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तपस्वी महर्षि गौतम की प्रतिमा मथुरा में बनेगी आस्था का केन्द्र

मथुरा (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय ऋषियों के त्याग एवं तपस्या से नयी पीढ़ी को अवगत कराने तथा उनमें सदगुणों का समावेश करने के लिए मथुरा तहसील के छरौरा गांव में महान तपस्वी महर्षि गौत

मथुरा (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय ऋषियों के त्याग एवं तपस्या से नयी पीढ़ी को अवगत कराने तथा उनमें सदगुणों का समावेश करने के लिए मथुरा तहसील के छरौरा गांव में महान तपस्वी महर्षि गौतम की मूर्ति की स्थापना वैदिक मंत्रों केे साथ की गई। अखिल भूमंडलीय युवा महर्षि गौतम ब्राह्मण समाज समिति के अध्यक्ष सतीश गौतम ने कहा कि महर्षि गौतम एवं भगवान परशुराम की मूर्तियां अब तक गाजियाबाद और अलीगढ़ में दो स्थानों पर लगाई जा चुकी हैं जबकि अन्य स्थानों में वैदिक काल के इन दो महान तपस्वियों की प्रतिमाये स्थापित करने का संकल्प किया गया है।

समिति के उपाध्यक्ष मनोज गौतम ने रविवार को कहा कि भगवान शंकर के अनन्य भक्त महर्षि गौतम के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके त्याग एवं तप से स्वयं ब्रम्हा जी भी इतना प्रभावित थे कि उन्होने उनके लिए एक आदर्श पत्नी की परिकल्पना काफी पहले कर ली थी।

एक पौराणिक दृष्टांत का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि ब्रम्हाजी ने श्रेष्ठ गुणों से युक्त अहिल्या को बनाया तथा बाद में उसकी देखभाल के लिए वे एक योग्य व्यक्ति की तलाश में थे। ऋषि गौतम सर्व ज्ञानी एवं बुद्धिमान भी थे इसलिये ब्रम्हाजी अहिल्या उसे महर्षि के आश्रम में ले गए तथा कहा कि उन्होने निश्चय किया है कि वे अहिल्या की शादी किसी साधु से ही करेंगे मगर शर्त है कि जो कोई पृथ्वी का चक्कर लगाकर पहले आएगा उसी से अहिल्या का विवाह करेंगे।

उन्होंने बताया कि सभी देव तथा ऋषि पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए चल पड़े, उसी समय गौतम ऋषि की गाय बछड़े को जन्म दे रही थी और ऋषि उसकी मदद कर रहे थे। जब अहिल्या ने उनका त्याग और गो प्रेम देखा तो उसने उन्ही से विवाह करने की इच्छा जताई। इस पर ब्रम्हा जी ने उसका विवाह ऋषि गौतम से कर दिया। यह देवताओं को अच्छा नही लगा और इन्द्र ने तो इसका बदला लेने का मन बना लिया। उनकी एक योजना तो सफल नही हो सकी किंतु दूसरी योजना के अनुरूप जिस समय गौतम ऋषि अपने आश्रम में नही थे उस समय वह गौतम ऋषि का भेष बनाकर आश्रम में चला गया तथा अहिल्या से शारीरिक संबंध बनाकर फिर जब आश्रम से बाहर आ रहा था तो गौतम ऋषि ने उसे देख लिया।

उन्होंने अहिल्या को पत्थर बन जाने का श्राप दिया जिसे लोकलाज के कारण उसने स्वीकार कर लिया।ऋषि का क्रोध जब शांत हुआ तो उन्होने अहिल्या को श्राप मुक्ति का उपाय बताया और कहा कि जब भगवान श्रीराम इधर से गुजरेंगे तो उनके चरणों के स्पर्श से वह श्राप मुक्ति हो जाएगी। बाद में भगवान श्रीराम के चरण लगते ही वह फिर से जीवित हो गई और पाप मुक्त हो गई। मनोज गौतम ने बताया कि ऋषि ने इन्द्र को भी श्राप दिया कि उनके शरीर में हजार स्त्री यौनि उत्पन्न होंगी। कुछ ही समय बाद जब इन्द्र का शरीर स्त्री योनि से भर गया तो गिड़गिड़ाकर उसने ऋषि से क्षमा मांगी जिस पर ऋषि ने योनियों को नेत्रों में परिवतित कर दिया। उनका कहना था कि जिनके तप के देवगण भी कायल थे ऐसे महान ऋषि की मूर्ति छरोरा गांव में लगना एक शुभ संकेत है।

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