पोवेग्लिया आइलैंड यहां लाखों लोगों को जिंदा जला दिया गया था, जानिए क्यों 

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : वह टापू यानी द्वीप शापित है। वहां जो भी जाता है उसकी मौत हो जाती है। जाने वाला कभी लौटता नहीं है। इस तरह की बातें इटली के पोवेग्लिया आइलौंड के बारे में बताया जाता है। परंतु सच्चाई किसी को पता नहीं। सच पूछिए तो यह द्वीप दुनिया के बेहद खूबसूरत द्वीपों में से एक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां बुरी आत्माओं का बास है लेकिन जब आप इतिहास को कुरेदेंगे तो इस सुंदर द्वीप के बारे में आपको कुछ और ही पता चलेगा। इसके रहस्य पर से भी पर्दा हट जाएगा। 

वैसे तो ये है मौत का आइलैंड लेकिन यहां क्यों नहीं लोग जाते या रहते हैं। इसके बारे में इसका इतिहास की सबकुछ बता देता है। इटली सरकार के द्वारा इस द्वीप को प्रतिबंधित कर दिया गया है लेकिन प्रतिबंध के बाद भी यहां लोग जाते हैं। इटली सरकार का कहना है कि प्रतिबंधित होने के बाद भी अगर कोई शख्स आइलैंड पर जाता है, तो वह उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी। आपको बता दें कि जो लोग वहां गए हैं उसमें से कुछ लोगों के बारे में सचमुच आजतक कोई जानकारी नहीं मिल पायी।

इस आइलैंड के बारे में कहा जाता है कि यहां जाने वाला इंसान कभी वापस नहीं लौटता। इटली के इस आइलैंड का नाम है पोवेग्लिया आइलैंड यानी मौत का आइलैंड है। इस टापू को आइलैंड ऑफ डेथ कहा जाता है। ये आइलैंड इटली के शहर वेनिस और लिडो के बीच वेनेशियन खाड़ी में स्थित है। इस आइलैंड के बारे में कहा जाता है कि यहां जाने वाला इंसान कभी वापस नहीं लौटता लेकिन कई लोग वापस लौट कर आए हैं। हालांकि उन्होंने द्वीप के रहस्य के बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताया। 

कहा जाता है कभी ये मौत का टापू अपनी सुन्दरता के लिए मशहूर था पर आज वीरान है। इस द्वीप के बारे में एक खास बात यह है कि काफी साल पहले इटली में प्लेग की बीमारी ने महाविनाश मचाया और भारी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए। जब सरकार इस बीमारी पर काबू नहीं पा सकी तो करीब 1 लाख 60 हजार मरीजों को इस टापू पर लाकर जिन्दा आग के हवाले कर दिया गया। लोगों का मानना है, जो भी यहां जाता है जिंदा वापस नहीं लौटता। 

कहा जाता है कभी ये मौत का टापू अपनी सुन्दरता के लिए मशहूर था पर आज वीरान है। काफी साल पहले इटली में प्लेग की बीमारी ने महाविनाश मचाया और भारी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए। जब सरकार इस बीमारी पर काबू नहीं पा सकी तो करीब 1 लाख 60 हजार मरीजों को इस टापू पर लाकर जिन्दा आग के हवाले कर दिया गया। 

यही नहीं इस विनाशकारी बिमारी के बाद इटली में काला बुखार का दौर प्रारंभ हुआ। सरकार इस बीमारी पर भी काबू पाने में नाकाम रही। उस बिमारी के भी लाइलाज होने की वजह से जो मौतें हुई। उन लाशों को भी इस मौत का टापू पर लाकर दफऩ कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद इस टापू के आसपास के लोगों को इस टापू पर अजीबोगरीब आवाजों और आत्माओं के होने का आभास हुआ और इस टापू पर लोगों ने जाना बंद कर दिया। 

इटली की सरकार ने एक मेंटल हॉस्पिटल बनाकर यहां पर लोगों की आवाजाही बढ़ानी चाही लेकिन वहां नौकरी करने वाले डॉक्टर्स और नर्सो को आत्माओं का आभास होने लगा। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें मौत के इस टापू में तरह-तरह की असामान्य चीजें नजर आती है जिनसे खतरनाक आवाज निकलती है। कई बार मरीजों के परिजनों ने भी आत्माओं के दिखने की बात कही। इटली की सरकार ने एक मेंटल हॉस्पिटल बनाकर यहां पर लोगों की आवाजाही बढ़ानी चाही लेकिन वहां नौकरी करने वाले डॉक्टर्स और नर्सो को आत्माओं का आभास होने लगा। 

डॉक्टरों के अनुसार उन्हें मौत के इस टापू में तरह-तरह की असामान्य चीजें नजर आती है जिनसे खतरनाक आवाज निकलती है। कई बार मरीजों के परिजनों ने भी आत्माओं के दिखने की बात कही। इटली की सरकार ने एक मेंटल हॉस्पिटल बनाकर यहां पर लोगों की आवाजाही बढ़ानी चाही लेकिन वहां नौकरी करने वाले डॉक्टर्स और नसोज़् को आत्माओं का आभास होने लगा। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें मौत के इस टापू में तरह-तरह की असामान्य चीजें नजर आती है जिनसे खतरनाक आवाज निकलती है। कई बार मरीजों के परिजनों ने भी आत्माओं के दिखने की बात कही।


 

Related Stories: