दो दावे

पिछले दिनों श्रीलंका में चर्च व होटलों पर हुए आतंकी हमले जिसमें 250 से अधिक की मौत हुई और 500 से अधिक घायल हो गए थे। उपरोक्त हमले को लेकर श्रीलंका के सेना प्रमुख ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा है कि 'संदिग्ध हमलावर भारत गए थे। वहां वे कश्मीर, बेंगलुरु और केरल पहुंचे थे। इस तरह की सूचनाएं हमारे पास हैं।' आतंकियों के मकसद पर उन्होंने कहा, 'पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन शायद किसी खास तरह की ट्रेनिंग लेने या विदेशी आतंकी संगठनों से संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से आतंकी भारत गए थे।' श्रीलंका को निशाना बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल से देश में शांति थी और इस खुशी में सुरक्षा की अनदेखी की गई।

श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के लिए स्थानीय इस्लामिक आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) को जिम्मेदार बताया है। इस संगठन पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है। अब तक हमले से जुड़े 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमले में विदेशी संगठनों की भूमिका भी जांची जा रही है। इस बीच, सरकार ने मृतकों की पहचान के लिए ऐसे लोगों से सहयोग की अपील की है, जिनके परिवार का कोई सदस्य हमले के बाद से लापता है। डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि की जाएगी।

भारत के एक अधिकारी का कहना है कि हमले के बाद इमीग्रेशन के रिकॉर्ड पुन: जांचे गए हैं। किसी हमलावर के कश्मीर आने का प्रमाण नहीं है। हालांकि छद्म पहचान से भारत आने की संभावना से भी उन्होंने इन्कार नहीं किया। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के एक अधिकारी का कहना है कि श्रीलंकाई हमलावरों के तमिलनाडु में कदम बढ़ाने की कोशिश के कुछ खुफिया इनपुट मिले हैं। हालांकि पर्याप्त जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इनपुट में कितनी सच्चाई है। जरूरत पडऩे पर जांच अधिकारी श्रीलंका भी जा सकते हैं। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि श्रीलंकाई हमलावरों से किसी भारतीय का संबंध था।

उधर, अमरीका में फाउंडेशन ऑफ डेमोक्रेसीज के वरिष्ठ सदस्य बिल रोगियो ने इसी हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी सांसदों के सामने ये कहा, 'हमें आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए और पाकिस्तान जैसे देशों को लेकर कड़े निर्णय लेने चाहिएं।' रोगियों ने पाकिस्तान की तरफ से तालिबान को अटूट समर्थन दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इससे अफगानिस्तान में अमेरिका को हानि पहुंची। उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिका पहले ही अपनी लड़ाई हार चुका है। बिल रोगियो ने ईरान पर भी एक इस्लामिक राज्य स्थापित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ ईरान भी आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजकों में से है। आतंकवाद विरोधी रणनीति और सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा, 'ये इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में वफादार मिलिशिया को समर्थन देता है।' रोगियो ने आगे कहा कि ईरान मुख्य रूप से शिया संगठनों को समर्थन देता है। उसने इराक और सीरिया में खुलकर इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जंग लड़ी है और वो सुन्नी जिहादियों के साथ गठबंधन करने के भी खिलाफ नहीं है।

गौरतलब है कि भारत ने श्रीलंका सकार को खुफिया जानकारियां दी थीं लेकिन उस समय सुरक्षा के लिए जिम्मेवार लोगों ने उदासीनता दिखाई और उस उदासीनता की कीमत चुकानी पड़ी। चर्च और होटलों पर हुए हमलों के बाद श्रीलंका ने सक्रिय होकर 100 से करीब आतंकियों को गिरफ्तार किया और मदरसों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा दिया है और बुर्के पर भी पाबंदी लगा दी है।

श्रीलंका ने जो दावा किया है उसको देखते हुए भारत को अपने क्षेत्र में आतंक विरोधी अभियान को पहले से अधिक तेज कर आतंकियों पर नकेल डालनी होगी। पाकिस्तान आतंकियों को भारत के विरुद्ध इस्तेमाल करता रहा है और करता रहेगा। उस प्रति भी सतर्क रहना ही होगा। 

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।