आधार और स्मार्टफोन्स की सुरक्षा खतरे में, रिसर्चर्स ने बनाई फिंगरप्रिंट सिक्योरिटी भेदने वाली Master Key

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : रिसर्चर्स ने बेहद सुरक्षित माने जाने वाले बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन का तोड़ निकाल लिया है। ये कारनामा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने किया है। इन रिसर्चर्स ने बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन को भेदने के लिए  मास्टर फिंगरप्रिंट कीज बनाई है। दूसरे शब्दों में आप इस मास्टर की भी कह सकते हैं,  जिसे किसी भी लॉक को खोलने के लिए बनाया जाता है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तैयार किए गए फिंगरप्रिंट से हर पांच में से एक सफल मैच होता है। रिसर्चर्स ने एक रिसर्च पेपर भी पब्लिश किया है और यह साबित किया है कि मशीन लर्निंग का यूज करते हुए फिंगरप्रिंट्स को आर्टिफिशियल तरीके से तैयार किया जा सकता है। चिंताजनक बात ये है कि इस मास्टर फिंगरप्रिंट कीज के जरिए बायमेट्रिक ऑथेन्टिकेशन सिस्टम से सिक्योर किए गए डेटाबेस में सेंध लगई जा सकती है। ये मामला भारत के लिए और भी गंभीर इसलिए हो जाता है क्योंकि आधार कार्ड के तहत यूजर्स की आइडेंटिफिकेशन के लिए डिजिटल फिंगरप्रिंट का ही इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में फिंगरप्रिंट मास्टर कीज के जरिए डेटा चोरी करने वाले आधार को अपना निशाना बना सकते हैं।
 
खास बात ये भी है कि इन दिनों मार्केट में उपलब्ध ज्यादातर स्मार्टफोन्स में फिंगरप्रिंट स्कैनर दिए गए हैं। फोन को अनलॉक करने के लिए अधिकतर उपभोक्ता इसी का इस्तेमाल भी करते हैं। ऐसे में अपने फोन में फिंगरप्रिंट स्कैनर का इस्तेमाल करने वालों को भी ये तकनीक आने वाले दिनों में परेशान कर सकती है। रिसर्च पेपर में कहा गया है कि आंशिक प्रिंट्स पूरे प्रिंट्स जैसे नहीं होते हैं और आंशिक प्रिंट्स के दूसरे फिंगरप्रिंट्स के साथ मैच करने की समस्या रहती है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मक्को हिप्पोनेन ने अपने एक ट्वीट में मास्टर फिंगरप्रिंट कीज की तुलना लॉक के लिए बनाए गए मास्टर की से की है। उन्होंने कहा है कि सिंथैटिक फिंगरप्रिंट्स पर हुई ये रिसर्च दिलचस्प है। इसके जरिए बड़े पैमाने पर असल फिंगरप्रिंट्स को मैच किया जा सकता है।  

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