Saturday, September 22, 2018 05:09 AM

मणिमहेश यात्रा का आज पहला दिन, तीन श्रद्धालुओं की मौत

चंबा (उत्तर हिन्दू न्यूज): यहां भरमौर घाटी में सोमवार को धार्मिक उल्लास के साथ भगवान शिव को समर्पित पवित्र मणिमहेश झील के लिए 14 दिवसीय यात्रा शुरू हो गई। 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश के लिए तीर्थयात्रा संयोग से जन्माष्टमी के दिन शुरू होकर 17 सितंबर को राधा अष्टमी पर संपन्न होगी। हर साल लोग कैलाश पर्वत की एक झलक पाने के लिए अंडाकार झील की यात्रा करते हैं और प्रार्थना करते हैं। कैलाश को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। 

तीन श्रद्धालुओं की मौत
वहीं, यात्रा के पहले दिन, तीन लोगों की मौत की भी सूचना है। बताया जा रहा है कि यहां महिला और दो लोगों की मौत हुई है। मारे गए श्रद्धालुओं की पहचान 70 वर्षीय शिवांश सिंह वासी अमृतसर, 47 वर्षीय हेमराज चौधरी निवासी बिलासपुर तथा 55 वर्षीय गुड्डो देवी वासी चंबा के रूप में हुई है। अमृतसर से शिवांश को दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाते समय बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत रास्ते में पहाड़ी से पथ्तर गिरने की वजह से हुई है। हेमराज चौधरी की मौत धन्छो के समीप हुई। जब वह धन्छो के समीप पहुंचा तो उसे सांस लेने में दिक्कत हुई। कुछ देर में उसने दम तोड़ दिया।

भक्तों की सुविधा का पूरा ध्यान
उपायुक्त हरिकेश मीना ने बताया, भक्तों की सुविधा के लिए तंबू और चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। तीर्थयात्रा के दौरान लोगों के नौकायन करने के लिए दो निजी हेली टैक्सी-संचालकों की अनुमति है। झील के पास भरमौर और गौरी कुंड के बीच अब तक 300 से ज्यादा लोगों को नौका से पार उतारा जा चुका है। 

उन्होंने कहा यहां से करीब 65 किलोमीटर दूर हडसर आधार शिविर से लकेर मणिमहेश तक की 14 किलोमीटर के मार्ग की मरम्मत कराई गई है। यात्रा की आधिकारिक रूप से शुरुआत से पहले ही हजारों श्रद्धालुओं ने यात्रा शुरू कर दी। 

भगवान शिव में आस्था रखने वाले भक्तों का कहना है कि कैलाश पर्वत को भक्त केवल तभी देख सकते हैं, जब भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। अगर पर्वत का शिखर बादलों के पीछे छिप गया तो यह शिव की अप्रसन्नता का संकेत है। 

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