कठिन है नशामुक्ति की राह

10:38 AM Aug 04, 2020 |

पंजाब से शराब की लत के कारण 100 के करीब लोगों की मृत्यु का समाचार हृदय विदारक है। यह कोई पहली घटना नहीं है। नशे की लत दिन- प्रतिदिन समाज जीवन को अपनी गिरफ्त में ले रही है। केवल पंजाब ही नहीं देश के लगभग सभी प्रदेशों में अवैध रूप से नशे का धंधा जोरों पर है। नशे की लत किसी भी समाज तथा राष्ट्र की नींव को कमजोर कर देती है।भारतवर्ष में यह समस्या निरंतर विकराल तथा भयावह होती जा रही है। विदेशों से नशीले पदार्थों की आवाजाही निरंतर बढ़ रही है। किसी समाज तथा प्रदेश में इसका थोड़ा प्रभाव है तो कोई प्रदेश पूर्णत: इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। इससे जहां एक और युवाशक्ति का ह्रास हो रहा है वहीं दूसरी ओर समाज जीवन में आर्थिक संकट खड़े होते हैं। परिवारों की सुख-शांति खत्म होती है और कलह का वातावरण बना रहता है। गांधी जी ने 09 मार्च 1934 के हरिजन नामक पत्र में लिखा था-शराब की आदत मनुष्य की आत्मा का नाश कर देती है और उसे धीरे-धीरे पशु बना देती है। जो पत्नी, मां और बहन में भेद करना भूल जाता है। शराब के नशे में यह भेद भूल जाने वाले लोगों को मैंने खुद देखा है। ज्ञात हो कि समाचारों के माध्यम से सामने आने वाली दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा मारपीट की विभिन्न घटनाओं के मूल में आरोपित शराब अथवा अन्य मादक द्रव्य के नशे में होता है। विभिन्न प्रकार के अपराध बढ़ रहे हैं, जिसके मूल में नशे की लत एक बड़ा कारण है। गांधी जी ने 04 अप्रैल 1929 के यंग इंडिया नामक पत्र में भी लिखा था- जो राष्ट्र शराब की आदत का शिकार हैं,कहना चाहिए कि उसके सामने विनाश मुंह बाए खड़ा है। इतिहास में इस बात के कितने ही प्रमाण हैं। इस बुराई के कारण कई साम्राज्य मिट्टी में मिल गए। रोम साम्राज्य के पतन का एक सहायक कारण निसंदेह यह बुराई थी।

भारत एक युवा राष्ट्र है। प्रधानमंत्री मोदी अपने विभिन्न वक्तव्यो में भारतवर्ष की युवा शक्ति की चर्चा कई बार कर चुके हैं। वे इस युवा शक्ति के भरोसे ही एक नए भारत, समर्थ भारत और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना प्रस्तुत कर रहे हैं। किंतु नशे का अवैध कारोबार उस युवा शक्ति को, समाज जीवन को लील रहा है। मार्च 2020 में बरनाला पुलिस ने "मथुरा गैंग" का पर्दाफाश किया था। नशा बेचने वाली इस गैंग से 40 लाख के नशीले पदार्थ व डेढ करोड रुपए ड्रग मनी जब्त की थी। मई 2020 में भी पुलिस ने बलविंदर सिंह निक्का व चार अन्य तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 2,85000 नशीली गोलियां बरामद की गई थी। जुलाई 2020 में पंजाब पुलिस ने 11 राज्यों में नशीली दवाओं की सप्लाई करने वाले ‘आगरा गैंग’ का पर्दाफाश किया था। पंजाब के बरनाला व मोगा से पुलिस ने गिरोह के 20 सदस्यों को गिरफ्तार कर लगभग 28,00000 नशीली गोलियां,कैप्सूल,टीके व सिरप की बोतलें और लगभग 72 करोड रुपए ड्रग मनी बरामद की थी। गिरफ्तार किए गए लोगों में पंजाब से 16 उत्तर प्रदेश से दो और हरियाणा व दिल्ली से एक-एक व्यक्ति शामिल है। यह गिरोह दवा उत्पादकों,सप्लायर, थोक दवा विक्रेताओं और रिटेल केमिस्टो के साथ मिलकर बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बाजार में भेज रहा है। गिरोह के सदस्य मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बनकर तस्करी करते हैं और देश के लगभग 50 जिलों में इनका जाल बिछा हुआ है। पुलिस,प्रशासन और राजनेता आंख बंद किए क्यों बैठे हैं? हाल ही में आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में भी लोगों ने शराब न मिलने पर सैनिटाइजर पी लिया। जिससे 10 लोगों की जान चली गई,जबकि कई अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बिहार,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल,उत्तराखंड व दिल्ली आदि नशे के कारोबार के गढ़ बनते जा रहे हैं।

