कार्यवाहक पीएम ओली को झटका, नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने भंग संसद की बहाल

काठमांडू (उत्तम हिन्दू न्यूज): नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका देते हुए अपने फैसले में भंग की गई नेपाली संसद को बहाल कर दिया है। चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर जेबीआर की अगुवाई में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने ओली के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए यह फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अगले 13 दिनों के भीतर सदन सत्र बुलाने का भी आदेश दिया है।

पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान न्याय मित्र की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि सदन को भंग करने का प्रधानमंत्री ओली का फैसला असंवैधानिक था। न्याय मित्र की तरफ से पांच वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा था। सुनवाई के दौरान एक वरिष्ठ वकील पूर्णमान शाक्य ने कहा कि नेपाल के संविधान में देश के प्रधानमंत्री को संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है। यह राजनीतिक नहीं, संवैधानिक मामला है, इसलिए अदालत को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। एक सदस्य ने पीएम के फैसले को असंवैधानिक बताया था तो एक सदस्य ने कहा कि सदन को गलत नीयत से भंग किया गया। हालांकि, एक सदस्य ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार है।

आज नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने 20 दिसंबर, 2020 को संसद भंग होने के बाद प्रधानमंत्री केपी ओली के विभिन्न संवैधानिक निकायों को की गई सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने उस अध्यादेश को भी रद्द कर दिया है जिसे ओली ने इन नियुक्तियों के लिए पारित किया था। दरअसल किसी भी संवैधानिक निकाय में नियुक्ति करने के लिए एक बैठक होती है। जिसे बाइपास करने के लिए ओली ने यह अध्यादेश पारित किया था। 20 दिसंबर, 2020 को राष्ट्रपति बिद्या देव भंडारी ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर संसद को भंग कर दिया था।