आपातकाल की बरसी पर बोले प्रधानमंत्री मोदी, बर्बर यातनाएं सहन करने वाले सेनानियों को कभी नहीं भूलेगा देश

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): देश में आपातकाल लागू होने के 45 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सेनानियों को याद किया जिन्होंने भारी यातनाओं को सहन कर इसका विरोध किया था। पीएम मोदी ने कहा कि आज से ठीक 45 वर्ष पहले देश पर आपातकाल थोपा गया था। उस समय भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, यातनाएं झेलीं, उन सबको मेरा शत-शत नमन! उनका त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा। बता दें कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल का ऐलान किया गया था। 
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'जब आपातकाल लगाया गया तो उसका विरोध सिर्फ राजनैतिक नहीं रहा। जेल के सलाखों तक आंदोलन सिमट नहीं गया था। जन-जन के मन में आक्रोश था। खोए हुए लोकतंत्र की तड़प थी। भूख का पता नहीं था। सामान्य जीवन में लोकतंत्र का क्या वजूद है, वह तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लेता है।'

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आपाताकल में देश के सभी लोगों को लगने लगा कि उनका कुछ छीन लिया गया है, जिसका उन्होंने उपयोग नहीं किया, वह छीन गया तो उसका दर्द था। भारत गर्व से कह सकता है कि कानून-नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार है। लोकतंत्र हमारी संस्कृति है, विरासत है. उस विरासत को लेकर हम पले-बढ़े हैं।'
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वहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, '25 जून 1975 को पीएम इंदिरा गांधी की अगुवाई में कांग्रेस सरकार द्वार इमरजेंसी लगाई गई थी। लोक नायक जय प्रकाश नारायण, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर और भारत के लाखों लोगों सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया।' आपातकाल के दिनों को याद करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, ' भारत के लोगों ने 1977 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ बड़े पैमाने पर मतदान किया और यहां तक कि इंदिरा गांधी भी हार गईं और पहली गैर-कांग्रेसी सरकार केंद्र में सत्ता में आई। मैं भाग्यशाली था कि बिहार से जेपी आंदोलन के एक कार्यकर्ता के रूप में मैंने आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ी।'