भारतीय वायुसेना हुई और मजबूत, सैटेलाइट GSLV-F 11/Gsat-7A लॉन्च

श्रीहरिकोटा (उत्तम हिन्दू न्यूज) : इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने अपने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ 11/जीसैट-7 ए को अभी थोड़ी ही देर पहले लॉन्च किया है। यह सैटलाइट भारतीय वायुसेना के लिए बहुत खास है। इस सैटलाइट पर 500-800 करोड़ रुपये की लागत बतायी जा रही है। इसमें 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं जिनके जरिए करीब 3.3 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी लगाया गया है। 

जीएसएलवी-एफ 11/जीसैट-7 ए से पहले इसरो जीसैट-7 सैटलाइट, जिसे रुक्मिणि के नाम से जाना जाता है, इसरो ने उसे लॉन्च किया था। आपको बता दें इस उपग्रह को 29 सितंबर 2013 में लॉन्च किया गया था। इसे मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया था। यह सैटलाइट नेवी के युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों को संचार की सुविधाएं प्रदान करता है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना को एक और सैटलाइट जीएसएलवी-एफ 11/जीसैट-7सी मिल सकता है जिससे इसके ऑपरेशनल आधारित नेटवर्क में और ज्याद बढ़ोतरी होगी।

 

जीएसएलवी-एफ 11/जीसैट-7 ए से केवल वायुसेना के एयरबेस ही इंटरलिंक नहीं होंगे बल्कि इसके जरिए ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद मिलेगी। इसके जरिए ड्रोन आधारित ऑपरेशंस में एयरफोर्स की ग्राउंड रेंज में खासा इजाफा होगा। बता दें कि इस समय भारत, अमेरिका में बने हुए प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन्स को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ये ड्रोन्स अधिक ऊंचाई पर सैटलाइट कंट्रोल के जरिए काफी दूरी से दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं।

इस उपग्रह को सातवीं बार भारत में उत्पन्न स्वदेशी तकनीक से बने क्रायोनिक इंजन के साथ लॉन्च किया गया। बता दें, जीसैट-7ए का वजन 2,250 किलोग्राम है। यह कू-बैंड में संचार की सुविधा उपलब्ध करवाएगा। इसरो का यह 39वां संचार सैटलाइट होगा और इसे खासकर भारतीय वायुसेना को बेहतर संचार सेवा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया जा रहा है। इसे खास तौर पर भारतीय वायु सेना की सुविधाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है।