Friday, May 24, 2019 12:35 AM

'मिशन शक्ति' की सफलता

गत बुधवार को भारत ने भारत में ही निर्मित एंटी सैटेलाइट मिसाइल से अपनी 2007 में स्थापित की लाइव सैटेलाइट को जो धरती से 300 किलोमीटर दूर थी को 3 मिनट में सफलतापूर्वक मार गिराया। भारत के इस सफल 'मिशन शक्ति' के साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा ऐसा देश बन गया है जो अंतरिक्ष में महाशक्ति के रूप में अब जाना जाएगा।

भारत के प्रधानमंत्री ने पहले राष्ट्र के नाम संदेश में यह जानकारी देश को दी फिर बाद में ट्वीट कर कहा कि 'मिशन शक्ति' की सफलता के लिए हर किसी को बधाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 कि.मी. दूर पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है। यह लाइव सैटेलाइट एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, जिसे एंटी सैटेलाइट मिसाइल द्वारा मार गिराया गया है। यह अभियान 3 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अब तक यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इससे किसी अंतरराष्ट्रीय कानून या संधि का उल्लंघन नहीं हुआ है। भारत हमेशा से अतंरिक्ष में हथियारों की होड़ के खिलाफ रहा है। इससे (उपग्रह मार गिराने से) देश की इस नीति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण 'मिशन शक्ति' को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को पूर्ववर्ती यू.पी.ए. सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वैज्ञानिक एक दशक पहले ही एंटी सैटेलाइट मिसाइल बनाने में सक्षम थे लेकिन उस समय की सरकार ने उन्हें कभी ऐसा करने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष खासकर कांग्रेस पर परोक्ष निशाना साधते हुए जेटली ने पत्रकारों से कहा कि जो लोग अपनी नाकामियों के लिए अपनी पीठ थपथपाते हैं, उनको याद रहना चाहिए कि उनसे जुड़ी कहानियों के पदचिन्ह बहुत दूर तक हैं और कहीं न कहीं ये पदचिन्ह मिल ही जाते हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2012 में डी.आर.डी.ओ. के पूर्व प्रमुख वी.के. सारस्वत ने कहा था कि भारत अब एंटी सैटेलाइट मिसाइल बना सकता है। लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष और अब भाजपा में शामिल हो चुके जी. माधवन नायर ने कहा कि भारत के पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल क्षमता एक दशक पहले से थी, लेकिन उस वक्त इसे प्रदर्शित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था। उन्होंने कहा कि जब चीन ने 2007 में एक मिसाइल प्रक्षेपित कर एक पुराने मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था, उस वक्त भारत के पास ऐसे ही मिशन को अंजाम देने की प्रोद्योगिकी थी। नायर ने बताया कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहल की है। उनमें राजनीकि इच्छाशक्ति और यह कहने का साहस है कि हम ऐसा करेंगे। हमने अब यह पूरी दुनिया को दिखा दिया है। लो अर्थ ऑर्बिट धरती के सबसे पास वाली कक्षा होती है। यह धरती से 2 हजार कि.मी. ऊपर होती है। धरती की इस कक्षा में ज्यादातर टैलीकम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को रखा जाता है। भारत का 'मिशन शक्ति' अंतरिक्ष में देश की संपदा को सुरक्षित रखना है। भारत ने इस शक्ति को पाने के लिए खूब मेहनत की। अग्नि 5 मिसाइल के सफल परीक्षण के समय ही कई विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई थी कि भारत के पास अंतरिक्ष में मार करने की क्षमता है। लेकिन उस समय आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। साल 2007 में चीन ने जब अपने एक खराब पड़े मौसम उपग्रह को मार गिराया तब भारत की चिंता बढ़ गई थी। उस समय इसरो और डी.आर.डी.ओ. ने संयुक्त रूप से ऐसी एक मिसाइल को विकसित करने की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए थे।

डी.आर.डी.ओ. के अध्यक्ष जी. सतीश रैडी अनुसार इस परियोजना की मंजूरी मोदी सरकार ने दो वर्ष पूर्व दे दी थी। परीक्षण में प्रयोग की गई प्रोद्योगिकी पूरी तरह से स्वदेश में विकसित है। 'मिशन शक्ति' की सफलता देश की बढ़ती क्षमता को ही दिखाता है। जी. रैडी की बात में कितनी सच्चाई है यह पाकिस्तान, चीन की प्रतिक्रियाओं से ही समझी जा सकती है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह स्पेस में हथियारों की होड़ का बिल्कुल हिमायती नहीं और अंतरिक्ष का उपयोग इंसानियत की भलाई के लिए होना चाहिए न कि सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए। वहीं, चीन ने ए-सैट मिसाइल परीक्षण पर सधा हुआ बयान दिया और उम्मीद जताई कि सभी देश बाहरी अंतरिक्ष में शांति बनाए रखेंगे। 

देश में लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू है, इसलिए विपक्षी दलों ने परीक्षण के समय को लेकर अपना विरोध चुनाव आयोग के सामने तो रखा ही है, साथ में इसे प्रधानमंत्री की नौटंकी भी करार दे दिया। उपरोक्त बात भारत की राजनीति के कमजोर पहलू को ही दर्शाती है। जहां विश्व भारत के 'मिशन शक्ति' की सफलता पर भारत को एक महाशक्ति के रूप में देखने लगा है तथा देश के दुश्मन भी घबरा रहे हैं वहीं भारत के विपक्षी दल अपनी इस बड़ी सफलता को छोटा कर देख रहे हैं। अंतरिक्ष में महाशक्ति के रूप में स्थापित होना देश के वैज्ञानिकों की एक बड़ी सफलता है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं और देशवासियों को उन पर तथा उनकी सफलता पर गर्व है। नरेन्द्र मोदी आज देश की राजनीति का केंद्र बिंदू हैं तो इसका मूल कारण उनकी देश के प्रति निष्ठा और उनकी इच्छाशक्ति। नरेन्द्र मोदी को जो बात देश हित में लगती है उसके लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। नोटबंदी, जीएसटी, सर्जिकल स्ट्राइक और अब 'मिशन शक्ति' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उपरोक्त निर्णय राजनीति से ऊपर उठ देशहित के लिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि आज देश को मोदी जैसा ही नेता चाहिए, जो राष्ट्र के मान और सम्मान के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। मोदी की इसी भावना तथा निर्णय शक्ति के कारण भारत तथा भारतीयों की विश्व में साख व छवि मजबूत हुई है और हो भी रही है। 'मिशन शक्ति' की सफलता पर सबको बधाई।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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