चीन से खतरा

11:00 AM Jun 28, 2020 |

लद्दाख क्षेत्र में जिस तरह भारत के साथ लगती सीमा पर चीन ने अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाई, वहां टैंक और लड़ाकू जहाज तैनात किए और बंकर इत्यादि बनाये हैं उसके परिणाम स्वरूप सीमा पर तनाव बढ़ता चला जा रहा है। इस तनाव को कम करने के लिए भारत में चीन के राजदूत सुन वीडांग ने पिछले दिनों कहा था कि तनाव को कम करने की जिम्मेवारी भारत पर है। चीन के राजदूत के जवाब में चीन में भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी ने एक साक्षात्कार में कहा कि पूर्वी लद्दाख में बढ़ते तनाव को कम करने की जिम्मेवारी चीन की है, क्योंकि यथास्थिति को बदलने की कोशिश चीन ने की है। राजदूत विक्रम मिसरी ने कहा कि गलवान में चीनी सेना द्वारा की गई कार्रवाई से भरोसे को बहुत क्षति हुई है। अब यह पूरी तरह चीन की जिम्मेदारी है कि वह दोनों देशों के संबंधों की सावधानी से समीक्षा करे और फिर तय करे कि उसे किस दिशा में जाना है। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में किसी भी प्रगति के लिए सीमा पर शांति एक आवश्यक शर्त है। हमारा नजरिया इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट है। चीन के सैनिकों को भारतीय सैनिकों के गश्त करने के काम में कोई अड़चन नहीं डालनी चाहिए। मिसरी ने गलवान घाटी पर चीन के दावे को खारिज करते हुए कहा इसे किसी तरह का समर्थन नहीं मिल सकता। बढ़-चढक़र किए जा रहे बेतुके दावों से मौजूदा हालात में किसी तरह की मदद नहीं मिलने वाली। एलएसी पर हम अपनी तरफ वाले क्षेत्र में जो गतिविधियां कर रहे हैं वे पहले से करते आ रहे हैं। यह आश्चर्यजनक है कि जो क्षेत्र कभी उसका नहीं रहा उसमें बदलाव करने के लिए वह इतना प्रयासरत है।

गौरतलब है कि चीन ने भारतीय सीमा पर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन भी शुरू किया है जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप भारत ने भी चीन के साथ लगती सीमा पर युद्ध अभ्यास किया है। इससे स्पष्ट है कि भारत चीन को समझ आने वाली भाषा में ही जवाब दे रहा है। चीन के लिए यही सबसे बड़ी परेशानी की बात है। चीन भारत के राजनीति, आर्थिक व सैनिक स्तर पर बढ़ते कदमों और कद को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। भारत की मजबूत होती छवि व साख को ठेस पहुंचाने के लिए चीन अब नेपाल और पाकिस्तान को साथ लेकर भारतीय सीमाओं पर दबाव बढ़ा रहा है। पाकिस्तान और नेपाल के साथ-साथ चीन का प्रयास होगा कि भारत के अन्य पड़ोसी देशों पर अपना दबाव बढ़ाकर स्थिति को और खराब करने की कोशिश करेगा। चीन की टकराव वाली नीति के कारण चीन का भारत के साथ ही तनाव नहीं है, बल्कि जापान, आस्टे्रलिया और अमेरिका सहित कई देशों के साथ तनाव बढ़ता चला जा रहा है। चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपीन जैसे देशों के लिए चीन से बढ़ रहे खतरे का मुकाबला करने के लिए अमेरिका अपने बलों की वैश्विक तैनाती की समीक्षा कर रहा है जिससे कि उचित स्थानों पर इसकी मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके। पोम्पिओ ने डिजिटल ब्रुसेल्स फोरम 2020 में एक सवाल के जवाब में यह बात कही।

उन्होंने कहा हम सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का मुकाबला करने के लिए हमारी तैनाती उचित स्थानों पर हो। हमारा मानना है कि यह हमारे समय की चुनौती है और हम सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि हमारे पास इससे निपटने के लिए संसाधन हो। पोम्पिओ ने कहा कि बल की तैनाती की समीक्षा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की जा रही है जिसके तहत अमेरिका जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या लगभग 52 हजार से घटाकर 25 हजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि बल की तैनाती जमीनी हकीकत के आधार पर की जाएगी। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, मैंने अभी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से खतरे के बारे में कहा, इसलिए अब भारत, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया को खतरा है, दक्षिण चीन सागर में चुनौतियां हैं। चीन रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने सैन्य और आर्थिक प्रभाव को तेजी से बढ़ा रहा है जिससे क्षेत्र के विभिन्न देशों और अन्य के लिए चिता उत्पन्न हो रही है। दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन क्षेत्रीय विवाद भडक़ा रहा है। उसने क्षेत्र में कई द्वीपों पर सैनिक तैनात कर दिए हैं। पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां संचालित कर रही है। इसमें दक्षिण चीन सागर में आक्रामकता बरकरार रखना, भारत के साथ हुआ घातक सीमा विवाद, अपारदर्शी परमाणु कार्यक्रम और शांतिपूर्ण पड़ोसियों के खिलाफ चेतावनी शामिल है। पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि सीसीपी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ), विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ), संयुक्त राष्ट्र और हांगकांग के लोगों के प्रति दर्शाई गई प्रतिबद्धताओं समेत कई अंतरराष्ट्रीय वादों को तोड़ा है।

चीन के आक्रमक रुख को देखते हुए अमेरिका-सिंगापुर, जापान व आस्टे्रलिया से भी रक्षा समझौते कर रहा है। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि चीन भारत को लद्दाख क्षेत्र में उलझा कर अमेरिका, जापान तथा आस्ट्रेलिया के साथ लड़ाई लड़ सकता है। अगर हिमालय क्षेत्र में लड़ाई न छेडक़र चीन समुद्र में जापान, अमेरिका और आस्ट्रेलिया विरुद्ध जंग छेड़ता है तो तब भी भारत के लिए चीन एक बड़ा खतरा ही रहेगा। भविष्य में भी चीन की चुनौती बनी रहेगी। चीन की चुनौती का हल भारत का आर्थिक व सैन्य दृष्टि से और अधिक मजबूत होने में ही है। भारत के व्यापार और उद्योग का चीनी सामान पर निर्भरता आज हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। चीन के उत्पादों को धीरे-धीरे भारतीय बाजार से बाहर करने और स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देकर ही हम चीन की चुनौती का सामना कर सकते हैं। इसके लिए हमें जहां धैर्य की आवश्यकता है वहीं दृढ़ संकल्प भी चाहिए। याद रखें चीन का खतरा तभी टलेगा जब भारत राजनीतिक, आर्थिक व सैनिक दृष्टि से मजबूत होगा।

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।