राहुल गांधी की ट्रैक्टर यात्रा

पिछले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब के शिरोमणि गायक हंसराज हंस के घर चाय के प्याले पर कै. अमरेन्द्र सिंह के साथ वह पहली मुलाकात थी तब कै. अमरेन्द्र सिंह पंजाब में चुनाव प्रचार के लिए निकले थे और इसी सिलसिले में वह जालंधर आये थे। अब के भाजपा सांसद हंसराज हंस उस समय कांग्रेस में थे। कै. अमरेन्द्र सिंह ने पंजाब चुनावों को लेकर चर्चा शुरू की तो बात जब राहुल गांधी पर आई तो कै. अमरेन्द्र सिंह सेे कहा था कि पंजाब में राहुल गांधी को जितना कम लाओगे उतना लाभ आप को होगा। यह एक ऐसा कटु सत्य था जिसे सुनकर कै. अमरेन्द्र सिंह एक क्षण चुप रहे फिर पूछा ऐसा क्यों कह रहे हैं? मेरा उत्तर था कि पंजाब में गांधी परिवार के प्रति एक नकारात्मक भावना है जिस कारण राहुल गांधी के प्रति एक बड़े वर्ग में उदासीनता है। हां, आप के प्रति आकर्षण है, क्योंकि राष्ट्रहित मामलों में आप का दृष्टिकोण स्पष्ट है और आप डटकर अकालियों विशेषतया बादल परिवार का भी सामना करते हो। कै. अमरेन्द्र सिंह थोड़ा मुस्कराए और फिर बात को दूसरी तरफ ले गए।

राहुल गांधी और गांधी परिवार को लेकर पंजाबियों के दिलो दिमाग में जो छवि है वह कोई बहुत अच्छी नहीं है। ऐसी मेरी धारणा उस समय भी थी और आज भी है। विशेषतया राहुल गांधी को पंजाबी बहुत सम्मान के साथ न तो देखते हैं और न ही उसकी कही बात को गंभीरता से लेते हैं। राहुल गांधी ने पंजाब व हरियाणा में ‘किसान बचाओ’ यात्रा के दौरान कृषि कानूनों को लेकर जो ब्यानबाजी की है उसको भी पंजाब के लोगों ने कोई गंभीरता से नहीं लिया।
राहुल गांधी के ट्रैक्टर मार्च पर आम आदमी पार्टी के महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा है कि जिस तरह पूरी पंजाब सरकार राहुल गांधी की सेवा में 24 घंटे उपस्थित है, यदि इस तरह पंजाब सरकार पंजाब और पंजाब की जनता की सेवा करते तो आज पंजाब सोने की चिडिय़ा बन जाता। पंजाब के किसी भी वर्ग को अपने हकों के लिए सडक़ों पर धरना-प्रदर्शन करने की जरूरत न पड़ती। कांग्रेस दावा कर रही है कि जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आएगी और राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे तब कृषि कानून समाप्त कर दिए जाएंगे। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें कोई भी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख सकता है। अगर एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो राहुल गांधी क्यों नहीं बन सकते। उनके पिता, दादी और परदादा प्रधानमंत्री रहे हैं। भारत में वंशवाद होता तो अब तक राहुल गांधी का सपना शायद पूरा भी हो गया होता। पर भारत में लोकतंत्र है। भारत में जिसे जनता चाहेगी वही प्रधानमंत्री बन सकता है, वैसे लोकतंत्र में कुछ भी सम्भव है।

वर्तमान स्थिति यह है कि कांग्रेस का केंद्र में सत्ता में आना और राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना मुंगेरी लाल के सपने जैसा लगता है। इसलिए अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि कांग्रेसी नेता राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनने का इंतजार करना यानी अनंतकाल का इंतजार करना है। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं को पंजाब के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और कृषि विशेषज्ञ सरदारा सिंह जोहल ने कृषि कानूनों को लेकर जो अपनी फेसबुक पर लिखा है उसे अवश्य पढ़ लेना चाहिए। डा. सरदारा सिंह जोहल ने लिखा है कि पंजाब में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की सरकार 2006 में ही एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्कीट (अमैन्डमैंट) एक्ट 2006 पास कर के प्राइवेट मंडियों का रास्ता खोल चुकी है, जबकि 2013 में पंजाब में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार ने पंजाब कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट-2013 पास किया और अब जब केंद्र सरकार ने कानून पूरे देश में लागू कर दिया तो ये दोनों राजनीतिक दल केंद्र सरकार के पीछे पड़ गए हैं। राज्य के किसानों और राजनीतिक दलों को संबोधित करते हुए सरदारा सिंह जोहल ने लिखा कि टुकड़ों में बंटे हुए किसान संगठनों, किसान भाइयों और पंजाब के राजनीतिक दलों, जिन कानूनों का आप विरोध कर रहे हो, वह तो पंजाब में पहले ही लागू हैं।

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सरदारा सिंह जोहल ने लिखा कि सरदार राजेवाल जब कहते हैं कि उन्होंने केंद्र सरकार की मीटिंग दौरान दरवाजे को कुंडी लगाकर चुनौती दी थी कि वह पंजाब में कार्पोरेट्स को घुसने नहीं देंगे, उस वक्त उन्हें यह नहीं पता था कि कार्पोरेट के लिए रास्ते तो अकाली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकार पहले ही खोल चुकी है। यदि आप इन कानूनों को किसान विरोधी समझते हो तो अब तक आपकी जुबान क्यों बंद थी। अब जब केंद्र सरकार ने आपकी नकल करके यह कानून पूरे देश में लागू कर दिया है तो आपने हाहाकार क्यों मचा रखा है? यदि इतना समय आपको डंडे खा कर कोई दर्द नहीं हुआ तो वही डंडा अब यदि दूसरों को लगा है तो आप क्यों चीख रहे हो? क्यों अब आकर रेलगाडिय़ां, सडक़ें रोक रहे हो, धरने लगा रहे हो। क्या लीडरशिप का मतलब शोर मचा कर लीडरी चमकाना और सियासी रोटियां सेंकना होता है? इसके लिए कुछ पढऩे-लिखने की जरूरत नहीं होती? यदि धरने लगाने हैं तो बादलों और अकाली-भाजपा और अमरेन्द्र सिंह-कांग्रेस के खिलाफ लगाओ। आप तो गलत बटन दबा रहे हो। मुझे अफसोस इस बात का है कि मेरे प्रोफैशनल साथी और अजीज भी इस भाव में बह गए और कोई सार्थक नेतृत्व नहीं दे सके। राहुल गांधी अपने आप को केंद्र की राजनीति में पुन: स्थापित करने के प्रयास कर रहे हैं। ‘किसान बचाओ’ रैली या ‘ट्रैक्टर रैली’ का इससे अधिक कोई उद्देश्य नहीं है। किसानों को भी राजनीतिक दलों का मोहरा बनने से बचना चाहिए तथा कृषि कानूनों को लेकर जो भी भ्रम-भ्रांतियां हैं उनको मोदी सरकार से बातचीत कर हल करना चाहिए।

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।