केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए IAS अधिकारी ने छुपाई पहचान, 7 दिनों तक दिन-रात करता रहा मदद

तिरुवनतंपुरम (उत्तम हिन्दू न्यूज): केरल में बाढ़ के कारण अब तक यहां 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों पशु भी मौत के मुंह में समा गए हैं। इस बीच हर कोई केरल की मदद के लिए आगे आ रहा है। सब बाढ़ राहत शिविरों में पीड़ितों की मदद करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे ही एक आईएएस अधिकारी हैं कन्नन गोपीनाथन, जो पिछले 8 दिनों से अपनी पहचान छिपाकर राहत कार्य में जुटे रहे। इस दौरान उन्होंने सिर पर बोरियां भी ढोईं। शिविर में सफाई भी की और यहां तक की बच्चों को गोद में भी खिलाया।   

हालांकि नौवें दिन जब उनकी पहचान उजागर हो गई, जिसके बाद वह बिना किसी को बताया शिविर से लौट गए। बता दें कि 2012 बैच के आईएएस कानन गोपीनाथ जो इस वक्त दादरा नगर हवेली में बतौर जिला कलक्टर तैनात हैं, 26 अगस्त को कोचि के एक बाढ़ राहत शिविर में पहुंचे थे। उन्होंने अपनी पहचान उजाकर किए बिना यहां राहत कार्य में हिस्सा लिया। गोपीनाथ केरल मुख्यमंत्री राहत कोष में देने के लिए दादरा नगर हवेली की ओर से एक करोड़ रुपये का चेक देने पहुंचे थे।

वो अपनी पहचान उजागर न करते हुए पिछले 8 दिनों से राहत शिविरों में काम कर रहे थे। लेकिन एक दिन जब एर्नाकुलम के कलेक्टर ने वहां का दौरा किया तो उन्होंने शिविरों में काम कर रहे कन्नन को पहचान लिया। तब जाकर उनकी पहचान उजागर हुई कि वो एक आईएएस अधिकारी हैं। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोग कन्नन की पहचान उजागर होते ही हैरान हो गए। गोपीनाथ की पहचान उजागर होने के बाद उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि उन्होंने कोई महान काम नहीं किया। असल हीरो तो वह लोग हैं जो बाढ़ग्रस्त इलाकों में भीतर घुस कर लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं।
 

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