दवाओं का अवैध भंडारण करने वाली दुकानें की सील

चंडीगढ़ (विज)- पंजाब ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विंग ने नशीली दवाओं के व्यापारियों के विरुद्ध सख्ती बरतते हुए नशे की आदत डालने वाली अवैध दवायें बेचने वाली सोलह दुकानें बंद कर दी हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन आयुक्त के.एस. पन्नू ने आज यहां बताया कि नशों के विरुद्ध राज्य सरकार की ज़ीरो टालरैंस पॉलिसी के मद्देनजर थोक के साथ परचून-बिक्री लाइसेंस धारकों के खिलाफ ट्रामाडोल और टेपैंटाडोल नामक नशे की आदत डालने वाली दवाओं के भंडारण, बिक्री और वितरण पर विशेष पाबंदियाँ लगाने के आदेश जारी किये हैं। उन्होंने बताया कि इन दवाओं में डेकस्ट्रोप्रोपोकसीफीन, डाईफिनोकसीलेट, कोडीन, पेंटाजोसाईन, बुप्रीनोरफाईन और नाईट्राजीपेम पर पहले ही लगाई गई पाबंदियों के अलावा रोक लगाई गई है। पाबंदी लगाए जाने के बावजूद, ड्रग कंट्रोल अफसरों और ज़ोनल लायसैंसिंग अाथॉरिटी ने नियमित जांच करने पर विभिन्न कैमिस्टों की दुकानों पर नशों की आदत डालने वाली दवाओं का अवैध भंडारण पाया। पन्नू ने कहा कि हमने कैमिस्टों को नशों की आदत डालने वाली दवाओं के भंडारण, बिक्री और वितरण के प्रति उन्हें जागरूक करने में बहुत समय बर्बाद किया है। अब सरकार के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती से निपटने की ज़रूरत है। इसलिए, अब हमारी टीमें कारण बताओ नोटिस जारी कर रही हैं, दुकानों को सील कर रही हैं और अपराधियों के खि़लाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उल्लंघन करने वाले दवा विक्रेताओं के विरुद्ध ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 18 बी और धारा 28 ए के अंतर्गत न्यायिक अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज की जायेगी।


पन्नू ने कहा कि नशों की आदत डालने वाली दवाओं का दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी। नशों की आदत डालने वाली दवाओं के अवैध भंडारण के लिए सील की गई कैमिस्ट की दुकानों में मुक्तसर, भुच्चो, तरनतारन, मोगा, संगरूर और गुरदासपुर की एक-एक दुकान शामिल हैं, जबकि बठिंडा, फिऱोज़पुर, जालंधर, मोहाली और पटियाला की दो -दो दुकानें शामिल हैं।