सिद्धू की सियासत

भारतीय क्रिकेट में अपनी विशेष पहचान बनाने के बाद खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू ने जब से राजनीति में कदम रखा है तब से कभी चर्चा में और कभी विवादों में होने के बाद भी वे जनसाधारण के लिए एक बड़ा आकर्षण का केन्द्र आज भी हैं। सिद्धू चाहे भाजपा से जुड़े हुए थे या आज कांग्रेस के साथ हैं वह अपने राजनीतिक कद को बढ़ाने के लिए हमेशा कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे सिद्धू को अनदेखा करना मुश्किल हो जाता है।

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान भी हो चुका है। 23 मई तक ईवीएम में सभी उम्मीदवारों के भाग्य बंद हो चुके हैं। किसके भाग्य में क्या लिखा है यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।
सातवें चरण में चुनाव प्रचार समाप्त होने के एक दिन पूर्व पंजाब में चुनावी प्रचार के लिए कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू ने कदम रखा था उसी के साथ पंजाब कांग्रेस में खेला जा रहा शह और मात का खेल तेज हो गया था। गौरतलब है कि कै. अमरेन्द्र सिंह ने पंजाब में लोकसभा चुनावों के प्रचार से सिद्धू को बाहर ही रखा हुआ था। यह बात कै. अमरेन्द्र सिंह सहित सिद्धू दम्पत्ति ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी की। चुनाव प्रचार के अंतिम क्षणों में विशेषतया बठिंडा में कांग्रेस उम्मीदवार राजा वडिंग़ के समर्थन में लगे मंच से नवजोत सिद्धू ने जो कह दिया उससे पंजाब की राजनीति के साथ-साथ कांग्रेस की भीतरी लड़ाई की दशा और दिशा प्रभावी होने की भूमिका तैयार हो गई है।

बठिंडा में राजा वडि़ंग के हक में चुनाव प्रचार करने आए नवजोत सिंह सिद्धू ने एक तीर से दो निशाने लगाए। उन्होंने अपनी हर बात में बादलों के साथ-साथ अप्रत्यक्ष तौर पर कैप्टन को भी घेरा। बिना नाम लिए वह बार-बार बेअदबी और चुनाव में मिलकर 75-25 का मैच खेलने की बात कर लोगों को इस बार इन्हें मजा चखाने की बात कहते रहे।

बेअदबी पर अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि सिखों पर जिन्होंने गोलियां चलवाईं उन पर एफआईआर तक नहीं की गई। क्या जस्टिस रणजीत आयोग से एसआईटी बड़ी हो गई। जब जस्टिस रणजीत ने रिपोर्ट में सब कह दिया था तो फिर एफआईआर क्यों नहीं की, क्योंकि बेअदबी में किसी का 75 प्रतिशत तो किसी का 25 प्रतिशत हिस्सा है।

सिद्धू ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं सीटें न मिलीं तो इस्तीफा दे देंगे, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि सिद्धू तो पहले ही राज्यसभा छोड़कर बैठा है, बेअदबी करने वालों को सजा न दी तो इस्तीफा सिद्धू देगा। कैप्टन की तरफ से एक दिन पहले बयान दिया गया था कि पार्टी का सफाया हुआ तो इस्तीफा दे दूंगा। सिद्धू ने कहा कि बादल और उनके साथी 75-25 का मिलकर मैच खेलते हैं, इस बार 23 मई, बीबी गई का स्लोगन लेकर चलो ताकि मैच फिक्स करने वालों की आंखें-खुली रह जाएं। उन्होंने कहा कि वोट के लिए जिन्होंने गुरु रोल दिया, उन्हें कभी माफ न करें।

गौरतलब है कि पिछले दिनों नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने उन्हें चंडीगढ़ से टिकट न देने पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व पंजाब प्रभारी आशा कुमारी पर उनकी टिकट कटवाने का आरोप लगाया था। इस पर कैप्टन ने वीरवार को कहा कि चंडीगढ़ के लिए सिद्धू की पत्नी से बेहतर पवन बंसल हैं। इस पर नवजोत सिंह सिद्धू ने चंडीगढ़ में कहा था कि मेरी पत्नी सच बोलने से नहीं डरती। उन्होंने तो रेत और केबल माफिया पर ड्राफ्ट पॉलिसी देने और फैसला सीएम के हाथ होने की भी बात की।

