विश्व बैंक की 700 करोड़ की एकीकृत विकास परियोजना को मिली हरी झंडी

शिमला (पी.सी.लोहमी): विश्वबैंक की हिमाचल प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों की आर्थिकी में सुधार के लिए 700 करोड़ रूपए की एकीकृत विकास परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना को विश्वबैंक से हरी झंडी मिलने से प्रदेश में वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुणा करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। एकीकृत विकास परियोजना को विश्वबैंक से मंजूरी मिलने की जानकारी वन मंत्री गोबिंद ठाकुर ने शुक्रवार को विधानसभा में एक विशेष व्यक्तव्य के माध्यम से दी। वन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना 4 अगस्त 2017 को विश्वबैंक ने हिमाचल के लिए स्वीकृत की थी, लेकिन 12 जुलाई 2018 को इसे किन्हीं कारणों से कुछ समय के लिए लंबित कर दिया गया और फिर  29 अगस्त 2018 को विश्वबैंक ने इस परियोजना को बंद करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के बंद होने से 400 से अधिक अनुबंध और दैनिकभोगी कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे। यह परियोजना प्रदेश के 10 जिलों की 428 पंचायतों के लघु और सीमांत किसानों को कृषि सिंचाई के लिए कूहल व लिफ्ट के माध्यम से जल प्राप्त करवाया जाना प्रस्तावित है।

इन पंचायतों के जिन ग्रामीणों के पास कृषि योग्य भूमि पर्याप्त नहीं है, उनके लिए पशु पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण को भी इस परियोजना के माध्यम से बल दिया जाना है। वन मंत्री ने कहा कि 11 मार्च को इस परियोजना को फिर से शुरू करने पर विश्वबैंक की ओर से जुनैद कमाल अहमद, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सचिव समीर खरे और प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) रामसुभग सिंह ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना को कार्यान्वित करने और विश्वबैंक द्वारा इस परियोजना को फंडिंग देने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। गोबिंद ठाकुर ने कहा कि परियोजना को फिर से चालू करवाने के लिए जब विभागीय प्रयास विफल रहे तो उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. अरुण जेटली से मिलकर इस परियोजना को फिर से चालू करने का आग्रह किया। इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी दो बार अरूण जेटली से व्यक्तिगत तौर पर मिले।