अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले का खतरा, सुरक्षा की समीक्षा करने जम्मू-कश्मीर जाएंगे शाह

श्रीनगर (उत्तम हिन्दू न्यूज): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कड़ी सुरक्षा में बुधवार से दो दिन जम्मू एवं कश्मीर में रहेंगे। इस दौरान वह सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की राज्यपाल सत्यपाल मलिक के संग सह-अध्यक्षता करेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री का कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार इस सीमांत राज्य में कदम रखने जा रहे हैं। जानकार सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान आंतरिक सुरक्षा पर चर्चा करना शाह की शीर्ष प्राथमिकता रहेगी। वह हालांकि राज्य के जम्मू और लद्दाख संभाग का दौरा नहीं करेंगे। 

सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के बाद शाह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं और पंचायत सदस्यों को भी अलग-अलग संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा, वे इस दौरान राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी मुलाकात करेंगे और उनके साथ राज्य की वर्तमान सुरक्षा संबंधित स्थिति पर चर्चा करेंगे। चर्चा में राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी हिस्सा लेंगे। 

सूत्रों ने कहा, इस दौरान अमित शाह कल अमरनाथजी गुफा मंदिर भी जाएंगे और वहां पूजा-अर्चना करेंगे। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पहली जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगी। सूत्रोें से मिली जानकारी के अनुसार, अमरनाथ यात्रा पर पुलवामा जैसे हमले का अलर्ट जारी किया गया है। इसके मद्देनजर जम्मू रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। वहीं, इस साल की यात्रा में सबसे अधिक जवानों की तैनाती देखने को मिलेगी- सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस कर्मियों के अलावा लगभग 42 हजार अर्धसैनिक बलों के जवान- 1 जुलाई से शुरू हो रही 46 दिनों की यात्रा के दौरान अपेक्षित लाखों यात्रियो की सुरक्षा करेंगे।

भाजपा सूत्रों ने कहा कि शाह गुरुवार को पार्टी नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों, मुख्यधारा की पार्टियों के नेताओं, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों और पंचायत सदस्यों से मुलाकात करेंगे। यह पूछे जाने पर कि केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष क्या कोई खास मांग रखेंगे, एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, हम हमेशा राज्य स्तर के मुद्दे उठाते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के दौरान हम अन्य समस्याएं भी उठाएंगे। हम यह मांग करेंगे कि विधानसभा सीटों का परिसीमन नए सिरे से कराया जाए। शाह का घाटी दौरा पहले 30 जून को ही तय था, लेकिन केंद्रीय बजट संबंधी कार्यो में व्यस्तता के कारण कार्यक्रम में बदलाव किया गया।