Sunday, May 19, 2019 11:59 AM

पूर्ण रुप से सुन पाने में असमर्थ लोगों के लिए वरदान साबित होगा स्मार्टफोन, जानें क्यों

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): आंशिक अथवा पूर्ण रूप से सुन पाने में असमर्थ लोगों के लिए वरदान साबित हुए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) अब स्मार्ट फोन के ऐप के जरिए संचालित किये जा सकते हैं और उपभोक्ता स्वयं अपनी जरुरत के अनुरुप इसकी फ्रीक्वेंसी में बदलाव कर सकता है।  डिजिटल माॅडल के हियरिंग एड में व्यक्ति की सुनने की क्षमता के हिसाब से कम्प्यूटर के जरिये इसकी फ्रीक्वेंसी लोड की जाती है। यही फ्रीक्वेंसी आसपास की ध्वनि को मस्तिष्क के केंद्र से जुड़ी कानों की कोशिकाओं तक पहुंचाती है और व्यक्ति को सूक्ष्म ध्वनि भी सहज सुनायी देने लगती है। 

ऑडियोलाजिस्ट हिमांशु सिन्हा का कहना है कि हियरिंग एड संचालित करने के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करना ही पड़े यह आवश्यक नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से सेटिंग्स को समायोजित करने और इसके फंक्शन को बदलने में आसान बना सकता है। उपभोक्ता के फायदे के लिये हियरिंग एड निर्माता ऐसे उत्पादों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिसका इस्तेमाल स्मार्टफोन के जरिए किया जाता है। यह यूजर्स के लिए फायदेमंद भी है, क्योंकि यह उन्हें किसी भी वातावरण में सुनने के तरीके पर अधिक नियंत्रण प्रदान करता है। 

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सिन्हा ने बताया कि स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ आधुनिक श्रवण यंत्रों का एक प्रमुख लाभ ऐप के माध्यम से वॉल्यूम, बास और ट्रेबल को समायोजित करने की क्षमता है। स्मार्टफोन ऐप के जरिए हियरिंग एड की सेटिंग्स को बदला जा सकता है और यह काम खुद भी किया जा सकता है। एक तरह से यह ऐप हियरिंग एड के लिए रिमोट कंट्रोल का काम करता है। 

स्मार्टफोन और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की दुनिया में कई डिजिटल श्रवण यंत्र ब्लूटूथ तकनीक से भी लैस हैं। ‘टेक’-प्रेमी श्रवण यंत्र के साथ अपने ब्लूटूथ-सक्षम उपकरणों का उपयोग करने की सुविधा को पसंद करते हैं। आईफोन,आईपैड और आईपैड टच के फीचर के जरिए सीधे हियरिंग एड में ऑडियो स्ट्रीम किया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में, यह ब्लूटूथ कनेक्शन वायरलेस होता है। कम सुनने की समस्या के अलावा पीड़ितों को झींगुर के भिनभिनाने अथवा सीटी बजने की आवाज सुनाई देती है। कभी-कभी चिकित्सकीय उपचार से भी इस समस्या से निजात नहीं मिल पाती। हियरिंग एड में टिनिटस सॉल्यूशन फीचर के जरिए इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। हियरिंग एड सपोर्ट एक एक्सेबिलिटी फीचर है जोआईफोन अथवा आईपैड से कनेक्ट और मैनेज करने की सुविधा देता है।

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हियरिंग एड को सुचारू रूप से चलाने के लिए पावर की आवश्यकता होती है,जो उसे बैटरी के जरिए मिलती है। सामान्यतः एक बैटरी एक सप्ताह या 10 दिन चलती है। बैटरी बदलने की समस्या के मद्देनजर हियरिंग एड निर्माताओं ने रिचार्जेबल हियरिंग एड विकसित किया है , जो अब भारत में भी उपलब्ध है । हियरिंग एड में समय के साथ बदलाव आया है। इसी कड़ी में थ्रीडी हियरिंग एड बाजार में उपलब्ध हैं, जो वातावरण के हिसाब से स्वतः एडजस्ट हो जाता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के अनुसार दुनिया में 46 करोड़ 60 लाख लोग परिस्थितिजन्य कारणों से कम सुनाई देने की समस्या (हियरिंग लॉस) से पीड़ित हैं। इनमें 24 करोड़ 20 लाख पुरुष और 19 करोड़ महिलाएं हैं जबकि तीन करोड़ 40 लाख बच्चे हियरिंग लॉस से पीड़ित हैं। वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर 63 करोड़ 30 लाख और वर्ष 2050 तक 90 करोड़ तक हो सकती है।

डब्ल्यू एच ओ रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर व्यापक जागरूकता और स्वास्थ्यगत रणनीति के जरिए हियरिंग लॉस की विकराल समस्या से निजात पायी जा सकती है अथवा इसे न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्यगत रणनीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही कानों की व्याधियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली में उच्च गुणवत्ता और समुचित देखभाल की आवश्यकता अपेक्षित है।

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वर्तमान में मोबाइल पर गाने सुनने के लिए ईयरफोन का प्रचलन जोरों पर है और 10 में से आठ युवा कानों में ईयरफोन लगाये गाने सुनते नजर आते हैं। यहां तक कि मोबाइल पर बातचीत के दौरान भी वे ईयरफोन और माउथपीस का सहारा लेते हैं। ईयरफोन पर घंटों गाने सुनना , डीजे की तेज आाज के बीच पार्टी करना जैसी आदतों के कारण भी व्यक्ति की श्रवण क्षमता धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है जिसका उन्हें अहसास भी नहीं होता और जब तक वे इसके परिणामों से अवगत होते हैं, तब तक काफी देर हाे चुकी होती है। डब्ल्यू एच ओ का मानना है कि हियरिंग लॉस से सभी आयु वर्ग के लोग प्रभावित है और इन सबको इसके चिकित्सा मानकों का पालन करना चाहिए। 

उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष तीन मार्च को ‘ वर्ल्ड हियरिंग डे ’ आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य बधिरता और कम सुनने की समस्या के निदान के मद्देनजर समुचित उपचार तथा देखभाल के लिए व्यापक जनजागरुकता का प्रसार करना है। डब्ल्यू एच ओ के मुताबिक मौजूदा वर्ष में इसी रणनीति के तहत में स्वास्थ्य एचं चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना बनायी गयी है और इसमें पेशेवर और सामाजिक संगठनों के साथ ही निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा। रणनीतियों और इसकी निगरानी के संदर्भ में एक नियमावली प्रकाशित की जायेगी , जिसके जरिए लोगों को कार्ययोजना और इसके क्रियान्वयन को लेकर मार्गदर्शन मिलेगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यू एचओ ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के साथ मिलकर स्मार्टफोन और व्यक्तिगत ऑडियो उपकरणों के निर्माण और उपयोग के लिए मापदंड निर्धारित किया है। इसके तहत स्मार्टफोन और ऑडियो उपकरणों की ध्वनि तरंगों का स्तर तय किया जायेगा , जिससे तेज आवाज और विकिरणों से हियरिंग लॉस को न्यूनतम किया जा सके।

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