पंजाब कांग्रेस में घमासान

नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा बठिंडा में दिए बयान की प्रतिक्रिया में पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि नवजोत सिद्धू की गैर जिम्मेदाराना हरकत से कांग्रेस को नुकसान पहुंचा है। अमरेन्द्र ने कहा कि उनके पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री से कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सिद्धू शायद 'महत्वाकांक्षी' हैं और वह 'मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।' सिद्धू पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वह (सिद्धू) एक असली कांग्रेसी होते तो उन्हें पंजाब में मतदान से ठीक पहले के बजाय अपनी शिकायतों को उजागर करने के लिए बेहतर समय चुनना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत से पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह उनका चुनाव नहीं बल्कि पूरी कांग्रेस का चुनाव है। मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से 17 मई को बठिंडा में सिद्धू द्वारा की गई उस 'विद्रोही' टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे जिसमें वह राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए दिखाई दिये थे और उन्होंने सवाल किया था कि 2015 में बेअदबी और पुलिस गोलीबारी की घटनाओं के सिलसिले में बादल परिवार के जिम्मेदार सदस्यों के खिलाफ एफ.आई.आर. क्यों नही दर्ज की गई। अमरेन्द्र ने कहा कि सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई का फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा, लेकिन एक पार्टी के तौर पर कांग्रेस अनुशासनहीनता को सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से सिद्धू के साथ उनके कोई मतभेद नहीं हंै और वह उन्हें तब से जानते हैं जब वह (सिद्धू) बच्चे थे। कुछ दिन पहले सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अमरेन्द्र और पंजाब कांग्रेस मामलों की प्रभारी आशा कुमारी पर अमृतसर संसदीय सीट से उन्हें टिकट नहीं दिये जाने का आरोप लगाया था। हालांकि अमरेन्द्र ने इस आरोप को खारिज किया था। सिद्धू ने अपनी पत्नी के आरोप का समर्थन किया था और कहा था कि वह कभी झूठ नहीं बोलती हैं। 

कै. अमरेन्द्र सिंह के समर्थन में उतरे सेहत एवं परिवार कल्याण मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने नवजोत सिंह सिद्धू के सीएम व सरकार के खिलाफ दिए बयान को पीठ में चाकू मारने के समान करार दिया है। मोहिंद्रा ने कहा कि सिद्धू सिर्फ 2 सालों से कांग्रेस में हैं और वह अपने नियम और अपना एजेंडा अन्य पर लागू कर रहे हैं, जिसका हाईकमान को गंभीर नोटिस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू को समझना चाहिए कि वह अब भाजपा में नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस में हैं, जहां बहुत सारे मंच हैं और यदि उनकी सोच सही है, तो पार्टी को नुक्सान पहुंचाए बिना वह अपने मुद्दों को उन मंचों पर रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री दोनों पार्टी हाईकमान द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे में सभी मंत्रियों की सांझी जिम्मेदारी बनती है, न कि अकेले मुख्यमंत्री की। उन्होंने सवाल किया कि क्यों सिद्धू ने कभी ऐसे मुद्दों को कैबिनेट जैसे मंच पर नहीं उठाया और जनता में गए, वह भी गलत समय में। वह कैबिनेट के अन्य साथियों के साथ पार्टी हाईकमान को सिद्धू को पार्टी की छवि को और धूमिल करने से रोकने के लिए लिखेंगे। जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सिद्धू ने कांग्रेस की पीठ में चाकू घोंपा है। रंधावा ने कहा कि बेअदबी के मुद्दे पर मैंने विधानसभा में सिद्धू का साथ दिया है लेकिन अब सोचूंगा कि साथ देना है या नहीं। सिद्धू को किसी भी पार्टी में ज्यादा समय तक टिकने की आदत नहीं है।

