राहुल गांधी के तर्क

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने जर्मनी और इंग्लैंड में जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार व भाजपा पर तीखे हमले किए वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। राहुल गांधी ने भाजपा और संघ पर आरोप लगाया कि यह दोनों संगठन मिलकर जहां समाज को बांटने का काम कर रहे हैं वहीं संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बना उनको कमजोर कर रहे हैं। अपने आरोपों में वजन डालने के लिए राहुल तर्क देते हैं कि संघ आतंकवादी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड और इस्लामिक स्टेट की तरह कार्य कर रहा है।

मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए राहुल गांधी तर्क देते हैं कि मोदी लम्बे-लम्बे भाषण दे नफरत फैला रहे हैं तथा विरोधी विचारों को दबाने की कोशिश की जा रही है। लंदन में तर्क देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश ने सत्ता के विकेंद्रीकरण के कारण सफलता हासिल की है लेकिन पिछले चार वर्षों में स्थिति बदल गई और इस दौरान बड़े पैमाने पर सत्ता का केंद्रीकरण हुआ है जिसके कारण भारत कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सवा अरब से ज्यादा की आबादी में भेदभाव पैदा नहीं किया जाना चाहिए और यदि ऐसा करने का प्रयास किया गया तो भारत की ताकत कम हो जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा 'आज मैं भारत को अपनी ताकत बढ़ाते नहीं देख पा रहा हूं। मौजूदा सरकार के बारे में मेरी मुख्य शिकायतों में से एक यह है कि मुझे भारत की ताकत के अनुरूप कोई सुसंगत रणनीति नहीं दिख रही है। मुझे केवल तात्कालिक प्रतिक्रियाएं दिखती हैं।' उन्होंने नोटबंदी को लेकर भी मोदी सरकार पर तीखा हमला किया और कहा 'नोटबंदी का विचार वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक को नजरअंदाज़ करके, सीधे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से आया और प्रधानमंत्री के दिमाग में बैठा दिया गया।' श्री गांधी ने चीन का जिक्र करते हुए कहा कि चीन आगे बढ़ रहा है और इसके परिणाम दुनिया के सामने हैं। इस स्थिति में भारत दुनिया में संतुलन की भूमिका निभा सकता है और विश्व को सुरक्षित जगह बनाने में अहम योगदान दे सकता है।

इससे पहले जर्मनी में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि देश में बढ़ती बेरोजगारी की वजह से भारतीय समाज में उपजे गुस्से के कारण देश में भीड़ द्वारा दलितों और अल्पसंख्यकों पर हमले और पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार देश के गरीबों को दी गई सुरक्षा खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर खराब तरीके से अमल किया जिसकी वजह से छोटे और मझोले कारोबार चौपट हो गए और लोगों की नौकरियां खत्म हो गईं जिसकी वजह से गुस्सा बढ़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इराक और सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के उभार की मिसाल देते हुए कहा कि विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखने से दुनिया में कहीं भी आतंकवादी संगठन पैदा हो सकता है। राहुल ने अपने भाषण में भारत के गांवों में निचली जाति के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, खाद्य सुरक्षा अधिकार, वन अधिकार कानून जैसे संरक्षणों की वजह से देश के गांवों में बदलाव लाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इन उपायों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां बढ़ीें। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन योजनाओं को कमजोर बनाया है और अब पैसे कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों के हाथ में जा रहा है। राहुल ने कहा वे (भाजपा सरकार) महसूस करते हैं कि आदिवासी, गरीब किसानों, निचली जाति के लोगों और अल्पंसख्यकों को अमीरों के समान लाभ नहीं मिलना चाहिए। एकमात्र नुकसान उन्होंने नहीं किया है। उससे कहीं अधिक कुछ खतरनाक बातें हैं। उन्होंने भारत की मौजूदा सरकार पर उनसे ये सुरक्षा छीनने का आरोप लगाया जिससे लोगों में गुस्सा पैदा हो रहा है। राहुल ने आगाह किया कि अगर विकास की प्रक्रिया से आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को बाहर रखा गया तो यह खतरनाक होगा। उन्होंने कहा अगर 21वीं सदी में आप लोगों को नजरिया नहीं देते हैं तो कोई और देगा।

कांग्रेस अध्यक्ष जो कह रहे हैं वह सत्य से काफी दूर हैं। संघ को इस्लामिक स्टेट व मुस्लिम संगठन ब्रदरहुड के साथ मिलाना तो राहुल की राजनीतिक अपरिपक्वता ही कही जा सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष जो कह रहे और जो तर्क दे रहे हैं वह उनके लिए तथा उनकी पार्टी कांग्रेस के लिए आत्मघाती ही हैं। जिन समस्याओं का जिक्र वह कर रहे हैं वह तो देश में तब भी विराजमान थी जब उनके पिता, उनकी दादी या दादी के पिता पं. जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। मोदी सरकार को विरासत में जो भी मिला है वह नेहरू-गांधी परिवार की ही देन है। मोदी सरकार तो पटरी से उतरी व्यवस्था को ही पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है। मोदी सरकार जो कदम चाहे वह राजनीतिक स्तर पर हो या आर्थिक व सामाजिक वह देश के संविधान के दायरे में ही रहकर कर रही है। 

संघ के प्रति जो नजरिया राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी का है उसे शायद बदलना मुश्किल है लेकिन धरातल का सत्य यही है कि देश के तीनों प्रमुख संविधानिक पदों पर आज जो लोग बैठे हैं वह संघ की विचारधारा वाले ही हैं। देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री सहित भाजपा के सभी सांसद संघ परिवार की भूमिका से ही हैं। संघ शायद विश्व का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन है जो देश व समाज के विकास व उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। 'सबका साथ व सबका विकास' का जो नारा मोदी सरकार ने दिया है वह भारतीय संस्कृति की ही देन है। गुरु नानक देव ने भी 'सरबत के भले' की बात कहकर भारतीय संस्कृति को ही आगे बढ़ाया था। देश का संविधान सभी भारतीयों की बात करता है और संविधान की शपथ लेकर जो सरकार सत्ता में आती है वह एक जाति, धर्म, क्षेत्र व समुदाय की नहीं होती, वह भारतीयों की ही होती है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो तर्क दे रहे हैं उस पर उनको व उनके सहयोगियों को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने की आवश्यकता है, क्योंकि राहुल गांधी आत्मघाती राह पर चले हैं। अगर न रोका गया तो वह स्वयं तो डूबेंगे ही कांग्रेस पार्टी को भी ले डूबेंगे।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।