5 साल तक नि:संतान रहने वाले दंपत्ति ही करवा पाएंगे सरोगेसी, 90 दिनों में देना होगा इनफर्टिलिटी सर्टिफिकेट-बिल पारित

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सरोगेसी विनियमन विधेयक 2016 को पारित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे सदन की बैठक शुरू होने पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा को सरोगेसी विनियमन विधेयक पेश करने की अनुमति दी। करीब सवा घंटे तक चली चर्चा में नौ सदस्यों ने भाग लिया। इसके बाद विधेयक को सरकार द्वारा लाए गए 23 संशोधनों को शामिल करके पारित कर दिया गया। इस विधेयक में देश में सरोगेसी के कारोबार को बंद करने के लिए प्रभावी प्रावधान किए गए हैं।  यह विधेयक ना केवल भारतीय बल्कि विदेशी, एनआरआई और पीआईओ पर भी लागू होगा। यह भारत में व्यावसायिक सरोगेसी को प्रतिबंधित करता है, इस कानून के तहत सख्ती बरतते हुए सिर्फ परोपकारी आधार पर प्रजनन क्षमता से वंचित पांच सालों से शादीशुदा दंपति को छूट दी गई है और सरोगेसी के लिए उन्हें सरोगेट मां के रूप में करीबी रिश्तेदार को ही चुनना होगा। 

चर्चा का उत्तर देते हुए नड्डा ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है जब सदन में इतना शोरशराबा होने के बावजूद सार्थक चर्चा हुई और विधेयक पारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों ने सरोगेट मां और बच्चे के हितों की संजीदगी से चिंता की है। उनके शोषण की संभावनाओं को समाप्त करने के प्रभावी उपाय किए गए हैं। नड्डा ने कहा कि सरकार वाणिज्यिक सरोगेसी या सरोगेसी के कारोबार को सिरे से खारिज करती है। विधि आयोग और उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर चिंता जताई थी। पूरे समाज के हित को ध्यान में रखते हुए हम कैसे नियमन करेंगे और आधुनिक विज्ञान की मदद से नि:संतान दंपतियों को संतानसुख मिले इसके लिए पर्याप्त उपाय किए गए हंै। विधेयक में परिवार को परिभाषित किया गया। एकल अभिभावक की श्रेणी को इसमें जगह नहीं दी गई है। उनके लिए गोद लेने का विकल्प है। विपक्ष द्वारा उठाये गये कई विषय विधेयक की बजाय नियमावली में शामिल किये जाएंगे जिनमें निकटस्थ परिजनों की व्याख्या भी शामिल है। विधेयक में प्रवासी भारतीयों को भी जोड़ा गया है।

प्रजनन में अक्षमता का प्रमाणन 90 दिनों के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को संशोधनों के साथ पारित किया। विपक्ष की ओर से कुछ संशोधन पेश किये गये जिन्हें नकार दिया गया। तत्पश्चात महाजन ने रामविलास पासवान से उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 पेश करने को कहा। पासवान ने उठकर विधेयक के बारे में बोलना शुरू किया तो आसन के आसपास जमा विपक्षी सदस्यों ने शोरशराबा तेज कर दिया। इस पर अध्यक्ष ने अन्नाद्रमुक के सदस्यों से कहा कि उनके मुद्दे का समाधान शोर करने से नहीं होगा। इसके लिए चर्चा करनी होगी और चर्चा के लिए सीट पर जाना होगा। लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी के सदस्य भी नारेबाजी करते रहे। इस पर अध्यक्ष से सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।