कृषि कानून लागू करने से पहले केंद्र से की थी बात, पर नहीं सुनी : हरसिमरत बादल

अमृतसर (दीपक मेहरा) : पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं शिअद नेत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के संघर्ष को प्रभावित करने के लिए ही इसे लंबा खींच रही है। सरकार किसानों की मांग के अनुसार कृषि कानून रद्द करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार आंदोलन को प्रभावित करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है। इसके लिए किसानों को सचेत रहना चाहिए। हरसिमरत कौर बादल श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए आई थी।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब कानून लागू किए जा रहे थे तो उन्होंने केंद्र सरकार को कहा था कि कानून लागू करने से पहले किसानों के साथ बातचीत कर लेनी चाहिए, परंतु सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन सही है और एक सुयोग्य ढंग से चलाया जा रहा आंदोलन है, पर इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें हो रही हैंं।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि संघर्षशील किसान इन कोशिशों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगे। हरसिमरत ने कहा कि किसान आंदोलन में 70 के करीब किसान शहीद हो चुके हैं, परंतु सरकार को इनकी कोई परवाह नहीं है। उल्टा सरकार किसानों को अदालत में जाने का रास्ता बता रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार कानूनों के मामले में किसानों की आवाज सुनने के लिए तैयार नहीं है। एक चुनी हुई सरकार अगर लोगों को अदालत में जाने का रास्ता बताती है तो फिर उसे लोगों द्वारा चुना ही क्यों गया है। वह लोगों का प्रतिनिधित्व कैसे करती है। उन्होंने कहा कि अकाली दल हमेशा किसान संघर्ष के साथ है और किसानों की इस आंदोलन में अवश्य विजय होगी।