महाशक्तियों ने मोदी शक्ति को माना

किसी भी व्यक्ति के अंदर जन्म से गुण-अवगुण, शांत-अशांत, भला-बुरा, ज्ञानी-अज्ञानी आदि के भाव नहीं होते। व्यक्ति को अपने अंदर का ज्ञान, गुण, शांति, भलाई आदि ये भाव या विशेषता पैदा करने के लिए कर्म करना पड़ता है। दूसरे शब्दों में कहें तो कर्म के आधार पर ही ये सभी भाव उभरकर आते हैं कि कौन कितना ज्ञानी, गुणी, शांत और भला है। गीता में भगवान ने कहा है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन अर्थात् व्यक्ति का कर्म करने का अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। व्यक्ति को कर्म करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए, उसी में स्वयं की और लोक की भलाई है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी जन सेवा के कर्म को ही अपना ध्येय मानकर चलने वाले व्यक्ति हैं। इनके संस्कार और कार्यशैली का लोहा आज पूरे विश्व ने माना है।

मोदी जी के अध्यात्म, दर्शन, राजनीति, साहित्य, जनसेवा आदि गुणों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जब संस्कारवान व्यक्ति के अंतस का दीप प्रज्वलित हो जाता है तो वह न चाहते हुए भी प्रकाश पुंज बन जाता है। प्रकाश और आनंद उसका स्वभाव बन जाता है। उसके अंदर हर स्थिति से लडऩे की शक्ति भगवान स्वयं उसे प्रदान कर देता है। विचार करें तो मोदी जी की दूरगामी सोच और दृृढ़ इच्छा शक्ति ने भारतवर्ष में कोरोना जैसी महामारी को फैलने से पहले ही उसकी गति को धीमा करके जन-जन में नवजीवन का संचार पैदा कर दिया तथा व्यवस्थाओं पर भी नियंत्रण से कार्य किया। गीता में कहा गया है कि सुख दु:खे समे कृत्वा लाभालाभो जयाजयै। मोदी जी ने इस सूत्र को कोरोना संकट के इस काल में अपनाया और सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय से परे जन-जन की भलाई की बात को सोचते हुए आगे चले। मोदी जी के यही भाव जन को भातें हैं और मोदी जी को जन सेवा भाती है।
सांख्यदर्शनम् में समस्त दुखों को तीन वर्गों में बाँटा गया है, एक आध्यात्मिक, दूसरा आधिभौतिक और तीसरा आधिदैविक। जो अपने आन्तरिक कारणों से उत्पन्न होता है, वह आध्यात्मिक दुख है। जो दुख अन्य प्राणियों के द्वारा हमें प्राप्त होता है, उसे आधिभौतिक दुख कहते हैं और जो दुख वर्षा, धूप, हिमपात, भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदाओं के उत्पातों से उत्पन्न होता है, उसे आधिदैविक दुख कहते हैं। आज कोरोना महामारी जो विश्व के सामने उभरी है वह आधिभौतिक दुख है। 

कोरोना संकट के समय में मोदी जी ने देश की जनता के हित के लिए जो भी कारगर कार्य हो सकते थे, वे सभी किए। जब तक स्थिति पूर्णत: नियंत्रण में न आ जाए, लोगों को घर में ही रखने के लिए लाकडाउन को लागू किया। यह कार्य सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कैबिनेट मंत्रियों, विपक्ष के नेताओं आदि की सहमति से किया गया। इतना ही नहीं, मोदी जी ने संकट के इस काल में सेवाएँ दे रहे पुलिस वालों, डाक्टरों, नर्सों, सफाई कर्मचारियों, गाँवों के सरपंचों, बुजुर्गों, किसानों आदि से फोन पर या ई-कान्फ्रेंसिंग के माध्यमों से सीधे संवाद किया, साथ ही जनता में भरोसा बनाए रखने के लिए इन सभी लोगों के काम में सहयोग करने की अपील भी की। लोगों ने मोदी जी के भरोसे को बनाए रखा और देश के अलग-अलग राज्यों में पुलिस टीम पर, डाक्टरों, नर्सों, सफाई कर्मचारियों आदि पर फूलों की वर्षा की गई। इनके सम्मान में दीप जलाना, ताली बजाना आदि कार्योंं को बड़े ही हर्ष के साथ किया गया।

भारतीय संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिन: का पालन करने वाली है, वसुधैव कुटुंबकम की बात को मानने वाली है। अथर्ववेद का एक मंत्र है कि, भद्रमिच्छन्त ऋषय: स्वर्विदस्तपो दीक्षामुपनिषेदुरग्रे। ततो राष्ट्रं बलमोजश्च जातं तदस्मै देवा उपसंनमन्तु।। अर्थात् समस्त मानवों का कल्याण करने की इच्छा से ऋषियों ने सृष्टि के प्रारंभ में दीक्षा लेकर तप किया और उससे राष्ट्रीय बल तथा ओज प्रकट हुआ जिससे राष्ट्र का निर्माण हुआ। आज भी भारतवर्ष के मंदिरों में आरती के बाद लोग जयकारे लगाते हैं, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो आदि कहते सुनाई देते हैं। मोदी जी इन सभी बातों को अच्छी तरह जानते और समझते हैं।  अपने देश की कल्याणकारी बातों को जानने-समझने के चलते ही मोदी जी ने कोरोना महामारी के समय में विश्व के 45 से अधिक देशों को दवा भेजकर विश्व कल्याण की बात को सिद्ध कर दिया है। मोदी जी के उपर्युक्त प्रयासों को देखते हुए अमेरिका रिसर्चर कंपनी मार्निंग कंसल्ट ने ०1 जनवरी, 2०2० से 14 अप्रैल, 2०2० के बीच के अपने अध्ययन में पाया कि दुनिया के टाप 1० देशों के राष्ट्राध्यक्षों की लिस्ट में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन चीफ टेड्रोस ने भी मोदी जी का समय रहते किया गया लाकडाउन और 1.7० लाख करोड़ के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की सराहना की। अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन और विश्व के अनेक राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्यों की सराहना की है। फिल्म जगत हो, देशी-विदेशी सामाजिक संस्थाएँ हों या वैश्विक उद्योग जगत जिसमें बिलगेट््स का नाम लिया जा सकता है, इन सभी ने संकट के इस समय में मोदी जी के कार्योंं की प्रशंसा की है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जन सेवा की प्रतिभा के धनी नरेंद्र मोदी की उत्तम कार्यशैली, लोकहितैषी भावना, जनकल्याण का संकल्प आदि गुणों ने आज भारतवर्ष के नाम का परचम विश्व में एक बार फिर लहरा दिया है। हमें गर्व है कि हमें श्री नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्तित्व प्रधानमंत्री के रूप में मिला जो अपने को प्रधान सेवक कहता है। मोदी जी का व्यक्तित्व इतना विशाल है कि उसके किसी भी क्षेत्र पर कितना ही लेखन और शोध कार्य हो सकता है। मोदी जी के विचारों को समझना और समझाना तथा जन-जन तक पहुँचाना यही हमारा उद्देश्य होना चाहिए।     -नीरज भारद्वाज