बढ़ते अरबपति और घटते करदाता

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के अरबपतियों की आय व जायदाद में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच सालाना आय वाले लोगों की आय इस अवधि में 21 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। इस विश्लेषण के लिए आयकर रिटर्न भरने वालों को 6 श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में 2.5 लाख रुपये सालाना से कम आय के लोग, दूसरी श्रेणी में 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच सालाना आय वाले, तीसरी श्रेणी में 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच सालाना आय वाले लोग शामिल हैं। इसी तरह चौथी श्रेणी में 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच सालाना आय वाले, पांचवी श्रेणी में 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच सालाना आय वाले और छठी श्रेणी में 1 करोड़ रुपये सालाना से अधिक आय वाले लोग शामिल हैं। सभी श्रेणियों के अनुपात में करोड़पतियों की आय आकलन वर्ष 2015-16 के 7.2 प्रतिशत के मुकाबले 2017-18 में 7.8 प्रतिशत की तेजी से बढ़ी है। 

दूसरी ओर, 5 लाख रुपये सालाना से कम की कमाई वाले लोगों की आय समान अवधि में 41 प्रतिशत से गिरकर 34.5 प्रतिशत पर आ गई। कर का आकलन सामान्यत: अगले वर्ष किया जाता है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2017-18 में भरे गए और आकलन किए गए आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2016-17 की आय के आंकड़े होते हैं। इसलिए, आकलन वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच के आंकड़े नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के शुरुआती 3 वर्ष के आंकड़ों का काफी करीबी विश्लेषण देते हैं।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि 2.5 लाख से 5 लाख के वर्ग में आने वाले करदाताओं की संख्या वर्ष 2017-18 में कम हुई है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या इन वर्षों में बढ़ी है लेकिन कम आय वाले करदाता पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। निचले व ऊपर वाले वर्ग की आय में बढ़ती असमानता सबके लिए चिंता का विषय होनी चाहिए। केंद्र सरकार को छोटे दुकानदार, व्यापारियों और उद्योगपतियों के आर्थिक हितों को कैसे सुरक्षित किया जा सकता है, इस बारे गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। मात्र अरबपतियों की संख्या बढऩे से देश की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं मानी जाएगी। देश की आर्थिक मजबूती का आधार तो कम आय वाले करदाता की मजबूती में ही है। 

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।