राहुल गांधी का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार को आधार बनाकर मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से तथ्य छिपाया पर अब वह जनता की अदालत में नहीं बच सकते। राहुल उपरोक्त आरोप राफेल विमान खरीदने के मामले में लगा रहे थे। कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने कहा कि हम यह एक साल से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री राफेल घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं। अखबार की रिपोर्ट से साफ है कि प्रधानमंत्री फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत कर रहे थे। मैं देश के युवाओं और रक्षा बलों से कहना चाहता है कि अब स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री ने प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए आपके 30,000 करोड़ रुपए चुराए और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिए। इसकी जांच होनी चाहिए। राहुल ने कहा कि पहले फ्रांस्वा ओलांद (फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति) ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बोला था कि अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपए का अनुबंध दिया जाए। अब रक्षा मंत्रालय कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने चोरी की है, पूरा मामला एकदम स्पष्ट है।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी द्वारा लगाए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अधिकारियों की फाइल नोटिंग पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के जवाब को नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने इस मुद्दे को चुनिंदा तरीके से उठाए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पर्रिकर ने एक नोट में अधिकारियों से शांत रहने को कहा था क्योंकि हर चीज सही थी।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनावों का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे पक्ष और विपक्ष का एक-दूसरे विरुद्ध आरोपों-प्रत्यारोपों का खेल तेज होता जा रहा है। जहां तक कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे आरोप की बात है उसके साथ-साथ करीब-करीब विपक्षी नेताओं तथा दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का जवाब बड़े स्पष्ट ढंग और ठोस तरीके से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में पिछले दिनों दिया है। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के सत्ताभोग के 55 साल और हमारे सेवाभाव के 55 महीने हैं। प्रधानमंत्री ने चुटकी लेते हुए कांग्रेस को कहा कि आप इतनी तैयारी करें कि 2023 में फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़े। उन्होंने कहा कि हमारे पास समर्पण भाव है इसलिए दो सीटों से यहां तक पहुंच गए और अभिमान के कारण आप (कांग्रेस) 44 रह गए। मोदी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह चुनावी वर्ष है, इसलिए हर किसी की कुछ न कुछ बोलने की मजबूरी भी है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि यहां से हमें जनता के बीच जाकर अपने काम का हिसाब देना होता है। मैं आप सभी को चुनावी मैदान में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने आगामी लोकसभा चुनावों में नई पीढ़ी, खासकर पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवा मतदाताओं की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इस चुनाव में युवा पीढ़ी राष्ट्र को नई दिशा देने में मददगार साबित होगी। उन्होंने सरकार की राह में आ रही बाधाओं के बावजूद विकास के मार्ग पर देश के अग्रसर होने का दावा करते हुए कहा कि चुनौतियों को चुनौती देना जिस देश का स्वभाव होता है वहीं देश आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के 55 साल और अपने 55 महीने की तुलना करते हुए कहा कि यूपीए के कार्यकाल में भारत जीडीपी के आधार पर 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और आज देश छठे पायदान पर आ गया है। उन्होंने कहा कि स्टील उत्पादन, दूध उत्पादन में अव्वल और मोबाइल फोन निर्माण में भारत आज दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और भाजपा की आलोचना करना ठीक है। लेकिन ऐसा करते हुए देश की बुराई करना ठीक नहीं है। हमें यह सोचना होगा कि लंदन में प्रेस कान्फ्रेंस कर झूठ बोलना कितना अच्छा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर सच सुनने की आदत खत्म होने का आरोप लगाते हुए कहा, उल्टा चोर चौकीदार को डांटे। जिन्होंने आपातकाल लगाया हो, योजना आयोग को जोकरों का समूह कहा हो, देश के मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग की साजिश रच कर न्यायपालिका को धमकाने की कोशिश की हो, राज्यों में चुनी हुई कई सरकारों को बर्खास्त किया हो, वे हम पर संस्थाओं को तोडऩे का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा यूपीए शासनकाल में कैबिनेट के एक फैसले से संबंधित दस्तावेज को फाड़े जाने की विगत में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिखाता है कि कांग्रेस हमारी संस्थाओं का कितना सम्मान करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें डरना ही होगा। ऐसे लोगों से लडऩे के लिए जिन्दगी खपाई है।

सत्य क्या है और जनता किस की दलीलों से संतुष्ट है उसका पता तो आने वाले लोकसभा चुनाव परिणामों से ही चलेगा। लेकिन अभी तो जनता के दरबार में जाने की तैयारी कर रहे सभी दल एक-दूसरे पर आरोप लगाने के सिवा ओर कुछ करते दिखाई नहीं दे रहे। नकारात्मक खेल का परिणाम सकारात्मक आये यह तो भारत के मतदाता की सूझबूझ पर ही निर्भर है। इतिहास गवाह है कि भारत के मतदाता ने हमेशा समय और परिस्थितियों को समझते हुए देशहित में ही निर्णय लिया है, अब की बार भी ऐसा ही होगा।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।