नकारात्मक राह पर राहुल गांधी

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी समाज में जहर घोल रहे हैं, लेकिन वह उनकी इस विभाजनकारी नीति के खिलाफ लड़ते रहेंगे। राहुल ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मोदी का प्रचार अभियान झूठ, जहर और घृणा से भरा हुआ था, जबकि कांग्रेस सच्चाई, प्यार और लगाव के साथ खड़ी थी। वायनाड लोकसभा सीट जीतने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र आए गांधी शनिवार को रोड शो के बाद कालपेटा, कमबलाडु और पनामरम में पार्टी कार्यकत्र्ताओं को संबोधित कर रहे थे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी हथियार की तरह घृणा, गुस्से और झूठ का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री द्वारा दर्शाई जाने वाली 'सबसे बुरी भावनाओं के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी केरल यात्रा के दौरान कहा कि राज्य से कोई सांसद नहीं चुने जाने के बावजूद उन्होंने अपनी पहली यात्रा के लिए केरल को चुना, क्योंकि यह भी उन्हें उत्तर प्रदेश में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जितना ही प्रिय है। उन्होंने कहा कि हालिया चुनाव ने साबित किया है कि लोगों ने नकारात्मकता को खारिज और सकारात्मकता को स्वीकार किया है। चुनावों में पराजय के बाद मोदी को फिर से घेरने के प्रयास के रूप में राहुल गांधी का यह ब्यान आया है। राहुल ने मोदी और भाजपा पर देश में 'घृणा और असहिष्णुता फैलाने के आरोप लगाए। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सिर्फ चुनावी राजनीति के लिए काम नहीं करती, बल्कि वह देश निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत को उसका गौरवपूर्ण स्थान मिले। 

लोकसभा चुनावों के दौरान भी राहुल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर चौकीदार चोर है का नारा दिया था। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय से राहुल गांधी ने माफी भी मांगी लेकिन इसके बाद भी वह अप्रत्यक्ष रूप से अपनी बात कहते रहे। चुनावों के दौरान राहुल गांधी के हावभाव और राजनीतिक अपरिपक्वता को देखते हुए ही देश इस नतीजे पर पहुंचा कि राहुल गांधी अभी नरेन्द्र मोदी का विकल्प नहीं बन सके हैं। राहुल के मुकाबले मोदी कहीं अधिक परिपक्व हैं, यह बात लोकसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दी है। चुनाव परिणामों को देखते हुए आशा की जाती थी कि राहुल गांधी अपनी रीति-नीति पर मंथन कर उसका सकारात्मक पक्ष मजबूत करेंगे, लेकिन वायनाड में राहुल ने जो कहा है उससे स्पष्ट है कि वे अभी भी जमीनी सच्चाई को समझने से असफल हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूल रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी ने जो कहा व किया भी है। यही कारण है कि लोकसभा चुनावों में मतदाता ने जाति, क्षेत्र और सम्प्रदाय की भावना से ऊपर उठकर भाजपा को अपना मत दिया। कांग्रेस अभी भी 'बांटो और राज करोÓ की अपनी पुरानी नीति पर चलती दिख रही है। राहुल गांधी का वायनाड से जीतना और अमेठी से हारना बताता है कि कांग्रेस तृष्टिकरण की राह पर ही चल रही है।
मोदी और शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति को आधार बनाकर जहां देश से बहुमत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करने में सफलता हासिल की वहीं राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का संदेश भी मतदाता के घर-आंगन पहुंचा दिया। राहुल गांधी अभी भी आजादी के पहले वाली कांग्रेस का गुणगान करते हुए धर्मनिरपेक्षता की बात तो करते हैं, लेकिन उनकी बात को जनता अब गंभीरता से इसलिए नहीं ले रही क्योंकि तुष्टिकरण की नीति के दुष्परिणामों को वह झेल चुकी है। वायनाड में मिली विजय भी दर्शाती है कि राहुल गांधी अब भी तुष्टिकरण की राह पर चलने में अपना व कांग्रेस का हित देख रहे हैं।

देश की राजनीति में नरेन्द्र मोदी एक सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल रहे हैं। देश मोदी को गंभीरता से ले रहा है और आशा भरी नजरों से देख रहा है। 2019 लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली विजय ने दर्शा दिया है कि मतदाता अब नकारात्मक राजनीति नहीं चाहता और न ही जाति, साम्प्रदायों और धर्म के नाम पर मतदान करना चाहता है। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को नकारात्मक राह छोडऩी होगी। अन्यथा वह देश की राजनीति में अपनी छाप छोडऩे में असफल रहेंगे।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।