पुलिस की याचिका खारिज, अब न्यायिक हिरासत में रहेंगे संजीव भट्ट

पालनपुर (उत्तम हिन्दू न्यूज) : बर्खास्त भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संजीव भट्ट को रिमांड में लेने की गुजरात पुलिस के मनसुबे पर अदालत ने पानी फेर दिया है। इस मामले में अदालत ने पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए भट्ट को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस की आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने भट्ट को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बुधवार को पालनपुर पुलिस थाने के इन्स्पेक्टर आईबी व्यास को गिरफ्तार किया गया था। 

याचिका के विरुद्ध बहस करते हुए बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि मामला दो दशक पुराना है और इससे संबंधित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जज ने बहस को स्वीकार करते हुए गुजरात पुलिस की सीआईडी शाखा की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को पालनपुर न्यायिक हिरासत में उपकारागार में भेज दिया। 

गौरतलब है कि जब यह घटना 1996 में हुई थी, उस समय संजीव भट्ट बनासकांठा में पुलिस अधीक्षक थे। जानकारी के मुताबिक, बनासकांठा पुलिस ने एक किलोग्राम अफीम रखने के आरोप में एक वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि यह मादक पदार्थ पालनपुर में राजपुरोहित के होटेल के कमरे में मिला था। हालांकि, बाद में एक जांच से पता चला कि राजपुरोहित पर दबाव बनाने के लिए उन्हें पुलिस द्वारा गलत तरीके से फंसाया गया था ताकि वह राजस्थान के पाली में अपनी विवादित संपत्ति को खाली कर दें। 

शिकायत के आधार पर गुजरात उच्च न्यायालय ने जून में इस मामले को सीआईडी के हवाले किया था और तीन महीने में जांच पूरी करने को कहा था। सीआईडी के अधिकारियों ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि पूर्व आईपीएस अधिकारी और अन्य ने कथित रूप से मादक पदार्थ रखकर राजपुरोहित को गिरफ्तार करने की साजिश रची थी ताकि वह इस दबाव के बाद विवादास्पद संपत्ति खाली कर दे। आपको बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले भट्ट को अगस्त 2015 में सेवा से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के लिए हटा दिया गया था। 
 

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