स्कूल बंद, गेट पर किताबों की बिक्री कर रहा चौकीदार

ऊना (रविंद्र तेजपाल): हालांकि शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में किताबों की बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगाई है और शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात भी की है। बावजूद इसके निजी स्कूल प्रबंधन धड़ल्ले से बच्चों को किताबें बेच रहे हैं। जिले के एक जाने माने स्कूल में तो यह गोरखधंधा स्कूल बंद होने के बावजूद चल रहा है। स्कूल के गेट पर तैनात चौकीदार के पास किताबों का ढेर रख दिया गया है और स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के अभिभावकों को व्हटसऐप पर स्कूल में किताबें उपलब्ध होने की सूचना भेजी जा रही है और अभिभावक मजबूरी में वहां से किताबें खरीदने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं बाजार में किताब बिक्रेताओं के पास जो किताब प्रिंट रेट से 10-15 प्रतिशत कम दाम पर बेची जा रही है, उसी किताब को स्कूल प्रबंधन प्रिंट रेट पर बेच रहा है।

हैरानी की बात तो यह है कि इस स्कूल के प्रबंधकों को शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से विशेष रूप से हिदायतें भी जारी की गई हैं और शिमला से एक जांच टीम ने भी स्कूल में दबिश दी थी, बावजूद इसके स्कूल में किताबें बेचने का गौरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है। नतीजतन एक तो अभिभावकों को किताबें महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं और दूसरे बाजार में किताबों के दुकानदारों का कारोबार भी चौपट हो रहा है। आपको बता दें कि पब्लिशर्स द्वारा किताबों की छपाई में देरी की वजह से छठी कक्षा की केमिस्ट्री और फिजिक्स व नवीं कक्षा की इंडियन हिस्ट्री एंड वल्र्ड सिविक्स और कंप्यूटेक्स की किताबें दुकानों पर देरी से पहुंची हैं और ये किताबें उक्त स्कूल प्रबंधन द्वारा भी मंगवा ली गई हैं।

अब स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को व्हटसऐप मैसेज करके स्कूल के गेट से किताबें खरीदने की सलाह दे रहा है। और किताबें प्रिंट रेट पर ही दी जा रही हैं। छठी कक्षा की कैमिस्ट्री की किताब पर प्रिंट रेट 185 रुपये है और स्कूल प्रबंधन प्रिंट रेट पर ही अभिभावकों को किताब दे रहा है, जबकि यही किताब बाजार में 15 प्रतिशत छूट के साथ 165 रुपये में बिक रही है। 

क्या कहते हैं उपनिदेशक पीसी राणा
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक पीसी राणा से जब इस संदर्भ में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि इस स्कूल के बारे में शिक्षा निदेशालय शिमला में रिपोर्ट भेजी गई है। शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन से जवाब भी मांगा है, लेकिन अभी तक स्कूल प्रबंधन की ओर से निदेशालय को कोई जवाब नहीं दिया गया है। बहरहाल उन्होंने कहा कि इस स्कूल प्रबंधन को पहले भी सख्त हिदायत दी गई है और यदि स्कूल प्रबंधन फिर भी किताबों की बिक्री कर रहा है, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।