संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

12:50 PM Jul 10, 2019 |

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार इकाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर में स्थिति सुधारने में असफल रहे हैं। उसकी पिछली रिपोर्ट में जताई गयी कई चिंताओं के समाधान के लिए दोनों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाये। वहीं, भारत ने रिपोर्ट पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि यह झूठ और राजनीति से प्रेरित विमर्श की निरंतरता भर है। इसमें पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवाद के मूल मुद्दे की अनदेखी की गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने गत वर्ष कश्मीर पर अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी। उसमें भारत और पाकिस्तान के 'गलत' कार्यों का उल्लेख किया गया और आग्रह किया गया कि लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए कदम उठाएं। रिपोर्ट में कहा गया है, 'कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मई 2018 से अप्रैल 2019 तक की अवधि में नागरिकों के हताहत होने की संख्या एक दशक में सबसे ज्यादा हो सकती है। व्यक्त चिंताओं के समाधान के लिए न तो भारत और न ही पाकिस्तान ने कोई कदम उठाये। कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा उल्लंघनों की जवाबदेही अस्तित्वहीन है। इस रिपोर्ट पर प्रहार करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'ओएचसीएचआर की रिपोर्ट की अगली कड़ी भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर उसके पिछले झूठे और राजनीति से प्रेरित विमर्श की निरंतरता भर है। इस रिपोर्ट में कही गई बातें भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती हैं और उसमें सीमापार आतंकवाद के मूल मुद्दे की अनदेखी की गई है। कुमार ने कहा, 'वर्षों से पाकिस्तान से जो सीमापार आतंकवाद चल रहा है, उससे उत्पन्न स्थिति का, उसकी वजह से होने वाले हताहतों का हवाला दिये बगैर विश्लेषण किया गया है। यह दुनिया के सबसे बड़े और जीवंत लोकतंत्र के साथ आतंकवाद का खुलेआम समर्थन करने वाले देश की कृत्रिम रूप से बराबरी करने की काल्पनिक कोशिश भर है। हमने मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से गहरा एतराज जताया है।

रवीश कुमार ने कहा कि इसमें 'पक्षपाती मानसिकता दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में जानबूझ कर राज्य में सरकार के बड़े पैमाने पर सामाजिक,आर्थिक विकास कार्यों को नजरअंदाज किया गया है। भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है और अपनी सीमा पर संप्रभुता कायम रखने के लिए वह तमाम कदम उठाती रहेगी। हमारे देश के संकल्प को कमजोर करने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।

गौरतलब है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी बुरहान वानी की तीसरी बरसी पर कश्मीर में अलगाववादियों के बंद के आह्वान पर केन्द्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा को एक दिन के लिए रोक लिया था। जमीनी सत्य यही है कि पाकिस्तान घाटी को अशांत बनाए रखने के लिए आतंकियों व अलगाववादियों को समर्थन व संरक्षण देता है। भारत को प्रतिक्रिया स्वरूप कार्रवाई करनी पड़ती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में आक्रमण करने वाले और अपनी रक्षा करने वाले को एक ही नजर से देखना व एक ही तराजू से तोलना गलत है। भारत घाटी में या सीमा पर जो भी कार्रवाई कर रहा है वह देश की सुरक्षा व देशहित को देखकर कर रहा है। पाकिस्तान जानबूझ कर कश्मीर घाटी तथा सीमा पर तनाव बनाकर रखना चाहता है। रिपोर्ट में अलगाववादियों और आतंकवादियों के प्रति आंख बंद कर उनकी हिंसक गतिविधियों की अनदेखी करना दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र ने पक्षपाती रवैया अपनाया है तथा  भारत के नजरिए की अनदेखी की है जिसकी आशा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगठन से नहीं थी। भारत का रिपोर्ट को खारिज करना उचित कदम है।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।