आतंकियों की पौ बारह

पाकिस्तान पर हमेशा से भारत यह आरोप लगाता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार आतंकियों को समर्थन और संरक्षण देती है और पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर यह आतंकी भारत में हिंसा फैलाते हैं। घाटी में अशांति का मुख्य कारण पाकिस्तान समर्थित वह संरक्षित आतंकवादी ही है। भारत द्वारा कही बात को अब अमेरिका सहित वह सभी देश जो आतंकवाद से प्रभावित हैं मान रहे हैं कि अमेरिका से अरबों-खरबों रुपए की आतंकवाद विरुद्ध लडऩे के लिए सहायता लेने वाले पाकिस्तान में आज भी आतंकी खुलेआम घूमते ही नहीं बल्कि जलसे-जलूस भी करते हैं।

पिछले दिनों कश्मीर दिवस के नाम पर मुल्तान से लेकर लाहौर तक समूचे पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ने न सिर्फ बड़ी-बड़ी रैलियां निकालीं बल्कि कश्मीर के नाम पर जमकर चंदा भी वसूला। इन संगठनों में जैश-ए-मोहम्मद, लश्करे तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन शामिल हैं। इन पर भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ समेत कई दूसरे देशों ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। ये सारे संगठन कुख्यात आतंकी हफीज सईद के नए संगठन तहरीक-ए-आजादी जम्मू व कश्मीर (टीएजेके) के बैनर तले जमा हुए और सार्वजनिक तौर पर भारत विरोधी नारे लगाये। लाहौर में टीएजेके की सबसे बड़ी रैली निकाली गई जिसमें वक्ताओं ने कश्मीर के लिए फंड उपलब्ध कराने पर पाकिस्तान सरकार को शुक्रिया अदा किया। यह उसी दिन हुआ जिस दिन लंदन में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी यह दावा कर रहे थे कि कश्मीर में हो रही हिंसा में पाकिस्तान का कोई हाथ नहीं है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के रवैये में यह बदलाव अफगानिस्तान के हालात में हो रहे बदलाव से जोड़कर देखा जा सकता है। अमेरिका व तालिबान के बीच वार्ता जारी होने से पाकिस्तान को इस बात का पता चल गया है कि उसकी अहमियत आने वाले दिनों में बढ़ेगी, लिहाजा वह 'अच्छे आतंकी और बुरे आतंकी' की नीति की राह पर फिर से लौट आया है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जिस तरह का माहौल है पाकिस्तान उसका भी फायदा उठाने की कोशिश में है। भारत की अगुवाई में आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा तो पाकिस्तान सरकार ने जून, 2017 में टीएजेके पर प्रतिबंध लगाये थे और इसके कर्ता-धर्ता हाफिज सईद को भी नजरबंद किया था। लेकिन इमरान खान की सरकार के आने के बाद हाफिज सईद खुलेआम कैबिनेट के मंत्रियों के साथ भारत विरोधी बयान दे रहा है। इमरान खान के एक कैबिनेट मंत्री ने सार्वजनिक सभा में कहा है कि उनकी सरकार सईद को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। टीएजेके अब खुलेआम आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटा रहा है। यही वजह है कि भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिछले दिनों कहा था कि एक तरफ पीएम इमरान खान कई बार कह चुके हैं कि भारत के साथ वे दोस्ती का माहौल बनाना चाहते हैं जबकि दूसरी तरफ उनकी सरकार के कई मंत्री आतंकियों के साथ उठ बैठ रहे हैं।

धरालत का सत्य यह है कि पाक अधिकृत कश्मीर जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है पूरी तरह पाकिस्तान के नियंत्रण में है। 2006 में मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राईट वाच ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 'इस तरह आजाद कश्मीर सभी अभिप्रायों और उद्देश्यों में पाकिस्तान के कठोर नियंत्रण में है और उसकी अपनी कोई सार्वभौमिकता नहीं है। शुरुआत से ही इस क्षेत्र का संस्थागत ढांचा ऐसे बनाया गया कि इस क्षेत्र के मामलों पर पाकिस्तान का नियंत्रण रहे। संयुक्त आयोग के कश्मीर आयोग के प्रस्तावों के अनुसार आजाद कश्मीर न तो एक सार्वभौमिक राज्य है न ही पाकिस्तान का एक प्रांत है बल्कि युद्धविराम समझौते के तहत इसे दिए गए क्षेत्र का एक स्थानीय प्राधिकार है। अक्टूबर, 1947 में आजाद कश्मीर के स्थानीय प्राधिकार या अस्थाई सरकार ने 28 अप्रैल 1949 के कराची समझौते के तहत सुरक्षा, विदेशी मामलों, कश्मीर आयोग से बातचीत और गिलगिट तथा बाल्टिस्तान (रणनीतिक रूप से बेहद महत्त्वपूर्ण ये इलाके पाकिस्तान का उत्तरी क्षेत्र बनाते हैं लेकिन भारत इन पर जम्मू और कश्मीर राज्य के हिस्से के रूप में दावा करता है। के मामले पाकिस्तान को सौंप दिए।'

पाकिस्तान जिसे आजाद कश्मीर कहता है उसके तथाकथित प्रधानमंत्री को बर्खास्त करने का अधिकार पाकिस्तान के विदेश मंत्री को है और तो और आजाद कश्मीर का प्रधानमंत्री जब पद की शपथ लेता है उसमें भी यही कहता है कि आजाद कश्मीर के पाकिस्तान में विलय के उद्देश्य के प्रति हमेशा निष्ठवान रहेगा।

पाक अधिकृत कश्मीर में न केवल आतंकियों के ठिकाने है बल्कि इसके साथ वहां चीनी फौजियों को भी जगह दी गई है और वहां के निर्माण कार्य भी चीनियों को दिए गए हैं। आतंकियों को कश्मीर दिवस के नाम पर जो छूट पाकिस्तान में धन एकत्रित करने व भारत विरुद्ध बोलने के लिए दी गई उसी से पाक का नापाक चेहरा व नीति जग जाहिर है। भारत सरकार सहित विश्व के उन तमाम देशों को एकजुट होकर पाकिस्तान पर दबाव बनाकर आतंकियों को समर्थन व संरक्षण न देने की बात कहनी चाहिए। अगर पाकिस्तान को आतंकियों को समर्थन व संरक्षण देने से न रोका गया तो आने वाले समय में भारत सहित सभी देशों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।