श्री कृष्णा सर्किट

02:36 PM Aug 12, 2019 |

लंदन में अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती मंत्रालय में स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता भारत का गर्व और गौरव है। इसके कर्मयोग संदेश को पूरा विश्व अपनाए और शांति, सद्भावना के साथ रहे। रामायण और गीता ऐसे ग्रंथ हैं जिनका भारतीय जनमानस के दिलों  दिमाग पर सबसे अधिक प्रभाव है, लेकिन अयोध्या और मथुरा जो भगवान श्रीराम और श्रीकृष्णा जन्म भूमि रही हैं। उनके प्रति समाज व सरकार दोनों उदासीन ही रहीं। इसी कारण दोनों विवादित भी हैं और विकसित भी नहीं हो सके।


आचार्य विनोबा भावे ने गीता और रामायण के प्रति अपने भाव इस प्रकार प्रकट किए हैं 'गीता का और मेरा संबंध तर्क से परे है। मेरा शरीर मां के दूूध पर जितना पला है, उससे कहीं अधिक मेरा हृदय और बुद्धि, दोनों गीता के दूध से पोषित हुए हैं। जहां हार्दिक संबंध होता है, वहां तर्क की गुंजाइश नहीं रहती। तर्क को काटकर श्रद्धा और प्रयोग, इन दो पंखों से ही मैं गीता-गगन में यथाशक्ति उड़ान मारता रहता हूं। मैं प्राय: गीता के ही वातावरण में रहता हूं। गीता मेरा प्राणतत्व है। जब मैं गीता के संबंध में किसी से बात करता हूं, तब गीता-सागर पर तैरता हूं और जब अकेला रहता हूं, तब उस अमृत-सागर में गहरी डुबकी लगाकर बैठ जाता हूं। इस गीता माता का चरित्र मैं हर रविवार को आपको सुनाऊं , यह तय हुआ है। 
गीता की योजना महाभारत में की गई है। गीता महाभारत के मध्य-भाग में एक ऊंचे दीपक की तरह स्थित है, जिसका प्रकाश सारे महाभारत पर पड़ रहा है। एक ओर छह पर्व और दूसरी ओर बारह पर्व, इनके मध्यभाग में, उसी तरह एक ओर सात अक्षौहिणी सेना और दूसरी ओर ग्यारह, अक्षौहिणी, इनके भी मध्य-भाग में गीता का उपदेश दिया जा रहा है। 


महाभारत और रामायण हमारे राष्ट्रीय ग्रंथ हैं। उनमें वर्णित व्यक्ति हमारे जीवन में एकरूप हो गये हैं। राम, सीता,धर्मराज, द्रौपदी, भीष्म, हनुमान आदि के चरित्रों ने सारे भारतीय जीवन को हजारों वर्षों से मंत्रमुग्ध कर रखा है। संसार के अन्यान्य महाकाव्यों के पात्र इस तरह लोक-जीवन में घुले-मिले नहीं दिखाई देते। इस दृष्टि से महाभारत और रामायण निस्संदेह अद्भुत ग्रन्थ हैं। रामायण यदि एक मधुर नीति काव्य है, तो महाभारत एक व्यापक समाज-शास्त्र। व्यासदेव ने एक लाख संहिता लिखकर असंख्य चित्रों, चरित्रों और चारित्र्यों का यथावत चित्रण बड़ी कुशलता से किया है। बिलकुल निर्दोष तो सिवा एक परमेश्वर के कोई नहीं है, लेकिन उसी तरह केवल दोषपूर्ण भी इस संसार में कोई नहीं है, यह बात महाभारत बहुत स्पष्टता से बता रहा है। एक ओर जहां भीष्म-युधिष्ठिर जैसों के दोष दिखाये हैं, तो दूसरी ओर कर्ण-दुर्योधन आदि के गुणों पर भी प्रकाश डाला गया है। महाभारत बतलाता है कि मानव-जीवन सफेद और काले तंतुओं का एक पट है। अलिप्त रहकर भगवान व्यास जगत के विराट संसार के छाया प्रकाशमय चित्र दिखलाते हैं। व्यासदेव के इस अत्यंत अलिप्त और उदात्त ग्रंथ-कौशल के कारण महाभरत ग्रन्थ मानो एक सोने की बड़ी भारी खान बन गया है। उसका शोधन करके भरपूर सोना लूट लिया जाए। 


 स्वतंत्रता के बाद सत्ता में आई सरकारों को देश की संस्कृति और इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले उपरोक्त तीर्थों को विकसित करना चाहिए था, लेकिन धर्मनिरपेक्षता व तुष्टिकरण की नीति के कारण उपरोक्त नगरों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। देश की राजनीति में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन के परिणामस्वरूप अब उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों ने अयोध्या, मथुरा और कुरुक्षेत्र को विकसित करने का निर्णय लिया है जो सराहनीय व स्वागतयोग्य है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों को नगर के विकास के लिए योजना बनाने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार केवल कुरुक्षेत्र को ही नहीं बल्कि महाभारत से जुड़े सभी ऐतिहासिक स्थलों को विकसित कर रही है। जहां कुरुक्षेत्र के तीर्थों को श्रीकृष्ण सर्किट के तहत विकसित किया जा रहा है, वहीं 48 कोस के तीर्थों को भी दर्शनीय और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र के सेक्टर 8 में 1 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 8 सड़कों और 21 लाख रुपये की लागत से मॉडल पार्क का निर्माण किया जाएगा, इस पार्क में ओपन जिम, बच्चों के लिए झूले और पार्क के जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सीवरेज की निकासी, पीने के पानी, स्ट्रीट लाइट और सेक्टर में मन्दिर निर्माण की योजना पर भी काम किया जाएगा। सरकार के प्रयास से थानेसर हलके का चहुंमुखी विकास हुआ है और कई सौ करोड़ रुपये का बजट विकास कार्यों पर खर्च किया गया है, ताकि थानेसर के लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलने के साथ-साथ कुरुक्षेत्र पर्यटन हब के रूप में विकसित हो सके। शहर में रेलवे ऐलिवेटिड ट्रैक बनने से 5 रेलवे फाटकों से निजात मिल पाएगी। इतना ही नहीं, रेलवे ऐलिवेटिड ट्रैक का टेंडर भी निजी कम्पनी को जारी कर दिया है और मुख्यमंत्री स्वयं इस बड़े प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी करेंगे।


एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार पिपली से लेकर यूनिवर्सिटी के थर्डगेट तक सिक्स लेन सड़क के निर्माण और सौंदर्यकरण का काम जारी है। इस परियोजना पर करीब 57 करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा और इसका निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है। शहर के बीचोंबीच स्थित द्रोणाचार्य स्टेडियम के नवीनीकरण कार्य पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इस स्टेडियम में 8 करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक का कार्य भी शीघ्र पूरा किया जाएगा। इसके अलावा इस वर्ष मोहन नगर फ्लाईओवर से रेलवे रोड परशुराम चौक तक पुल का निर्माण किया जाएगा, इस प्रोजेक्ट पर 7 करोड़ रुपये खर्च होंगे, देश की पहली आयुष यूनिवर्सिटी की चारदीवारी के लिए भी सरकार ने करीब 3 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है।


हरियाणा के श्रीकृष्णा सर्किट को विकसित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई। हिन्दू समाज को भी चाहिए कि वह अपने धार्मिक स्थानों के प्रति सचेत होकर उनका रख रखाव करे और वहां से समाज सेवा के कार्यक्रमों को प्राथमिकता दें। इसी में समाज व देश की भलाई है।     


- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।