शायद ही कोई दिन ऐसा जाता होगा जब किसी न किसी प्रदेश से 10-20 लोगों की शराब के कारण अथवा नशीले पदार्थों के कारण मौत की पुष्टि न होती हो। विडंबना यह है कि प्रशासन की चिंता जांच बैठाकर और मृतकों को कुछ मुआवजा देकर समाप्त हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशामुक्त भारत का संकल्प प्रस्तुत किया था।14 दिसंबर 2014 के मन की बात के प्रसारण में उन्होंने नशे की लत और समाज विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा-"हमें इसकी चिंता समाज के रूप में करनी होगी और मैं जानता हूं कि बालक जो इस बुराई में फंसता है तो कभी-कभी हम उस बालक को दोषी मानते हैं।बालक को बुरा मानते हैं। हकीकत यह है कि नशा बुरा है, बालक बुरा नहीं है।नशे की लत बुरी है। हम आदत को बुरा माने,नशे को बुरा माने और उससे दूर रखने के रास्ते खोजें।" एक व्यक्ति और समाज के रूप में आज हमें यह समझना होगा कि नशा अंधकार,निराशा, अवसाद एवं जीवन का अंत लेकर आता है। नशे की लत ने आज बच्चों,युवा और वृद्ध सभी को अपनी गिरफ्त में लिया है। महिलाएं भी इस कारोबार में पीछे नहीं हैं। छोटे-छोटे अबोध बालकों को इस लत में झोंका जा रहा है, उनका प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीण प्रदेशों में कच्ची शराब की भट्टियां बदस्तूर जारी हैं।

महानगरों में वैध और अवैध रूप से बार एवं हुक्का बार चल रहे हैं। गली गली में सरकारी शराब की दुकानें खुली हुई हैं। क्या ऐसे में नशामुक्ति की राह आसान है? ध्यान रहे कि सरकारों को शराब की बिक्री से बड़ी आमदनी होती है,किंतु समाज और राष्ट्र को बचाना है तो हमें इन शराब की दुकानों पर सबसे पहले ताला लगाना होगा। पुलिस,प्रशासन और राजनेताओं की मिलीभगत से अवैध नशे की बिक्री बदस्तूर जारी है। लचर न्याय व्यवस्था और कठोर दंड का प्रावधान न होने से नशे के कारोबार में लगे लोग निडर होकर अपना काम कर रहे हैं। इनके रसूख बड़े-बड़े लोगों तक होते हैं। पुलिस और प्रशासन इन तक पहुंच भी नहीं पाते। पंजाब सहित देश के कई प्रदेश "उड़ता पंजाब" बन रहे हैं।नशे से मरने वालों के समाचार छपते हैं और मृतकों के परिजन मातम मनाकर शांत हो जाते हैं।आज नशामुक्ति का संकल्प समाज और राष्ट्र का संकल्प बने इस बात की आवश्यकता है। कठोर दंड का प्रावधान हो,तभी नशामुक्ति संभव हो सकेगी अन्यथा यह कठिन है।

-डॉ. वेदप्रकाश    
असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग
    हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय