फलों व पुष्पों की जलवायु अनुरूप किस्में तैयार करें वैज्ञानिक

12:48 PM Feb 19, 2020 |

सोलन (प्रताप भारद्वाज): शक्ति, बागवानी एवं सैनिक कल्याण मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कृषि एवं बागवानी वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे फलों एवं पुष्पों की ऐसी किस्में तैयार करें जो हिमाचल की जलवायु के अनुरूप हों और कीटरोधी हों। महेन्द्र सिंह ठाकुर आज डा. यशवन्त सिंह परमार, बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन में ‘प्रेक्टिसिस ऑफ पैकेजिज फॉर फ्रूट एंड ओर्नामेंटल क्रॉप्स’ विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ करने के उपरान्त उपस्थित वैज्ञानिकों एवं बागवानी विभाग के अधिकारियों एवं अन्य को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इससे पूर्व विश्वविद्यालय में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित पुष्प खेती की क्षेत्रीय प्रयोगशाला एवं विक्रय केन्द्र का लोकार्पण भी किया। महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि वैश्विक उष्मता के कारण खेती एवं बागवानी पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है और इस कारण वैज्ञानिकों का कार्य भी बढ़ गया है।

उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान के माध्यम से किसानों एवं बागवानों की समस्याओं का समाधान उनके खेत एवं बागीचे में करें। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को फलदार पौधों की ऐसी सदाबहार किस्में तैयार करनी चाहिएं जो ऊष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों के लिए सर्वथा अनुकूल हों। उन्होंने वैज्ञनिकों से सेब की भी ऐसी किस्में तैयार करने का आग्रह किया जो प्रदेश की जलवायु के अनुकूल एवं दीर्घ अवधि में लाभदायक हों। बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने उपस्थित सभी बागवानी अधिकारियों से आग्रह किया कि क्षेत्रीय स्तर से कोई भी शिकायत आती है तो अधिकारी स्वयं उस स्थान पर जा कर समस्या का निपटारा करें और लघु एवं सीमान्त किसानों की समस्याओं को समयबद्ध निपटाएं।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविन्द्र कौशल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्याधाला 07 वर्ष की अवधि के उपरान्त आयोजित की जा रही है। उन्होने अनुसंधान गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी की। बागवानी विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य उद्यान एवं वाणिकी के क्षेत्र में नए शोध करना तथा इस विषय में किसान-बागवानों को जागरूक करना है ताकि किसान- बागवानों नई किस्मों को अपनाकर लाभान्वित हो सकें। इस कार्यशाला में निदेशक अनुसंधान जे एन शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा राकेश गुप्ता सहित बागवानी विभाग के अधिकारी  एवं अन्य उपस्थित थे।