बहस के दौरान लोगों का विश्वास मोदी सरकार के प्रति बढ़ गया और विपक्षी दलों विशेषता कांग्रेस के प्रति कमजोर हो गया।

लोकसभा में तेलगू देशम पार्टी सहित अधिकतर पार्टियों व उनके नेताओं ने संघ भाजपा और मोदी को ही निशाने पर रखा लेकिन मोदी विरुद्ध कोई ठोस सबूत या तथ्य नहीं रख पाए। इसी कारण उनकी कही बातों व लगाए आरोपों का आधार ही कमजोर हो गया। राहुल गांधी ने राफेल हवाई जहाज के खरीद के मामले में जो आरोप लगाया उसका खण्डन भारत सरकार के साथ-साथ फ्रांस की सरकार ने भी कर दिया। लोकसभा में हुई बहस के दौरान भाषणों का गिरता स्तर और नेताओं द्वारा इस्तेमाल शब्दावली और उनकी हरकतों को देखकर देशवासियों को झटका अवश्य लगा है। कुछ को छोड़कर विशेषतया युवा पीढ़ी के हाव-भाव में वह परिपक्वता नहीं दिखाई दी जिसकी आशा देश का जन साधारण अपने प्रतिनिधियों से रखता है।

राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष ही नहीं बल्कि कांग्रेस द्वारा उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है और जनता के सामने पेश भी किया जा रहा है। अविश्वास मत के दौरान राहुल गांधी बोल भी उसी ढंग से रहे थे पक्ष और विपक्ष सहित देशवासी राहुल गांधी को देख भी उसी निगाह से रहे थे लेकिन अपने भाषण के दौरान उन्होंने जिस शब्दावली का प्रयोग किया और भाषण के बाद जिस तरह वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गले मिले और वापस आकर जिस ढंग से राहुल गांधी ने आंख मारी उससे स्पष्ट हो जाता है कि अभी वह राजनीतिक रूप से अपरिपक्व ही है। इतने वर्षों से सदन के सदस्य होने के बावजूद भी सदन की मर्यादाओं को न समझ पाना वह उनको एक तरह से कटघरे में खड़ा कर देता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी व उनकी सरकार पर जितने भी शब्द बाण छोड़े, उनके उत्तर में जब प्रधानमंत्री ने अपने तरकश से एक एक तीर निकाल कर छोड़ा तो स्पष्ट हो गया कि विपक्ष चारों खाने चित्त हो गया है। राहुल गांधी और मोदी के जवाब और सवाल आज देश में चर्चा का विषय है। उनमें से कुछ आप के सामने रख रहा हूं। राहुल गांधी: मैं उन्हें मुस्कुराते देख सकता हूं। घबराहट की झलक है। वह दूर देख रहे हैं, मेरी आंखों में नहीं देख रहे। मोदी का जवाब: एक गरीब मां का बेटा पिछड़ी जाति से आने वाला नरेन्द्र मोदी ऐसा साहस कैसे कर सकता है? हम आपकी आंखों में आंख कैसे डाल सकते हैं। आंखों का खेल पूरे देश ने देखा है। आंखों की बात करके 'आंख की हरकत' पूरे देश ने देखी है। आंखों की बात करके सत्य को पूरी तरह से कुचला गया है। राहुल गांधी: भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री चौकीदार नहीं, बल्कि भागीदार मोदी का जवाब: मैं चौकीदार भी हूं और भागीदार भी लेकिन सौदागर और ठेकेदार नहीं हूं। मैं गरीबों एवं युवाओं के सपनों का भागीदार हूं। राहुल गांधी: मोदी के पास आकर गले मिलने के घटनाक्रम मोदी का जवाब: उनका एक ही मकसद है मोदी हटाओ। सुबह चर्चा शुरू हुई थी, मतदान भी नहीं हुआ था, जय-पराजय का फैसला भी नहीं हुआ था लेकिन उन्हें यहां पहुंचने का इतना उत्साह है कि आकर बोले, उठो उठो। यहां कोई न उठा सकता है, न बैठा सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने बैठाया है। सवा सौ करोड़ देशवासी उठा सकते हैं। इतनी जल्दबाजी क्या है। राहुल गांधी: मेरे सामने 15 मिनट भी खड़े नहीं हो पाएंगे। पूर्व में दिया गया एक बयान। मोदी का जबाव: अहंकार ही कहता है कि हम खड़े होंगे तो प्रधानमंत्री 15 मिनट तक खड़े नहीं हो पाएंगे। मैं खड़ा भी हूं और 4 साल जो काम किया है, उस पर अड़ा भी हूं। राहुल गांधी के 'जुमला स्ट्राइक' शब्द के इस्तेमाल पर मोदी का जवाब: आप सर्जिकल स्ट्राइक को जुमला स्ट्राइक बता रहे हो। अगर गाली देनी है, तो मोदी तैयार है लेकिन देश के जवानों के पराक्रम पर प्रहार नहीं करें। सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना जुमला स्ट्राइक से करना देश की सेना का अपमान है।

लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा सदन की मर्याादा होती है, पीएम आम आदमी नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष का व्यवहार उचित नहीं था। महाजन ने कहा, सदन में ऐसा ड्रामा देखकर मैं भी हैरान रह गई। नरेन्द्र मोदी पीएम के तौर पर सदन में थे। गले मिलने के बाद राहुल ने आंख मारी, वह हरकत भी गलत है। अध्यक्ष ने कहा,  राहुल मेरे दुश्मन नहीं हैं, राहुल जी, बेटे जैसे हैं। गले मिलना गलत नहीं...लेकिन सदन की गरिमा हमें ही बनाए रखनी होगी। अकाली सांसद हरसिमरत कौर ने कहा राहुल ने कहा कि मुझे भाजपा और एनडीए के सदस्यों ने हाथ मिलाकर कहा कि बहुत अच्छा बोले। ये अकाली दल की नेता भी मुस्कुरा रही थीं। इस पर हरसिमरत कौर ने कहा कि राहुल ने आपत्तिजनक बात की। ये संसद है, ये मुन्ना भाई का पप्पी-झप्पी एरिया नहीं है। गले लगने के बाद राहुल का अपनी सीट पर आना और अन्य नेताओं की तरफ देखकर आंख मारने के दृश्य को सोशल मीडिया ने लपक लिया। इसके बाद सोशल साइट पर चुटकुलों की बाढ़-सी आ गयी। 'पप्पू की झप्पी' और 'हगप्लोमेसी' जैसे हैशटेग चलने लगे। कई लोगों ने बॉलीवुड फिल्म 'मुन्नाभाई' के किरदार को याद किया जो अपने विरोधियों को गले लगाकर जीत लेता था। ट्विटर पर एक ने लिखा, 'जैसे नरेंद्र मोदी दूसरों को गले लगाते हैं उसी तरह राहुल ने भी किया, वह भी तब जब कुछ मिनट पहले ही हरसिमरत बादल ने कहा था कि संसद 'मुन्नाभाई की पप्पी-झप्पी' के लिए नहीं है। एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, 'और भी बेहूदा गले लगाना 'हगप्लोमेसी।' एक यूजर ने लिखा 'पप्पू बने मुन्ना भाई।' कई लोगों ने कहा कि राहुल गांधी प्रिया वारियर से सीख रहे हैं। किसी ने लिखा उसी से शादी कर लें। कई लोगों ने कमेंट के साथ प्रिया की आंख मारते हुए तस्वीर को भी साझा किया है। उधर, प्रिया प्रकाश ने कहा कि उन्हें इस तस्वीर को देखकर बहुत खुशी हुई। बता दें कि प्रिया प्रकाश पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक वायरल वीडियो के कारण छा गई थीं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि जिस लक्ष्य को सम्मुख रख विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये थे वह अपने लक्ष्य प्राप्ति में नाकाम रहे हैं और मोदी सरकार को ही लाभ मिला, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को, उनकी साख व छवि और मजबूत हुई है।  

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।