कर्म प्रधान विश्व का संदेश दुनिया को देती है श्रीमद्भागवत गीता : राज्यपाल

कुरुक्षेत्र (दुग्गल) - हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा है कि श्रीमद्भगवद् गीता दुनिया को कर्म प्रधान विश्व का संदेश  देती है। दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति जब कर्मयोगी बनेगा तभी आपसी सद्भाव, प्यार व भाईचारा बढ़ेगा। कुरुक्षेत्र की पुण्यभूमि में भगवान कृष्ण ने दुनिया को श्रीमद्भगवद् गीता के रूप में दिव्य संदेश दिया था। इसी का परिणाम है कि आज कुरुक्षेत्र की माटी के जल, थल व वायु तीनों ही मुक्ति प्रदाता हैं। ऐसे पौराणिक , धार्मिक ग्रंथ का संदेश दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे व जन कल्याण के लिए इस संदेश का प्रयोग हो इसलिए ही गीता महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।

वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ओडिटोरियम हॉल में श्रीमद्भगवद्गीता का शाश्वत दर्शन एवं सार्वभौमिक कल्याण विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल, स्वामी ज्ञानानंद, युवा एवं खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह, विधायक सुभाष सुधा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा, उपायुक्त कुरुक्षेत्र डॉ. एसएस फुलिया, विदेशी विशेष अतिथियों जिनमें नेपाल के डिप्टी हाई कमिश्नर भरत कुमार व जिम्बाब्वे के डिप्टी हाई कमिश्रर व अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ किया। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से तैयार की गई 48 कोस एक सांस्कृतिक यात्रा कॉफी टेबल, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के सॉविनियर व गत वर्ष की संगोष्ठी के शोध पत्रों पर संकलित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल ने कहा कि गीता एक धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ एक जीवन दर्शन है जिसको अपनाकर कोई भी राष्ट्र अपना विकास कर सकता है। गीता सार्वभौमिक व कल्याणकारी है।

कुलपति ने किया मेहमानों का स्वागत 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि इस 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में 9 देश, 15 राज्यों से 500 से अधिक बुद्विजीवी भाग ले रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए हमेशा एक विशेष अवसर होता है क्योंकि इसमें श्रीमद्भगवद्गीता पर उच्चतम स्तर का वैचारिक चिंतन होता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का विकास केयू का मूल तत्व है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर 6 विभागों की ओर से श्रीमद्भगवद्गीता पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस मौके पर कुलपति ने सभी का आभार प्रकट किया।