पति नवजोत सिंह सिद्धू के समर्थन में उतरी उनकी पत्नी डा. नवजोत कौर ने कहा कि  चुनाव का समय है, कई तरह का स्टे्रेस रहता है। हो सकता है कि किसी बयान में कुछ कह दिया होगा। सिद्धू दंपति की यह सोच नहीं है। जब उनसे यह पूछा गया कि सिद्धू दंपति पार्टी का नुकसान कर रहे हैं, कभी नवजोत सिद्धू और कभी उनके बयान पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं तो डा. सिद्धू ने कहा कि पार्टी को नुकसान तब होता है जब लोगों के काम नहीं होते। चंडीगढ़ से टिकट न मिलने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेशक उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला, इसके बावजूद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को उन्होंने एकजुट रखा। कार्यकर्ताओं से कहा गया कि इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी दूर रखें। इस बयान को गलत इंटरपरेट कर लिया गया। डा. सिद्धू ने कहा कि नवजोत सिद्धू द्वारा बठिंडा में दिया गया बयान उन कांग्रेसियों के लिए था, जो, घर बैठे हुए थे। जिनको लगता था कि हरसिमरत बादल बहुत मजबूत उम्मीदवार है, वो जीतेगी। ऐसे लोग, चाहें वे वर्कर हो या नेता, को सिद्धू ने मतभेद भुलाकर पार्टी के पक्ष में काम करने का संदेश दिया था। नवजोत के बयान से कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है तो उन्होंने कहा कि इससे तो फायदा होगा। नवजोत ने वही कहा जो लोग सुनना चाहते थे। डा. सिद्धू ने कहा कि सरकार ने दो साल में क्या किया, इसकी जिम्मेदारी केवल कैप्टन अमरेन्द्र सिंह तक सीमित नहीं है, जो नेता हलके में जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वो भी जिम्मेदार हैं। हर नाकामी सीएम के खाते में क्यों चली जाती है। नवजोत सिद्धू ने बेअदबी मामले में जस्टिस रंजीत सिंह की रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज न करने का ठीकरा कैप्टन अमरेन्द्र सिंह पर फोड़ा तो उन्होंने कहा कि हर नेता को अपनी बात कहने का अधिकार है। यह बात भी पार्टी के पक्ष में है कि बेअदबी के आरोपियों को सजा मिलनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि सिद्धू सीएम को टारगेट कर रहे हैं। पूरा पंजाब इस मुद्दे की तरफ देख रहा है। टिकट न मिलने पर कैप्टन अमरेन्द्र सिंह और आशा कुमारी पर दिए बयान पर डा. सिद्धू ने कहा जिन कार्यकर्ताओं को निगम चुनाव का टिकट नहीं मिला था, वह भी नाराज बैठे थे। पार्टी के बड़े हित को देखते हुए ऐसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर की गई। टिकट मिले न मिले, इससे ऊपर उठकर कार्यकर्ताओं को काम करने के लिए प्रेरणा दी। सिद्धू परिवार ने आज तक पार्टी से कुछ नहीं मांगा है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि कांग्रेस के बीच छिड़ा घमासान अब जल्द थमने वाला नहीं है। कै. अमरेन्द्र सिंह कह चुके हैं कि वह भविष्य में सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने वाले हैं। उपरोक्त स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही नवजोत सिद्धू आक्रामक दिखाई दे रहे हैं। नवजोत सिद्धू का लक्ष्य पंजाब का मुख्यमंत्री बनना है तो इसमें कोई बुराई नहीं। राजनीति में जो व्यक्ति सक्रिय होता है वह राजनीति में आगे बढऩे की ही लालसा रखता है। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस समय और परिस्थितियों में एक नेता निर्णय लेता है वह निर्णय ही उसकी सफलता व असफलता का कारण बन जाता है। पंजाब कांग्रेस में कै. अमरेन्द्र सिंह के बाद कौन बनेगा मुख्यमंत्री? इस प्रश्न को लेकर काफी चिंतन व मंथन हो रहा है और सिद्धू भी इसी कारण कुछ अधिक आक्रामक हुए दिखाई दे रहे हैं। कै. अमरेन्द्र सिंह ने सुनील जाखड़ को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने का जो प्रयास पिछले दिनों किया था वह भी सिद्धू को उकसाने के लिए काफी था।

अब मामला राष्ट्रीय नेतृत्व के ध्यान में आ गया है लेकिन पैदा हुए विवाद और शुरू हुए घमासान को लेकर सभी को 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव परिणाम का इंतजार करना होगा। क्योंकि कांग्रेस हाईकमान परिणाम आने से पहले किसी प्रकार का जोखिम उठाने की स्थिति में ही नहीं। पंजाब कांग्रेस का उपरोक्त घमासान 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों की दशा व दिशा को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है। कै. अमरेन्द्र सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू को इंतजार है तो बस उचित समय का।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।