अवनी की मौत के मामले में अवमानना कार्रवाई करने से इनकार

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के यवतमाल में वर्ष 2018 में ‘आदमखोर’ बाघिन अवनी को मारने के मामले में महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रमासुब्रमण्यम की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता संगीता डोगरा की याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि बाघिन को मारे जाने का कदम शीर्ष अदालत के आदेशों के तहत ही उठाया गया था।


न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि वह मामले को फिर से खोलना नहीं चाहते, क्योंकि बाघिन को मारने की इजाज़त सर्वोच्च न्यायालय से ली गई थी। न्यायालय ने याचिकाकर्ता की उन दलीलों को भी दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि बाघिन की मौत पर जश्न मनाया जाना शीर्ष अदालत के 11 सितम्बर 2018 के आदेश का उल्लंघन है। इस आदेश के तहत बाघिन की मौत पर जश्न मनाने को प्रतिबंधित किया गया था। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि जश्न मनाने में अधिकारी शामिल नहीं थे, बल्कि सिर्फ गांववासियों ने जश्न मनाया था। गौरतलब है कि न्यायालय ने इस मामले में नोटिस जारी किया था, जिसके जवाब में महाराष्ट्र सरकार की ओर से आज हलफनामा दायर किया गया। इसमें कहा गया है कि बाघिन को गोली मारने का आदेश शीर्ष अदालत ने सितम्बर 2018 में दिया था। हलफनामा में यह भी कहा गया है कि जश्न गांव वालों ने मनाया था न कि अधिकारियों ने। याचिकाकर्ता ने मामले को वापस लेने की अनुमति खंडपीठ से मांगी जिसे उसने स्वीकार कर लिया।