प्रदूषण संकट

देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के लिए केंद्र व दिल्ली दोनों सरकार चिंतित दिखाई दे रही हैं। लेकिन सरकारों से भी अधिक चिंतित दिल्ली का जन साधारण है क्योंकि उसको तो सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली एनसीआर की हवा सांस लेने लायक भी नहीं रही है। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में हवा की स्थिति बहुत खराब पाई गई है। गुरुग्राम में वायु प्रदूषण की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। जानकारों का कहना है कि ऐसी हवा फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने लगती है। मामला सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रह गया है। उत्तर प्रदेश के आगरा, बागपत, मुजफ्फरनगर, कानपुर, हापुड़, राजस्थान के जोधपुर, जयपुर, बिहार की राजधानी पटना में भी हवा की गुणवत्ता खराब पाई गई। इनके अलावा अमृतसर, पटियाला, मुंबई, लुधियाना, हैदराबाद में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में एक माह के दौरान हवा पहले से 11 गुना ज्यादा जहरीली हुई है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि दिल्ली ही नहीं उसके साथ लगते क्षेत्र और राज्यों की हवा भी प्रदूषित होती चली जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली में प्रदूषित होती हवा के लिए सीधे-सीधे पंजाब को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चंडीगढ़ में केजरीवाल ने सैटेलाइट से जारी एक तस्वीर को दिखाते हुए कहा है कि इस तस्वीर में आप लाल निशान देख सकते हैं, जिससे पता चलता है कि बठिंडा, अमृतसर समेत पंजाब के अधिकतर हिस्सों में पराली जलाई जा रही है। इसमें हरियाणा के एक छोटे हिस्से में भी लाल निशान है, लेकिन इसकी भूमिका सीमित है। उन्होंने हरियाणा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस बार यहां पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। केजरीवाल ने कहा कि ये गंभीर मुद्दा है। सिर्फ बयानबाजी के बजाए वैज्ञानिकों तथ्यों पर बात करते हुए इस समस्या से निपटने का प्रयास पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को करना होगा। हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों से सवाल दागते हुए केजरीवाल ने कहा कि हम पिछले एक साल से दिल्ली के प्रदूषण पर काम कर रहे हैं। सालभर प्रदूषण का स्तर 150 से 200 प्वाइंट के बीच रहता है, लेकिन अचानक 25 अक्तूबर के बाद प्रदूषण का स्तर 400 प्वाइंट तक छूने लगता है और 20 नवंबर तक ऐसे ही हालात रहते हैं। केजरीवाल ने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री ये बता दें कि आखिरकार इन दिनों में दिल्ली में ऐसा क्या हो जाता है कि प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रदूषण ट्रैफिक या उद्योगों का नहीं, बल्कि इस दौरान जलने वाली इस पराली का होता है। 

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. सतविंदर सिंह मरवाहा ने केजरीवाल द्वारा लगाए आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि पिछले दस दिनों से हवा का बहाव दो किलोमीटर प्रति घंटा से भी कम है। हवा का रुख राजस्थान की ओर से है, तो पंजाब का प्रदूषण दिल्ली को कैसे प्रभावित कर सकता है। प्रो. मरवाहा कहते हैं कि प्रदूषण के दो कारक हो सकते हैं। हवा की गति व हवा की दिशा। केजरीवाल कह रहे हैं कि पंजाब का प्रदूषण दिल्ली को प्रभावित कर रहा है। अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो अभी हवा का बहाव दक्षिण-पश्चिम की तरफ है। ऐसे में पंजाब का प्रदूषण राजस्थान को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि अगर आरोपों को मान भी लिया जाए तो पंजाब का एयर क्वालिटी इंडेक्स 164 है, जबकि दिल्ली का इंडेक्स 400 है। पंजाब का प्रदूषण सबसे पहले पंजाब को प्रभावित करेगा न कि दिल्ली को। अत: आरोप-प्रत्यारोप करने से पहले वैज्ञानिक कारणों को जरूर देख लेना चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि पंजाब में एयर क्वालिटी चेक करने के पांच सेंटर काम कर रहे हैं। मंडी गोबिंदगढ़ का इंडेक्स 130, लुधियाना 185, जालंधर 212, अमृतसर 139 और खन्ना 190 है। इसका औसत 164 बनता है, जबकि दिल्ली का प्रदूषण स्तर 400 से अधिक है। यही नहीं महत्वपूर्ण यह है कि पिछले साल के मुकाबले पंजाब में पराली जलाने की घटना में 35 से 40 फीसद से भी ज्यादा की कमी आई है। प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। इसमें ब्लेम गेम में पडऩे की बजाय इसका साइंटिफिक हल निकाला जाना चाहिए। ऐसे लोगों को गुमराह करना उचित नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में घरेलू और आम वायु प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव से 15 साल से कम उम्र के तकरीबन छह लाख बच्चों की मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाना पकाने से घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण और घर के बाहर के वायु प्रदूषण से दुनिया भर में भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में बच्चों के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा है। डब्ल्यूएचओ ने अपने अध्ययन में कहा, दुनिया भर में निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 फीसद बच्चे डब्लूएचओ वायु गुणवत्ता मार्ग-निर्देश के सामान्य स्तर के ऊपर के स्तर पर पीएम 2.5 से रूबरू हो रहे हैं जबकि उच्च आय वर्ग के देशों में 52 फीसद बच्चे डब्लूएचओ वायु गुणवत्ता मार्ग-निर्देश के सामान्य स्तर से ऊपर के स्तर पर पीएम 2.5 से रूबरू हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया, वैश्विक स्तर पर, दुनिया भर के 18 साल से कम उम्र के 98 फीसद बच्चे डब्लूएचओ वायु गुणवत्ता मार्ग-निर्देश के सामान्य स्तर से ऊपर के स्तर पर घर से बाहर पीएम 2.5 से रूबरू हो रहे हैं। इनमें पांच साल की उम्र के 63 करोड़ बच्चे और 15 साल से कम उम्र के 1.8 अरब बच्चे हैं। पीएम 2.5 स्वास्थ्य के लिए पीएम 19 से ज्यादा खतरनाक हैं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि देश व दुनिया वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारों, संगठनों तथा जन साधारण को अपने-अपने स्तर पर प्रदूषित होती वायु को स्वच्छ व साफ रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। मात्र एक-दूसरे पर आरोप लगाकर अपनी-अपनी जिम्मेवारी से भाग तो नहीं सकते। हवा का प्रदूषित होना हमारे वर्तमान पर ही नहीं भविष्य पर भी बुरा प्रभाव डाल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी आंकड़े यही तो बता रहे हैं। केजरीवाल पंजाब को जिस तरह कटघरे में खड़ा कर रहे हैं उनका लक्ष्य पंजाब की आप ईकाई में बागी विधायकों को क्षति पहुंचाना भी हो सकता है। अगर ऐसा है तो यह भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि वायु प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर हो रही राजनीति देश की राजनीति के प्रदूषण को भी दर्शाती है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।