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Punjab Elections: दिल्ली हिंसा के आरोपी लक्खा सिधाना को किसान संगठन ने दिया टिकट- मौड़ से लड़ेंगे चुनाव

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्रीय पार्टी 'संयुक्त समाज मोर्चा' ने अपने उम्मीदवारों के नाम की लिस्ट जारी की है। अपनी इस सूची में पार्टी ने

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्रीय पार्टी 'संयुक्त समाज मोर्चा' ने अपने उम्मीदवारों के नाम की लिस्ट जारी की है। अपनी इस सूची में पार्टी ने 'गणतंत्र दिवस 2021 हिंसा' के मुख्य आरोपी लक्खा सिधाना को टिकट दिया है। लक्खा सिधाना को मौड़ निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी अखाड़े में उतारा जा रहा है। बता दें सिधाना इस समय फरार चल रहा है, उसके खिलाफ दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमले सहित कई मामले दर्ज हैं।

26 जनवरी को हिंसा भड़काने के मुख्य आरोपी लक्खा सिधाना पुलिस द्वारा दंगाइयों पर नकेल कसने के बाद से फरार है। सोशल मीडिया पर अपने वीडियो पोस्ट के जरिए उसने किसानों को कृषि आंदोलन के खिलाफ आंदोलन तेज करने के लिए कथित तौर पर उकसाया था। जिसे लेकर पुलिस ने लक्खा सिधाना पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा है।
 भटिंडा में एक रैली को खुले तौर पर संबोधित करने के बाद सिधाना ने दिल्ली पुलिस को चुनौती दी कि वह उसे गिरफ्तार करने के लिए जो कुछ भी कर सकता है वह करे। गणतंत्र दिवस की हिंसा के अलावा उसके खिलाफ पंजाब में कई मामले दर्ज हैं। सिधाना 2012 के राज्य विधानसभा चुनाव में पहले भी किस्मत आजमा चुके हैं, हालांकि वो भी असफल रहे थे।

इसके अलावा कृषि कानून के किसान आंदोलन में हिस्सा लेने वाले पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों ने पंजाब चुनाव लड़ने के लिए अपना राजनीतिक मोर्चा शुरू किया है। बलबीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व वाला संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) किसान नेता गुरनाम सिंह चादुनी के नेतृत्व वाली संयुक्त संघर्ष पार्टी (एसएसपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। पंजाब में एक ही चरण में 20 फरवरी को मतदान होगा। 10 मार्च को वोटों की गिनती होगी। 

पिछले साल 2021 में तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हो गई है। वहीं, कई प्रदर्शकारी किसी एक खास समुदाय का झण्डा लहराते हुए राष्ट्रीय राजधानी में स्थित लाल किले के परिसर में घुस गए थे। प्रदर्शनकारियों द्वारा लाल किले की प्राचीर को तोड़ने, ट्रैक्टरों से उसके फाटकों को नीचे गिराने और मंचों के ऊपर अपना धार्मिक झंडा लगाने के बाद अराजकता चरम पर पहुंच गई। जिसे लेकर सैंकड़ों प्रदर्शकरियों को हिरासत में लिया गया था। 
 

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