बसों पर सियासत

लॉकडाउन के कारण सडक़ों पर फंसे मजदूरों को घर पहुंचाने हेतु कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर कहा था कि पार्टी 1000 बसों से सडक़ों पर फंसे मजदूरों को घर पहुंचाना चाहती है, इसकी इजाजत दी जाए। प्रियंका के दावे अनुसार उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर बसें खड़ी रहीं लेकिन प्रदेश सरकार से इजाजत न मिलने के कारण अब वापस जा रही हैं। राजस्थान से लाई गई बसों में से लगभग पांच सौ के करीब आगरा-भरतपुर सीमा पर ऊंचा नगला में खड़ा किया गया था। इसी तरह कई और जगहों पर बसें खड़ी की गई थीं। जबकि, उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने 1000 से अधिक बसों का जो विवरण मुहैया कराया है, उनमें कुछ दोपहिया वाहन, एंबुलेस और कार के नंबर भी हैं। इस पर कांग्रेस ने कहा कि उसकी ओर से मुहैया कराई गई सूची में, उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद 879 बसों के सही होने की पुष्टि की है और उसे अब इन बसों को चलाने की अनुमति देनी चाहिए। लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद बसें लौटा दी गईं।

प्रियंका ने वीडियो लिंक के माध्यम से एक बयान में कहा, हम सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी। ये श्रमिक भारत की रीढ़ हैं। उन्होंने भारत को बनाया है। हम सभी को इनकी मदद करनी चाहिए... यह राजनीति करने का समय नहीं है। हर राजनीतिक दल अपने पूर्वाग्रहों को उठ कर लोगों की मदद में सेवाभाव के साथ शामिल हो। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हुए संवाद का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, कुछ समय से हम कह रहे थे कि यूपी रोडवेज की बसें प्रवासी श्रमिकों के लिए उपलब्ध करा दीजिए। जब कई हादसे हुए और हमने देखा कि यूपी रोडवेज की बसें नहीं चलाई जा रही, तो हमने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी कि हम एक हजार बसें चला सकते हैं। उन्होंने कहा, चार बजे तक अगर आपको उनका इस्तेमाल करना है तो करिए। अगर आपको भाजपा के झंडे और स्टीकर लगाने हैं तो वह भी लगाइए। अगर आपको इस्तेमाल नहीं करना है तो मत करिए, हम बसों को वापस भेज देंगे। हम जैसे लोगों की मदद करते रहे हैं, वैसे आगे भी करते रहेंगे। प्रियंका ने कहा कि अगर राजनीतिक गतिरोध का सिलसिला नहीं चलता तो अब तक हजारों मजदूर इन बसों से अपने घर जा चुके होते। इस अपील के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं देख उन्होंने बसें लौटाने का निर्देश दे दिया।

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि इस कठिन समय में कांग्रेस जिस तरह की राजनीति कर रही है, ऐसा कभी किसी बड़े दल ने नहीं किया। पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा कांग्रेस के पास कोई बस नहीं है। ये सारी बसें राजस्थान सरकार की हैं, जब कांग्रेस द्वारा दी गयी बसों की सूची का विश्लेषण किया गया तो करीब 460 बसें फर्जी हैं। उन्होंने कहा पहले उन्होंने बसों की सूची दी, ये बसें राजस्थान सरकार की थीं, इनमें से करीब आधी 460 बसें फर्जी पायी गयीं, करीब 297 बसें कबाड़ मिलीं जो चलने लायक नहीं थीं। क्या हम अनफिट बसों को सडक़ पर चलाकर मजदूरों की जिंदगी खतरे में डाल दें ? सूची में 98 तीन पहिया वाहन, कार और एंबुलेंस के नंबर पाए गए, जबकि 68 वाहनों के कागज सही नहीं थे।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को कटघरे में खड़ा करती हुई नवांशहर के कांग्रेस विधायक अंगद सिंह की पत्नी व यूपी के रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने कहा कि आपदा में ऐसी निम्न सियासत की क्या जरूरत है, 1000 बसों की सूची भेजी। उसमें आधी से ज्यादा बसों का फर्जीवाड़ा। 297 कबाड़ बसें, 98 ऑटो रिक्शा और एम्बुलेेंस जैसी गाडिय़ां, ये कैसा क्रूर मजाक है ? अगर बसें थीं तो राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र में क्यों नहीं लगाई गईं। अदिति ने दूसरी ट्वीट में कहा, कोटा में जब यूपी के हजारों बच्चे फंसे थे, तब कहां थीं ये तथाकथित बसें। अदिति की अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें महिला विंग के महासचिव पद से सस्पेंड कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि मजदूरों की घर वापसी के लिए 12 हजार बसें चल रही हैं और 14 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक अपने घरों में पहुंच चुके हैं। अब तो केंद्र सरकार ने विशेष श्रमिक रेल गाडिय़ां भी चला दी हैं। रायबरेली की कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के इस प्रश्न से ही कि यह बसें राजस्थान, पंजाब व महाराष्ट्र में क्यों नहीं लगाई गई में बहुत दम है। उपरोक्त तीनों प्रदेशों में कांग्रेस की सरकारें है और वहां लाखों की तादाद में आज भी उत्तर प्रदेश व बिहार से गये श्रमिक फंसे हुए हैं। उनकी घर-वापसी के लिए कांग्रेस की प्रदेश सरकारों और कांग्रेस नेतृत्व ने कुछ विशेष नहीं किया, मात्र राजनीतिक लाभ लेने व निजी छवि को उभारने के लिए ही प्रियंका गांधी ने बसें भेजने का नाटक किया है। एक प्रदेश की सरकार एक राजनीतिक दल के लिए अपनी बसें कैसे दे सकती है। प्रदेश सरकार विशेषतया राजस्थान, सरकार अगर प्रवासी श्रमिकों को उत्तर प्रदेश या बिहार नि:शुल्क भेजना चाहती तो वह लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद ही इन 500 बसों को इस कार्य हेतु लगा सकती थी, लेकिन ऐसा न राजस्थान न पंजाब व न महाराष्ट्र में हुआ।

उत्तर प्रदेश में केवल और केवल यह सब इसलिए किया गया क्योंकि गांधी परिवार की राजनीति उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती है। कटु सत्य यह है कि गांधी परिवार प्रदेश में राजनीतिक दृष्टि से कमजोर पड़ रहा है। इसलिए बसों को माध्यम बनाकर यह सियासत का खेल खेला गया। तथ्यों को देखते हुए बेहतर यही होता कि अगर योगी सरकार रख-रखाव के हिसाब से ठीक बसों का लाभ लेती और फर्जी और कबाड़ बसों को जगजाहिर कर प्रियंका गांधी के दांवों में कितना दम है उसे जगजाहिर करती।  

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।