इसके बाद शुक्रवार को बठिंडा में प्रचार करने आए सिद्धू ने फिर से अप्रत्यक्ष तौर पर कैप्टन को उनके ही बयानों पर घेरा। इससे पहले भी सिद्धू के पंजाब में प्रचार करने के मामले में कैप्टन ने कहा था कि उनकी पंजाब में जरूरत नहीं तो सिद्धू ने कहा था कि वह बिना बुलाए तो केवल दरबार साहिब ही जाते हैं और कहीं नहीं। 13 मई को सिद्धू ने वोकल कार्ड खराब होने पर दो दिन प्रचार से आराम करने की प्रेस रिलीज जारी करवाई। 14 मई को प्रियंका गांधी की बठिंडा रैली में जब सिद्धू आए तो कह दिया कि वह तो प्रियंका जी के कहने पर आए हैं। इससे सिद्धू और कैप्टन के बीच मतभेद फिर से उजागर हुए थे।

नवजोत सिद्धू का जनसाधारण में लोकप्रिय होने का मुख्य कारण उनकी साफ छवि ही है। आज तक उनकी ईमानदारी को लेकर किसी ने उंगली नहीं उठाई लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में चर्चा शुरू हो गई है कि सिद्धू के बोल बिगड़ते जा रहे हैं। भाजपा से लेकर आम आदमी पार्टी से सम्पर्क और फिर कांग्रेस का दामन थामने तक की नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक यात्रा को जनसाधारण ने राजनीतिक शह और मात का हिस्सा ही माना और इसी बात का लाभ भी सिद्धू उठाते रहे।

कांग्रेस के मंचों से जिस तरह अतीत में कहीं अपनी बातों को अपने ही कई मुहावरों द्वारा नए रूप में लेकिन पुराने शब्दों में कहा उससे सिद्धू की राजनीतिक परिपक्वता पर अवश्य उंगली उठी है। बठिंडा में कांग्रेस के मंच से अपने ही मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह को घेरने का प्रयास किया वह जनसाधारण को तो पसंद आ सकता है वरिष्ठ कांग्रेस नेता को पसंद आने की संभावनाएं कम ही हैं।

पंजाब में चुनाव परिणाम आने के बाद कै. अमरेन्द्र सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच टकराव बढऩे की पूरी संभावना है। नवजोत सिंह सिद्धू को बेशक राहुल गांधी व प्रियंका गांधी का समर्थन प्राप्त है लेकिन धरातल का सत्य यह भी है कि राहुल गांधी व गांधी परिवार के साथ कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व पंजाब कांग्रेस में कै. अमरेन्द्र सिंह की अनदेखी करने या कै. अमरेन्द्र को किनारे कर चलने की स्थिति में नहीं। इसी के साथ एक और महत्वपूर्ण पहलू जिस पर नवजोत सिद्धू को ध्यान देने की आवश्यकता है वह यह कि पंजाब के कांग्रेसी विधायकों का बहुमत भी कै. अमरेन्द्र सिंह के साथ ही है इसलिए कै. अमरेन्द्र सिंह विरुद्ध जो लड़ाई नवजोत सिंह सिद्धू ने छेड़ी है वह समय और परिस्थितियों को देखते हुए सिद्धू के लिए राजनीतिक रूप से हानिकारक हो सकती है। समय की मांग भी है और नवजोत सिंह सिद्धू के हित में भी है कि अभी इस राजनीतिक शह और मात के खेल को तेज करने की बजाए धीमा करे और इसके लिए पहली शर्त यह ही है सिद्धू तोल-मोल के बोलें।

सिद्धू को समझना होगा कि जीवन यात्रा पहाड़ पर चढऩे के सामान ही है। पहाड़ पर चढ़कर चोटी पर खड़ा रहना भी एक चुनौती है और अगर रास्ते में कदम फिसल गया तब तो नीचे खाई ही होती है। अंतिम निर्णय तो नवजोत सिंह सिद्धू को ही करना है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।