रविशंकर प्रसाद ने भारत बंद को बताया असफल, हिंसा के कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के भारत बंद को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने असफल बताया है। बीजेपी ने कहा कि बंद के दौरान हिंसा कांग्रेस और विपक्षी दलों की असफलता का परिचायक है। बीजेपी ने हिंसा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि देश की राजनीति क्या हिंसा के जरिए होगी? बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि बंद के दौरान बिहार के जहानाबाद में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने ऐम्बुलेंस नहीं आने दिया, जिसके कारण एक दो साल की बच्ची की जान चली गई। इस मौत का जिम्मेदार कौन है? राहुल गांधी और कांग्रेस को इसपर जवाब देना चाहिए। 

उन्होंने कहा, हिंसा का तांडव और मौत का खेल बंद होना चाहिए। जनता को कुछ परेशानी है पर जनता बंद के साथ नहीं खड़ी है। हम जनता की परेशानी का समाधान निकालने की कोशिश कर रहरे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष खीझकर खौफ का माहौल पैदा कर रही है। जब जनता का समर्थन नहीं मिलता है तो उग्र प्रदर्शन कर बंद कराने की कोशिश की जा रही है। रविशंकर प्रसाद ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को जीएसटी और नोटबंदी पर संसद में बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा, मैं एक आम कार्यकर्ता हूं और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को जीएसटी और नोटबंदी पर बहस की चुनौती देता हूं। वह बड़े अर्थशास्त्री हैं। फैक्ट्स के साथ मुझसे बहस करें। वह मेरे आग्रह को स्वीकार करें।

इस बीच बीजेपी लगातार तेल की बढ़ती कीमतों पर सफाई भी दे रही है। आज एक बार फिर पार्टी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कारणों के चलते तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है। बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल के बोलने से देश को बड़ी चिंता होती है। इस बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल की बढ़ती कीमतों पर आज बीजेपी चीफ अमित शाह से मुलाकात की। 

रविशंकर ने बताया कि बीजेपी सरकार ने देश में महंगाई कम करने की कोशिश की है और इसमें सफलता भी मिली है। उन्होंने कहा, 2009-14 के बीच मुद्रास्फीति 10.4 फीसदी थी वहीं, अभी यह दर 4.7 है। सरकार ने जीएसटी और इनकम टैक्स में राहत दी है। देशहित के लिए जो भी जरूरी था वो किया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार विभिन्न योजनाओं आम जनता के हित के लिए टैक्स से प्राप्त आय को खचज़् करती है। उन्होंने कहा, राइट टू फूड और रियायती दर पर जो फूड सप्लाई में करीब एक लाख 62 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

मनरेगा मजदूरी पर करीब 7 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। नैशनल हाइवे प्रोग्राम पर भी लाखों करोड़ खर्च होता है। एक करोड़ ग्रामीण लोगों को आवास दिया, 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचाई। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 करोड़ परिवार को सालाना 5लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर देने वाले हैं। 

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