नया नहीं है ईवीएम पर विवाद, दुनिया के ये देश पहले ही लगा चुके हैं बैन

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): लोकसभा चुनाव 2019 के के आखिरी चरण के संपन्न होने के बाद आए एक्जिट पोल के बाद विपक्षी दलों की ओर से एक बार फिर ईवीएम को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कई पार्टियों ने एक बार फिर चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया है। ईवीएम के विरोध में उठती आवाजों ने आम लोगों के मन में भी ये सवाल उठने लगा है कि क्या सच में ईवीएम से छेड़खानी हो सकती है? आपको बता दें कि ईवीएम को लेकर विवाद सिर्फ भारत में ही नहीं हो रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों में इस पर सवाल खड़े किए गए। कई देशों ने तो ईवीएम पर बैन भी लगा रखा है। इसमें जर्मनी, नीदरलैंड और अमेरिका जैसे देश भी शामिल हैं।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक लेख के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल कई देशों ने शुरू किया था, लेकिन सिक्योरिटी और एक्यूरेसी को लेकर इन मशीनों पर सवाल उठने लगे। साल 2006, में ईवीएम का इस्तेमाल करने वाले सबसे पुराने देशों में शामिल नीदरलैंड ने इस पर बैन लगा दिया।

साल 2009 में जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को असंवैधानिक बताते हुए और पारदर्शिता को संवैधानिक अधिकार बताते हुए ईवीएम पर बैन लगा दिया। नतीजों को बदले जाने की आशंका को लेकर नीदरलैंड और इटली ने भी ईवीएम पर बैन लगा दिया था। वहीं इंग्लैंड और फ्रांस में कभी भी ईवीएम का इस्तेमाल नहीं हुआ है। अमेरिका जैसे टेक फ्रेंडली देश के कई राज्यों में भी बिना पेपर ट्रोल वाली ईवीएम मशीन पर बैन है।


लंबी बहस के बाद बैलेट पेपर पर लौटा इंडोनेशिया
भारत की तरह इंडोनेशिया में भी काफी लंबे समय से ईवीएम को लेकर बहस जारी थी। यहां के राजनीतिक दलों में सहमति न बनने के बाद इंडोनेशिया में वापस बैलेट पेपर पर चुनाव हुए। इंडोनेशिया का लोकतंत्र दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अमरीका की तरह यहां भी राष्ट्रपति शासन लागू है। इंडोनेशिया की तरह ऐसी कई देश हैं जहां आज भी चुनाव बैलेट पेपर पर ही होते हैं। नीदरलैंड की बात करें तो यह देश इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन इस्तेमाल करने वाला दुनिया का सबसे पुराना देश था। लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने पर यहां साल 2006 में ईवीएम पर बैन लगा दिया गया।

अलग हैं भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम 
ईवीएम के समर्थन में तर्क दिया जाता है कि भारत के चुनावों में इस्तेमाल हो रहे EVM’s में इंटरनेट, ब्लूटूथ के जरिए छेड़छाड़ संभव नहीं है। इसको दूसरी मशीनों से अलग रखा जाता है। इन मशीनों में अब VVPAT का भी इंतजाम किया गया है।