Thursday, September 20, 2018 04:07 PM

सैलानियों को भाया भारत

संयुक्तराष्ट्र के पर्यटन संगठन द्वारा जारी 'टूरिज्म हाईलाइट्स' रपट के नवीनतम संस्करण के अनुसार पिछले साल अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 132.3 करोड़ रही। यह 2016 के मुकाबले 8.4 करोड़ अधिक है। यह पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नया रिकॉर्ड है। साथ ही इस क्षेत्र में यह लगातार आठवें साल 'अबाधित वृद्धि' को दिखाता है। दुनिया में पर्यटकों के लिहाज से सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय यात्री यूरोप और अफ्रीका पहुंचे। इनके यहां विदेशी पर्यटकों की वृद्धि क्रमश: आठ प्रतिशत और नौ प्रतिशत रही। संयुक्तराष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) संयुक्तराष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जो दुनियाभर से इस तरह के आंकड़े जुटाती है। यूएनडब्ल्यूटीओ के अनुसार पर्यटन क्षेत्र दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक क्षेत्र है। वर्ष 2017 में दुनियाभर में पर्यटकों के आने से आगंतुक देशों को 1,300 अरब डॉलर की आय हुई, जो सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का कुल निर्यात 1,600 अरब डॉलर का रहा। इस प्रकार प्रतिदिन चार अरब डॉलर का पर्यटन निर्यात हुआ। यह दुनिया के कुल निर्यात का सात प्रतिशत है। यूएनडब्ल्यूटीओ ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पर्यटन में 2017 की मजबूत वृद्धि दुनियाभर के सभी क्षेत्रों में यात्रा की बढ़ी मांग को दर्शाती है। यहां तक उन क्षेत्रों में भी सुधार देखा गया है जहां हाल के वर्षों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। रपट में दक्षिण एशिया क्षेत्र में सकारात्मक सुधार की बात की गई है। इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन भारत का रहा है। इस उपक्षेत्र में सबसे ज्यादा पर्यटक आकर्षित करने में भारत सबसे आगे रहा है। इसकी प्रमुख वजह पश्चिमी देशों में पर्यटक स्थल के तौर पर भारत की बढ़ती मांग और वीजा प्रक्रियाओं को सरल किया जाना है। भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2017 में 1.55 करोड़ रही जो 2016 में 1.45 करोड़ थी। इससे भारत की आय 2017 में बढ़कर 27.36 अरब डॉलर रही जबकि 2016 में यह आंकड़ा 22.42 अरब डॉलर था। पूरे दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन 2017 में बढ़कर 2.65 करोड़ रहा जो 2016 में 2.51 करोड़ था। इसी प्रकार इससे होने वाली आय 2017 में बढ़कर 39.52 अरब डॉलर हो गई जबकि 2016 में 33.28 अरब डॉलर थी।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विदेशी सैलानियों को भारत भा रहा है। भारत को प्रकृति ने जहां प्रत्येक ऋतु दी है। वही जंगलों, नदियों, पहाड़ों के साथ-साथ रेगिस्तान भी दिया है। वर्षा और सूखे के साथ-साथ बसंत भी है। कुदरत के नजारे देखने को जहां जम्मू-कश्मीर का लेह-लद्दाख है वहीं उत्तर पश्चिम, उत्तर पूर्व के राज्यों का अपना आकर्षण है गोवा और केरल के साथ कन्याकुमारी में जो प्राकृतिक सौन्दर्य है वह देखने लायक है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में प्रकृति के नजारे विश्व प्रसिद्ध है।

भारत अगर विदेशी सैलानियों को प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण भा रहा है, वहीं इतिहासिक स्थल व भारतीयों का अतिथियों के प्रति आदर भाव रखना भी एक बड़ा कारण है। भारत में सैलानियों की संख्या और बढ़ सकती है, अगर सरकार व समाज मिलकर पर्यटक स्थलों के रख-रखाव प्रति सतर्क हो कार्य करें। पर्यटक स्थलों पर बढ़ती गन्दगी और अपराध के कारण भारत की छवि कमजोर अवश्य पड़ी है लेकिन अभी भी समय है कि भारत सरकार व समाज इस कमजोर होती छवि को सुधारने का काम बिना देरी शुरू करे। भारत की छवि कमजोर करने में भारतीयों का ही एक वर्ग ऐसा है जो भारत की निंदा कर रहा है तो दूसरा वर्ग विदेशी सैलानियों के साथ दुव्र्यवहार करके भी छवि कमजोर कर रहा है। समय की मांग है कि विदेशी सैलानियों को उचित मान-सम्मान भी मिले तथा उन्हें इस बात का एहसास भी कराया जाए कि वह भारत में सुरक्षित भी हैं।

विदेशी सैलानियों का विश्वास जीतने के लिए आवश्यक है कि उनके साथ धोखा करने या बलात्कार के मामलों में उन्हें तत्काल न्याय मिले और दोषियों को सजा। पर्यटकस्थलों की स्वच्छता भी आवश्यक है। सुरक्षा और स्वच्छता ही विदेशी सैलानियों को भारत की ओर आकर्षित करेंगे, इसी के साथ देश की छवि तो ठीक होगी ही साथ में आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

 

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