Friday, May 24, 2019 01:02 AM

साध्वी प्रज्ञा ने मांगी माफी

भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित आई.पी.एस. अधिकारी स्व. हेमंत करकरे जो आतंकियों से लड़ते शहीद हो गए थे पर दिए बयान के कारण देशभर में चर्चा में है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि 'मैं मुंबई जेल में थी। जांच आयोग के एक सदस्य ने करकरे से कहा कि यदि साध्वी के खिलाफ सबूत नहीं है तो हिरासत में रखना गलत है। लेकिन, करकरे ने कहा कि मैं सबूत लाऊंगा। कुछ भी करूंगा। इधर से लाऊंगा-उधर से लाऊंगा, लेकिन साध्वी को नहीं छोड़ूंगा। यह उसकी कुटिलता, देशद्रोह और धर्म विरुद्ध था। वह मुझसे सवाल पूछता तो मैं कहती कि मुझे नहीं मालूम, भगवान जाने। उसने पूछा कि क्या सबूत लेने भगवान के पास जाना पड़ेगा? यातनाओं से परेशान होकर मैंने उसे कहा कि तेरा सर्वनाश होगा। जब जन्म या मृत्यु होती है तो सवा महीने सूतक लगता है। ठीक सवा महीने बाद करकरे को आतंकियों ने मार दिया था। उस दिन सूतक का अंत हो गया। भगवान राम के काल में रावण का अंत संन्यासियों के द्वारा किया गया। द्वापर युग में कंस ने जिन संतों को जेलों में ठूंसा, उनका श्राप उसे अंत तक ले गया। कांग्रेस ने भी संतों को जेल में डाला। करकरे इसका सूत्रधार बना। मैंने कहा था कि इस शासन का सर्वनाश हो जाएगा और आज वह उदाहरण आपके सामने है।'

साध्वी प्रज्ञा के उपरोक्त बयान पर जब भाजपा विरोधियों ने साध्वी व भाजपा पर अपना निशाना साधा और प्रधानमंत्री मोदी से माफी मांगने की मांग करी तो तब साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि 'मैंने महसूस किया कि देश के दुश्मनों को इससे (मुंबई ए.टी.एस. के पूर्व चीफ हेमंत करकरे पर दिए बयान) फायदा हो रहा था ऐसे में मैं अपने बयान को वापस लेती हूं और इसके लिए माफी मांगती हूं, यह मेरी निजी पीड़ा थी। पुराने बयान से पलटते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा, वह (हेमंत करकरे) दुश्मन देश से आए आतंकियों की गोली से मरे। वह निश्चित रूप से शहीद हैं। इससे पहले भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा के बयान से दूरी बना ली थी। राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि भाजपा का स्पष्ट मानना है कि स्वर्गीय हेमंत करकरे आतंकियों से बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। भाजपा ने हमेशा उन्हें शहीद माना है।'

पिछले दिनों साध्वी प्रज्ञा ने बीबीसी से बातचीत के दौरान मालेगांव धमाके को लेकर किए प्रश्न व उसके उत्तर को आप सम्मुख रखना चाहूंगा- प्रश्न : आप मालेगांव धमाका मामले की ओर इशारा कर रही हैं, जिसका जिक्र बार-बार होता है। आप अभी ज़मानत पर बाहर हैं। बरी नहीं हुई हैं। जब आप चुनाव में उतरेंगी तो इसका भूत आपका पीछा नहीं छोड़ेगा। आप पर एक दाग तो है ही। साध्वी प्रज्ञा : मैं एक ही बात कहूंगी। मैं तो किसी भी प्रकार से, अंश मात्र भी, कोई हमारी कहीं लिप्तता नहीं है। फिर भी जो जेल में बैठ चुके हैं और जो अभी जमानत पर हैं, कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सभी जमानत पर है। हम तो इन्हीं के द्वारा प्रताडि़त हैं, हम तो इन्हीं के द्वारा डाले गए हैं। ये तो षड्यंत्र करके ही ऐसा किया उन्होंने। पीछा छोडऩे का अर्थ ये नहीं है कि मैंने कोई कुकर्म या दुष्कर्म किया है, जिसके कारण मेरे पीछे कुछ लगा हुआ है। बल्कि इनके कुकर्म को हम भोग रहे हैं। न मैंने कोई भ्रष्टाचार किया है, न कोई अनाचार किया है। न कोई घपला किया है और न देश के विरुद्ध बोला है। प्रश्न : लेकिन आपकी छवि हिंदू अतिवाद की है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता और इसकी आलोचना दिग्विजय सिंह लगातार करते रहे। आपके आने से लोग कह रहे हैं कि भोपाल की सीट पर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होगा।  साध्वी प्रज्ञा : मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहूंगी कि जो इन्होंने हिंदुत्व की परिभाषा दी है, कभी उन्होंने हिंदुत्व को आतंकवादी कह दिया, कभी सॉफ्ट हिंदुत्व कह दिया, कभी कट्टर कह दिया लेकिन हिंदुत्व का चिंतन कितना व्यापक है, वो एक श्लोक से ही प्रकट होता है- वसुधैव कुटुम्बकम् व सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय: इतनी बड़ी सोच, इतना बड़ा चिंतन, इतना वृहद हमारा धर्म है कि उसमें कहीं कट्टर या सॉफ्ट जैसी ची•ों नहीं आतीं। हिंदुत्व पूरी पृथ्वी पर सुखमय जीवन देखना चाहता है। पृथ्वी ही क्या हमारे यहां तो सब जगह शांति का संदेश दिया।

29 सितम्बर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बाइक में लगाए दो बमों के फटने के कारण सात लोगों की मौत हो गई थी और 100 के करीब घायल हो गए थे। साध्वी प्रज्ञा पर पहले महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाया गया था लेकिन बाद में कोर्ट ने उसे हटा लिया और उन पर गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला चला। साध्वी प्रज्ञा मालेगांव बम धमाकों के मामले में नौ साल तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। प्रज्ञा आरोप लगाती हैं कि तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। भाजपा ने उन्हें भोपाल से वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है। प्रज्ञा गेरुआ वस्त्र पहनती हैं और हरिओम उनका अभिवादन होता है।
 
साध्वी प्रज्ञा ने जो कहा उसके लिए साध्वी ने माफी भी मांग ली और चुनाव आयोग ने साध्वी के चुनाव लडऩे से पाबंदी लगाने को भी मना कर दिया। लेकिन हिन्दू आतंकवाद के नाम पर जो हिन्दू समाज को कटघरे में खड़ा करने वाले और जेल में साध्वी प्रज्ञा को थर्ड डिग्री टार्चर करने वाले अन्य पुलिस अधिकारियों पर आज भी कोई बोलने को तैयार नहीं। पुलिस अपनी झूठी कहानी को सच करने के लिए क्या कुछ नहीं करती और किस सीमा तक चली जाती यह बात आपातकाल और आतंकवाद के समय क्या हुआ यह देशवासी भली भांति जानते हैं। समय और परिस्थितियां इंसान को बहुत कुछ सीखा देती हैं। साध्वी ने जो जख्म झेले है वह समय के साथ ही भरेंगे। साध्वी द्वारा दिए बयान के लिए माफी मांगना उचित है और अब सारे मामले को जनता की अदालत पर छोड़ दें। मुकद्दमा तो पहले ही न्यायालय में है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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